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विश्वे॒ हि ष्मा॒ मन॑वे वि॒श्ववे॑दसो॒ भुव॑न्वृ॒धे रि॒शाद॑सः । अरि॑ष्टेभिः पा॒युभि॑र्विश्ववेदसो॒ यन्ता॑ नोऽवृ॒कं छ॒र्दिः ॥

English Transliteration

viśve hi ṣmā manave viśvavedaso bhuvan vṛdhe riśādasaḥ | ariṣṭebhiḥ pāyubhir viśvavedaso yantā no vṛkaṁ chardiḥ ||

Pad Path

विश्वे॑ । हि । स्म॒ । मन॑वे । वि॒श्वऽवे॑दसः॑ । भुव॑न् । वृ॒धे । रि॒शाद॑सः । अरि॑ष्टेभिः । पा॒युऽभिः॑ । वि॒श्व॒ऽवे॒द॒सः॒ । यन्त॑ । नः॒ । अ॒वृ॒कम् । छ॒र्दिः ॥ ८.२७.४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:27» Mantra:4 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:31» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:4


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SHIV SHANKAR SHARMA

गृह या यज्ञशाला को शुद्ध बनाकर रक्खे, यह दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (मनवे+वृधे) मनुष्यजाति के कल्याण और वृद्धि के लिये (विश्ववेदसः) सर्वधन और विज्ञानसहित (विश्वे+हि+स्म) सब ही विद्वद्गण (भुवन्) होवें और (रिशादसः) उनके शत्रुओं और विघ्नों के नाश करनेवाले होवें और (विश्ववेदसः) हे सर्वधनविज्ञानसम्पन्न बुद्धिमान् मनुष्यों ! आप सब (अरिष्टेभिः+पायुभिः) बाधारहित रक्षाओं से युक्त होकर (नः) हमारे (छर्दिः) निवासस्थान को (अवृकम्+यन्त) पाप और बाधारहित कीजिये ॥४॥
Connotation: - प्रत्येक पुरुष को उचित है कि वह अपने गृह को शुद्ध पवित्र बना रक्खे ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अवृक छर्दि

Word-Meaning: - [१] (विश्वे) = सब (विश्ववेदसः) = सम्पूर्ण धनोंवाले व ज्ञानोंवाले, (रिशादसः) = हिंसक शत्रुओं को [काम-क्रोध-लोभ को] नष्ट करनेवाले देव (हि ष्मा) = निश्चय से (मनवे) = विचारशील पुरुष के लिये (वृधे भुवन्) = वृद्धि के लिये होते हैं। ऐसे देवों के सम्पर्क में आकर एक विचारशील पुरुष दिन-प्रतिदिन वृद्धि को प्राप्त होता चलता है। [२] ये (विश्ववेदसः) = सम्पूर्ण धनों व ज्ञानोंवाले देव (अरिष्टेभिः पायुभिः) = अहिंसित रक्षणों के द्वारा (नः) = हमारे लिये (अवृकम्) = [वृक] भेड़िये, उल्लू, कौवे व गीदड़ की वृत्तिवाले पुरुषों से रहित (छर्दिः) = घर को (यन्त) = प्राप्त करायें। हमारे घरों में 'बहुत खानेवाले, मूर्ख, धूर्त व कायर' व्यक्ति न हों। हम स्वयं उत्तम वृत्ति के बनें, हमारे सन्तान भी उत्तम वृत्ति के हों।
Connotation: - भावार्थ - ज्ञानियों के सम्पर्क में हम दिव्यता में वृद्धि को प्राप्त करें। हमारे घरों में 'मिताहारी, ज्ञानी, सरल व वीर' पुरुषों का निवास हो।
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SHIV SHANKAR SHARMA

गृहं शोधनीयमिति दर्शयति।

Word-Meaning: - विश्ववेदसः=सर्वधनज्ञानाः। रिशादसः=शत्रूणां विनाशकाश्च। विश्वे=सर्वे देवाः। मनवे=मनोः। वृधे=वर्धनाय। भुवन्=भवन्तु। अपि च। हे विश्ववेदसः ! अरिष्टेभिः=बाधारहितैः। पायुभिः=पालनैः सह। नः=अस्मभ्यम्। अवृकम्=चोरादिरहितं पापादिविरहितम्। छर्दिः=गृहम्। यन्त=प्रयच्छत ॥४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May all the divine powers of the universe, destroyers of negativities, be for the protection and progress of mankind. May all the divinities of the universe in possession of wealth, power and knowledge along with modes of protection free from hurt and injury bring us a peaceful home on earth free from sin and crime.