प्रभु स्मरण से सोमरक्षण, सोमरक्षण से प्रभु-दर्शन
Word-Meaning: - [१] हे (अध्वर्यो) = यज्ञशील पुरुष ! तू (वीराय) = [वि + ईर] शत्रुओं को कम्पित करनेवाले, (शिप्रिणे) = उत्तम हनु व नासिका को प्राप्त करानेवाले प्रभु की प्राप्ति के लिये (तु हि) = शीघ्र ही (सोमम्) = सोम को, वीर्यशक्ति को (आसिञ्च) = शरीर में समन्तात् सींचनेवाला बन। इस शक्ति के रक्षण से ही दीप्त ज्ञानार्यग्निवाला बनकर तू सूक्ष्म बुद्धि से प्रभु का दर्शन करेगा। [२] तू (सुतस्य) = इस उत्पन्न सोम के (पीतये) = शरीर में ही पीने के लिये भी (भरा) = उस प्रभु को हृदय में धारण कर। यह प्रभु-स्मरण (वासना) = विनाश के द्वारा तुझे सोमरक्षण के योग्य बनायेगा ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु स्मरण से हम सोम का रक्षण कर पायेंगे। सुरक्षित सोम बुद्धि को तीव्र बनाकर हमें प्रभु-दर्शन के योग्य बनायेगा ।