पु॒रु॒त्रा हि स॒दृङ्ङसि॒ विशो॒ विश्वा॒ अनु॑ प्र॒भुः । स॒मत्सु॑ त्वा हवामहे ॥
English Transliteration
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purutrā hi sadṛṅṅ asi viśo viśvā anu prabhuḥ | samatsu tvā havāmahe ||
Pad Path
पु॒रु॒ऽत्रा । हि । स॒दृङ् । असि॑ । विशः॑ । विश्वाः॑ । अनु॑ । प्र॒ऽभुः । स॒मत्ऽसु॑ । त्वा॒ । ह॒वा॒म॒हे॒ ॥ ८.४३.२१
Rigveda » Mandal:8» Sukta:43» Mantra:21
| Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:33» Mantra:1
| Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:21
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SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - (अङ्गिरस्तम) हे देवों में अतिशय श्रेष्ठ (अग्ने) परमात्मन् ! (कामाय) निज-२ मनोरथ की सिद्धि के लिये (विश्वाः) समस्त (ताः) वे (सुक्षितयः) प्रजाएँ (तुभ्यम्) तेरी ही (पृथक्) पृथक्-२ (येमिरे) स्तुति करती हैं ॥१८॥
Connotation: - परमात्मा ही एक पूज्य, स्तुत्य, ध्येय और गेय है, यह शिक्षा इससे देते हैं ॥१८॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
विशो विश्वा अनु प्रभुः
Word-Meaning: - [१] हे प्रभो! आप (पुरुत्रा) = सर्वत्र (हि) = ही (सदृङ् असि) = समान रूप से हैं। (विश्वाः) = सब (विश: अनु) = प्रजाओं के अनुकूलता से (प्रभुः) = स्वामी है, अर्थात् सबका समान रूप से कल्याण करनेवाले प्रभु हैं। [२] हम (समत्सु) = संग्रामों में व [स मद्] हर्षावसरों में (त्वा हवामहे) = आपको ही पुकारते हैं। आपके द्वारा ही तो इन संग्रामों में विजय व हर्षावसरों में संयम को पाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु सर्वत्र समान रूप से हैं। सब के अनुकूल स्वामी हैं। प्रभु ही हमें संग्रामों में विजयी करते हैं।
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SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे अङ्गिरस्तम=अङ्गिरसां देवानां मध्ये अतिशय श्रेष्ठ अग्ने ! कामाय=स्वस्वमनोरथसिद्ध्यर्थम्। विश्वाः=सर्वाः। ताः। सुक्षितयः=प्रजाः। तुभ्यं। पृथक्-२। येमिरे=स्तुवन्ति ॥१८॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Agni, universal presence, lord and ruler of all people, giving equal care and attention to all nations and regions, in all the battles of our life we invoke you and pray for justice and success.
