Go To Mantra

अ॒स्मा ऊ॒ षु प्रभू॑तये॒ वरु॑णाय म॒रुद्भ्योऽर्चा॑ वि॒दुष्ट॑रेभ्यः । यो धी॒ता मानु॑षाणां प॒श्वो गा इ॑व॒ रक्ष॑ति॒ नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥

English Transliteration

asmā ū ṣu prabhūtaye varuṇāya marudbhyo rcā viduṣṭarebhyaḥ | yo dhītā mānuṣāṇām paśvo gā iva rakṣati nabhantām anyake same ||

Mantra Audio
Pad Path

अस्मै । ऊँ॒ इति॑ । सु । प्रऽभू॑तये । वरु॑णाय । म॒रुत्ऽभ्यः॑ । अर्च॑ । वि॒दुःऽत॑रेभ्यः । यः । धी॒ता । मानु॑षाणाम् । प॒श्वः । गाःऽइ॑व । रक्ष॑ति । नभ॑न्ताम् । अ॒न्य॒के । स॒मे॒ ॥ ८.४१.१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:41» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:26» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:5» Mantra:1


Reads 360 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वरुण व मरुतों' का पूजन

Word-Meaning: - [१] (अस्मा) = इस (सु प्रभूतये) = उत्तम प्रकृष्ट ऐश्वर्यवाले (वरुणाय) = पापनिवारक प्रभु के लिए तथा (विदुष्टरेभ्यः) = उत्कृष्ट ज्ञान को प्राप्त करानेवाले (मरुद्भ्यः) = प्राणों के लिए (ऊ) = निश्चय से (अर्चा) = पूजन करो। प्रभु की उपासना से पाप दूर होते हैं और उत्कृष्ट ऐश्वर्य प्राप्त होता है। प्राणसाधना से दोषों का क्षय होकर ज्ञानदीप्ति प्राप्त होती है। [२] (यः) = जो वरुण हैं वे (धीता) = कर्मों के द्वारा (मानुषाणां) = मनुष्यों की (पश्वः) = ज्ञानेन्द्रियों को [पश्यन्ति] इस प्रकार (रक्षति) = सुरक्षित करते हैं, (इव) = जैसे एक ग्वाला (गाः) = गौओं का रक्षण करता है। ऐसा होने पर अर्थात् वरुण द्वारा हमारी ज्ञानेन्द्रियों के रक्षित होने पर (समे) = सब (अन्यके) = शत्रु (नभन्ताम्) = नष्ट हो जाएँ।
Connotation: - भावार्थ:- हम पापनिवारक वरुण का उपासन करें। ज्ञानदीप्ति को प्राप्त करानेवाले प्राणों की साधना में प्रवृत्त हों। प्रभु कर्मों में प्रेरित करके हमारी इन्द्रियों का रक्षण करते हैं और हमारे सब शत्रुओं का विनाश करते हैं।
Reads 360 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - For progress and prosperity in life, honour, adore and glorify Varuna, this lord supreme, ruler and dispenser of justice who, with his powers, judgement and actions, protects and promotes humans, animals, birds, etc., just as he protects and regulates stars, planets and satellites, all like the sacred cow. Honour and adore scholars and vibrant youth and warriors also and then all differences, oppositions, contradictions, alienations and enmities would vanish.