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वह॑न्तु त्वा रथे॒ष्ठामा हर॑यो रथ॒युज॑: । ति॒रश्चि॑द॒र्यं सव॑नानि वृत्रहन्न॒न्येषां॒ या श॑तक्रतो ॥

English Transliteration

vahantu tvā ratheṣṭhām ā harayo rathayujaḥ | tiraś cid aryaṁ savanāni vṛtrahann anyeṣāṁ yā śatakrato ||

Pad Path

वह॑न्तु । त्वा॒ । र॒थे॒स्थाम् । आ । हर॑यः । र॒थ॒ऽयुजः॑ । ति॒रः । चि॒त् । अ॒र्यम् । सव॑नानि । वृ॒त्र॒ऽह॒न् । अ॒न्येषा॑म् । या । श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो ॥ ८.३३.१४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:33» Mantra:14 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:9» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:5» Mantra:14


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभु प्राप्ति व यज्ञ

Word-Meaning: - [१] हे (वृत्रहन्) = वासनाओं को नष्ट करनेवाले प्रभो ! (रथयजुः) = हमारे शरीर रथ में जुते हुए (हरयः) = इन्द्रियरूप अश्व (रथेष्ठाम्) = इस शरीर रथ में स्थित, (तिरः चित्) = तिरोहित होते हुए भी, अदृश्य से होते हुए भी (अर्यम्) = स्वामी (त्वा) = आपको (आवहन्तु) = प्राप्त करायें। हमारी इन्द्रियाँ विषयों में न फँसकर आपकी ओर झुकाववाली हों। [२] हे (शतक्रतो) = अनन्त प्रज्ञानोंवाले प्रभो ! हमारी इन्द्रियाँ (या) = जो (अन्येषाम्) = सामान्य पुरुषों से भिन्न विलक्षण पुरुषों के (सवनानि) = यज्ञ हैं, उन्हें [आवहन्तु=] आप्त करायें। हम भी सामान्य प्राकृत पुरुषों की तरह विषयों में न फँसे रहे। अपितु, विषयव्यावृत्त होकर यज्ञ - प्रवण बनें।
Connotation: - भावार्थ- हमारी इन्द्रियाँ प्रभु प्राप्ति व यज्ञों की ओर झुकाववाली हों।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May the motive forces which power and drive your chariot, we pray, bring you hither, O lord of infinite acts of grace, destroyer of evil and dispeller of darkness, past the acts and voices of others without faith in divinity and prayer.