Go To Mantra

कृ॒ष्णा रजां॑सि पत्सु॒तः प्र॒याणे॑ जा॒तवे॑दसः । अ॒ग्निर्यद्रोध॑ति॒ क्षमि॑ ॥

English Transliteration

kṛṣṇā rajāṁsi patsutaḥ prayāṇe jātavedasaḥ | agnir yad rodhati kṣami ||

Mantra Audio
Pad Path

कृ॒ष्णा । रजां॑सि । प॒त्सु॒तः । प्र॒ऽयाणे॑ । जा॒तऽवे॑दसः । अ॒ग्निः । यत् । रोध॑ति । क्षमि॑ ॥ ८.४३.६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:43» Mantra:6 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:30» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:6


Reads 333 times

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अग्ने) हे सर्वव्यापिन् महान् देव ! (तव) आपके ये (तिग्माः) तीक्ष्ण (त्विषः) दीप्ति प्रकाश अर्थात् सूर्य्यादिरूप प्रकाश (आरोकाः+इव) मानो सबके रुचिकर होते हुए (दद्भिः) विविध दानों के साथ (वनानि) कमनीय सुन्दर इन जगतों को (बप्सति) सदा उपकार कर रहे हैं। (घ+इत्+अह) इसमें सन्देह नहीं ॥३॥
Connotation: - ईश्वर की तीक्ष्ण दीप्ति ये ही सूर्य्यादिक हैं, जिनसे जगत् को कितने लाभ हो रहे हैं, उसको कौन वर्णन कर सकता है। ये ऋचाएँ भौतिक अग्नि के विषय में भी लगाई जा सकती हैं ॥३॥
Reads 333 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अग्निर्यद् रोधति क्षमि

Word-Meaning: - [१] (अग्निः) = एक प्रगतिशील जीव (यद्) = जब (क्षमि) = इस पृथिवीरूप शरीर में (रोधति) = प्राणों का निरोध करता है तो इस (पत्सुतः) = [ पद् सु-सवति To go, move] वेदवाणी [वेदशब्दों] के अनुसार गति करनेवाले (जातवेदसः) = ज्ञानी पुरुष के प्रयाणे जीवनमार्ग में (रजांसि) = राजसभाव (कृष्णा) = [ कृष् - To pull away, tear] दूर व विनष्ट हो जाते हैं। [२] प्राणायाम के द्वारा हमारा ज्ञान बढ़ता है। सब राजसभाव विनष्ट होते हैं और इस साधक की वृत्ति सात्त्विक बन जाती है।
Connotation: - भावार्थ:- प्राणनिरोध से ज्ञान का वर्धन होता है, राजसभाव विनष्ट होते हैं, वृत्ति सात्त्विक बनती है।
Reads 333 times

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे अग्ने=सर्वव्यापिन् देव ! तव। तिग्माः=तीक्ष्णाः। त्विषः=दीप्तयः सूर्य्यादिरूपाः। आरोकाः इव=आरोचमानाः इव=रुचिकरा इव। दद्भिः=विविधधनैः सह। वनानि=वननीयानि जगन्ति। बप्सति सदा उपकुर्वन्ति। घ+इद्+अह=अत्र न संशयः ॥३॥
Reads 333 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Shaded, coloured and black turn the particles, clusters and spheres of solid materials in the way of the movement of Agni, omnipresent in things born in existence when fire travels in and on the earth or earthly materials.