Go To Mantra

अस्त॑भ्ना॒द्द्यामसु॑रो वि॒श्ववे॑दा॒ अमि॑मीत वरि॒माणं॑ पृथि॒व्याः । आसी॑द॒द्विश्वा॒ भुव॑नानि स॒म्राड्विश्वेत्तानि॒ वरु॑णस्य व्र॒तानि॑ ॥

English Transliteration

astabhnād dyām asuro viśvavedā amimīta varimāṇam pṛthivyāḥ | āsīdad viśvā bhuvanāni samrāḍ viśvet tāni varuṇasya vratāni ||

Mantra Audio
Pad Path

अस्त॑भ्नात् । द्याम् । असु॑रः । वि॒श्वऽवे॑दाः । अमि॑मीत । व॒रि॒माण॑म् । पृ॒थि॒व्याः । आ । अ॒सी॒द॒त् । विश्वा॑ । भुव॑नानि । स॒म्ऽराट् । विश्वा॑ । इत् । तानि॑ । वरु॑णस्य । व्र॒तानि॑ ॥ ८.४२.१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:42» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:28» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:5» Mantra:1


Reads 535 times

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - पुनः वरुण का वर्णन करते हैं, (सः) वह वरुण (समुद्रः) समुद्र है अर्थात् जिससे समस्त प्राणी उत्पन्न हों, वह समुद्र। यद्यपि सकल जगद्योगि वह है, तथापि प्रत्यक्ष नहीं, किन्तु (अपीच्यः) सबके मध्य में स्थित है, पुनः (तुरः) सर्व सूर्य्यादि देवों से शीघ्रगामी है पुनः (द्याम्+इव) जैसे सूर्य आकाश में क्रमशः चढ़ता है, तद्वत् वह सबके हृदय में आरूढ़ है। (यद्) जो वरुण (आसु) इन प्रजाओं में (यजुः) दान (नि+दधे) देता है और (सः) वह (मायाः) दुष्टों की कपटताओं को (अर्चिना) ज्वालायुक्त (पदा) पद से (अस्तृणात्) नष्ट कर देता है। वह भगवान् (नाकम्) सुखमय स्थान में (आरुहत्) रहता है ॥८॥
Connotation: - जिस कारण वह कपटता नहीं चाहता, अतः निष्कपट होकर उसकी उपासना करो और उसको अपने-२ हृदय में देखो ॥८॥
Reads 535 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'धर्ता-निर्माता - अधिष्ठाता' प्रभु

Word-Meaning: - [१] (असुर:) = सर्वत्र प्राणशक्ति का संचार करनेवाला, (विश्ववेदाः) = सम्पूर्ण धनोंवाला प्रभु (द्याम्) = द्युलोक को (अस्तभ्नात्) = थामता है- आकाशस्थ सब लोक-लोकान्तरों के प्रभु स्वामी हैं। [२] वे वरुण प्रभु ही (पृथिव्याः) = इस विशाल अन्तरिक्ष के व पृथिवीलोक के (वरिमाणं) = विस्तार को (अमिमीत) = बनाते हैं। वे (सम्राट्) = सारे ब्रह्माण्ड के शासक प्रभु (विश्वा भुवनानि) = सब लोकों के (आसीदत्) = अधिष्ठाता हैं। (तानि) = वे लोक-लोकान्तरों के धारण-निर्माण व अधिष्ठातृत्व आदि (विश्वा इत्) = सब ही (व्रतानि) = कर्म (वरुणस्य) = उस पापनिवारक प्रभु के ही हैं।
Connotation: - भावार्थ- द्युलोक को प्रभु थामते हैं, पृथिवी के विस्तार का निर्माण करते हैं और सब लोकों के अधिष्ठाता हैं। ये सब काम उस प्रभु के ही हैं।
Reads 535 times

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - स वरुणः। समुद्रोऽस्ति=यस्मात् समभिद्रवन्ति भूतानि। तथापि सः। अपीच्यः=सर्वेषां पदार्थानामन्तर्हितोऽस्ति। पुनः। तुरः सर्वेभ्यः शीघ्रतरगामी। सूर्य्या द्यामिव। स सर्वत्र। रोहति। यद्=यश्च पुनः। आसु=प्रजासु। यजुर्दानम्। निदधे। पुनः। सः। माया दुष्टानां कापटानि। अर्चिना=अर्चिष्मता तेजस्विना। पदा=चरणेन। अस्तृणात्=हिनस्ति। स नाकं सुखमयस्थानम्। आरुहत्=प्राप्तोऽस्ति। व्याख्यातमन्यत् ॥८॥
Reads 535 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Varuna, lord of light and energy, omniscient and omnipotent ruler of the universe, makes and sustains the heaven of light and the wide earth. The glorious lord and ruler rules all regions of the universe and they all observe the laws of Varuna, infinite they are, beyond description.