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विश्वा॑भिर्धी॒भिर्भुव॑नेन वाजिना दि॒वा पृ॑थि॒व्याद्रि॑भिः सचा॒भुवा॑ । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण च॒ सोमं॑ पिबतमश्विना ॥

English Transliteration

viśvābhir dhībhir bhuvanena vājinā divā pṛthivyādribhiḥ sacābhuvā | sajoṣasā uṣasā sūryeṇa ca somam pibatam aśvinā ||

Pad Path

विश्वा॑भिः । धी॒भिः । भुव॑नेन । वा॒जि॒ना॒ । दि॒वा । पृ॒थि॒व्या । अद्रि॑ऽभिः । स॒चा॒ऽभुवा॑ । स॒ऽजोष॑सौ । उ॒षसा॑ । सूर्ये॑ण । च॒ । सोम॑म् । पि॒ब॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ ॥ ८.३५.२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:35» Mantra:2 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:14» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:5» Mantra:2


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (वाजिना) हे ज्ञानी या बली (अश्विना) हे राजन् ! तथा अमात्यमण्डल आप (विश्वाभिः) सर्व प्रकार की (धीभिः) बुद्धियों के (सचाभुवा) साथ ही उत्पन्न हुए हैं। एवम्। (भुवनेन) सर्व प्राणियों के (दिवा) द्युलोक के (पृथिव्या) पृथिवी के (अद्रिभिः) पर्वतों या मेघों के साथ आविर्भूत हुए हैं। तथा (उषसा+सूर्येण+च) मृदुता और तीक्ष्णता दोनों से सम्मिलित हैं, अतः आप महान् हैं, इस कारण सोमरस पीवें ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्राणसाधना से 'बुद्धि व शक्ति' की प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] उषाकाल में सूर्योदय के समय तक सेवित किये जाते हुए ये प्राणापान सोम का शरीर में रक्षण करें। [२] (विश्वाभिः धीभिः) = सब बुद्धियों के साथ (सचाभुवा) = समवेत होकर रहनेवाले, (वाजिना भुवनेन) = शक्तिशाली शरीररूप लोक के साथ रहनेवाले, (दिवा) = प्रभु मस्तिष्करूप द्युलोक के साथ, (पृथिव्या) = शरीररूप पृथिवी के साथ (अद्रिभिः) = [ adore ] उपासनाओं के साथ समवेत होकर रहनेवाले ये प्राणापान सोम का पान करें।
Connotation: - भावार्थ- प्राणसाधना के द्वारा [क] बुद्धि का विकास होता है, [ख] शरीर के सब अंग सबल बनते हैं, [ग] मस्तिष्क व शरीर ठीक रूप से विकसित होते हैं तथा [घ] चित्तवृत्ति की एकाग्रता होकर प्रभु प्रवणता प्राप्त होती है।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे वाजिना=वाजिनौ ज्ञानिनौ। बलिनौ वा। युवाम्। विश्वाभिः धीभिः=प्रज्ञाभिः कर्मभिर्वा। पुनः। भुवनेन=भूतजातेन प्राणिना। दिवा=द्युलोकेन पृथिव्या अद्रिभिः=पर्वतैर्मेघैर्वा। सचाभुवा=सचाभुवौ=सहाविर्भूतौ स्थः। पुनः। उषसा=मार्दवेन सूर्येण तैक्ष्ण्येन च सजोषसा संगतौ स्थः। अतो युवां सोमं पिबतम् ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Mighty and dynamic Ashvins, complementary powers of humanity, associated with the twin forces of attraction and repulsion of nature and the world, the regions of light in space, the earth, clouds and mountains, and united with the sun and dawn, receive, protect, promote and bring the soma energy and joy for the benefit of humanity.