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अ॒र्वाञ्चं॑ त्वा पुरुष्टुत प्रि॒यमे॑धस्तुता॒ हरी॑ । सो॒म॒पेया॑य वक्षतः ॥

English Transliteration

arvāñcaṁ tvā puruṣṭuta priyamedhastutā harī | somapeyāya vakṣataḥ ||

Pad Path

अ॒र्वाञ्च॑म् । त्वा॒ । पु॒रु॒ऽस्तु॒त॒ । प्रि॒यमे॑धऽस्तुता । हरी॒ इति॑ । सो॒म॒ऽपेया॑य । व॒क्ष॒तः॒ ॥ ८.३२.३०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:32» Mantra:30 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:6» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:5» Mantra:30


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रियमेधस्तुता हरी

Word-Meaning: - [१] हे (पुरुष्टुत) = पालक व पूरक स्तुतिवाले प्रभो! हमारे ये (प्रियमेधस्तुता) = प्रिय हैं यज्ञ और स्तवन जिनको ऐसे (हरी) = इन्द्रियाश्व (त्वा) = आपको (सोमपेयाय) = सोम को शरीर में ही पीने के लिये, इसे शरीर में सुरक्षित करने के लिये (अर्वाञ्चं वक्षतः) = हृदय के अन्दर धारण करते हैं, ये इन्द्रियाँ आपका ही ज्ञान प्राप्त करती हुईं, आपके ही गुणों व नामों का उच्चारण करती हुईं आपको हृदय में स्थापित करती हैं । [२] हृदय में प्रभु का स्मरण ही हमें वासनाओं से आक्रान्त होने से बचाता है, तभी हम सोम का रक्षण कर पाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हमारी इन्द्रियाँ यज्ञों व स्तवन आदि पवित्र कार्यों में लगी रहेंगी, तभी हम हृदय में प्रभु का दर्शन करेंगे और वासनाविहीन पवित्र जीवनवाले बनकर सोम का रक्षण कर पायेंगे। अगले सूक्त के ऋषि देवता भी 'मेधातिथि काण्व' व 'इन्द्र' ही हैं-

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord universally sung and celebrated, may the two motive powers of your chariot, loved and adored by scholars dedicated to yajnic pursuit of knowledge and wisdom, bring you here to join us and share the ecstasy of soma celebration with humanity.