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भू॒याम॑ ते सुम॒तौ वा॒जिनो॑ व॒यं मा न॑: स्तर॒भिमा॑तये । अ॒स्माञ्चि॒त्राभि॑रवताद॒भिष्टि॑भि॒रा न॑: सु॒म्नेषु॑ यामय ॥

English Transliteration

bhūyāma te sumatau vājino vayam mā naḥ star abhimātaye | asmāñ citrābhir avatād abhiṣṭibhir ā naḥ sumneṣu yāmaya ||

Pad Path

भू॒याम॑ । ते॒ । सु॒ऽम॒तौ । वा॒जिनः॑ । व॒यम् । मा । नः॒ । स्तः॒ । अ॒भिऽमा॑तये । अ॒स्मान् । चि॒त्राभिः॑ । अ॒व॒ता॒त् । अ॒भिष्टि॑ऽभिः । आ । नः॒ । सु॒म्नेषु॑ । य॒म॒य॒ ॥ ८.३.२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:3» Mantra:2 | Ashtak:5» Adhyay:7» Varga:25» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:1» Mantra:2


SHIV SHANKAR SHARMA

इससे आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! (वाजिनः+ते) सर्वज्ञानमय तेरी (सुमतौ) कल्याणी बुद्धि में अर्थात् आज्ञा में (वयम्+भूयाम) सदा हम स्थित होवें। तेरी आज्ञा का उल्लङ्घन कदापि न करें। यद्वा (ते+सुमतौ) तेरी आज्ञा में स्थित होकर (वयम्) हम उपासक (वाजिनः) ज्ञानवान् होवें। हे भगवन् ! (अभिमातये) अज्ञान के लिये (नः) हमको (मा+स्तः) मत हिंसित कर। हम मनुष्य अज्ञानी हैं, तेरी आज्ञा में नहीं रहते हैं, इस कारण हम पर क्रोध न कर, किन्तु (अस्मान्) हमको (चित्राभिः) नाना प्रकार (अभिष्टिभिः) अभ्यर्थनीय रक्षाओं के साथ (अवतात्) रक्षा कर। हे इन्द्र ! (नः) हमको (सुम्नेषु) ऐहिक और पारलौकिक सुखों के ऊपर (आयामय) स्थापित कर। यह प्रार्थना स्वीकृत हो ॥२॥
Connotation: - हे भगवन् ! हम अज्ञ हैं, तेरी विभूति नहीं जानते, अतः हे जगदीश ! हम में वैसी शक्ति स्थापित कर, जिससे युक्त होकर हम तेरे आज्ञापालन में समर्थ होवें। हमको कुमार्ग से लौटा कर सुपथ की ओर ले चल ॥२॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (वयं) हम लोग (वाजिनः) धनवान् होकर (ते, सुमतौ) आपकी सुबुद्धि में (भूयाम) वर्तमान हों (अभिमातये) अभिमानी शत्रु के लिये (नः) हमको (मा) मत (स्तः) हिंसित करें (चित्राभिः, अभिष्टिभिः) अनेक अभिलाषाओं से (अस्मान्, अवतात्) हमको सुरक्षित करके (नः) हमको (सुम्नेषु) सुखों में (आ, यमय) सम्बद्ध करें ॥२॥
Connotation: - हे कर्मयोगी भगवन् ! आप ऐसी कृपा करें कि हम लोग ऐश्वर्य्यसम्पन्न होकर आपके सदृश उत्तम कर्मों में प्रवृत्त हों, हम अभिमानी शत्रुओं के पादाक्रान्त न हों, हे प्रभो ! आप हमारी कामनाओं को पूर्ण करें, जिससे हम सुखसम्पन्न होकर सदैव परमात्मा की आज्ञापालन में प्रवृत्त रहें ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मा नः स्तः अभिमातये

Word-Meaning: - [१] हे प्रभो ! (वयम्) = हम (ते सुमतौ) = आपकी कल्याणी मति में चलते हुए (वाजिनः) = शक्तिशाली (भूमाय) = हों। इस प्रकार सुमति प्राप्त कराके आप (नः) = हमें (अभिमातये) = अभिमान रूप शत्रु के लिये (मा स्तः) = मत विनष्ट करिये। [२] (अस्मान्) = हमें आप (चित्राभिः) = अद्भुत (अभिष्टिभिः) = [इष्ट प्राप्तियों] के द्वारा (अवतात्) = सहायताओं [ assistance] से रक्षित करिये। तथा (नः) = हमें (सुम्नेषु) = आनन्दों में व अपने रक्षणों में (आयामय) = नियमित करिये। हमारा निवास सदा आनन्दों में व आपके रक्षणों में हो।
Connotation: - भावार्थ- हमें प्रभु की कल्याणी मति प्राप्त हो। हम अभिमान से दूर रहें। प्रभु अद्भुत सहायताओं द्वारा हमारा रक्षण करें और हमें अपने रक्षणों में स्थापित करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

अनयाऽऽशिषं प्रार्थयते।

Word-Meaning: - हे भगवन् ! वाजिनः=सर्वज्ञानमयस्य। ते=तव। सुमतौ=कल्याण्यां मतौ तवाज्ञायामित्यर्थः। वयं भूयाम=तिष्ठाम। तवाज्ञां न कदाप्युल्लङ्घयाम। यद्वा। तव सुमतौ स्थिता वयं वाजिनः=विज्ञानवन्तो भूयाम। हे इन्द्र ! अभिमातये=अभिमातिरज्ञानं तस्मै। नोऽस्मान्। मा स्तः=मा हिंसीः। वयमज्ञा इति हेतोरस्मान् मा वधीः। स्तृङ् हिंसायां माङि लुङि छान्दसश्च्लेर्लुक्। पुनः। अस्मान्=तवाधीनान्। अभिष्टिभिः=अभ्येषणीयाभिः= प्रार्थनीयाभिः। चित्राभिः=नानाविधाभी रक्षाभिरिति शेषः। अवतात्=अव=रक्ष। नोऽस्मान्। सुम्नेषु=निःश्रेयसेषु अभ्युदयेषु च। आयामय=समन्तात् स्थापय ॥२॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (वाजिनः, वयं) धनवन्तः सन्तो वयं (ते, सुमतौ) तव सुबुद्धौ (भूयाम) वृत्ताः स्याम (अभिमातये) अभिमानिने शत्रवे (नः) अस्मान् (मा) न (स्तः) अहिंसीः (चित्राभिः, अभिष्टिभिः) बहुविधैरभिलाषैः (अस्मान्, अवतात्) अस्मान् रक्षतात् (नः) अस्मान् (सुम्नेषु) सुखेषु (आ, यमय) आयतान् कुरु ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - In your guidance and goodwill may we be prosperous and progressive with vibrancy. Hurt us not lest we fall a prey to an enemy. Protect us and advance us to all kinds of success with fulfilment of our aspirations, and lead us in a life of happiness, refinement and grace.