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दे॒वंदे॑वं॒ वोऽव॑से दे॒वंदे॑वम॒भिष्ट॑ये । दे॒वंदे॑वं हुवेम॒ वाज॑सातये गृ॒णन्तो॑ दे॒व्या धि॒या ॥

English Transliteration

devaṁ-devaṁ vo vase devaṁ-devam abhiṣṭaye | devaṁ-devaṁ huvema vājasātaye gṛṇanto devyā dhiyā ||

Pad Path

दे॒वम्ऽदे॑वम् । वः॒ । अव॑से । दे॒वम्ऽदे॑वम् । अ॒भिष्ट॑ये । दे॒वम्ऽदे॑वम् । हु॒वे॒म॒ । वाज॑ऽसातये । गृ॒णन्तः॑ । दे॒व्या । धि॒या ॥ ८.२७.१३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:27» Mantra:13 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:33» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:13


SHIV SHANKAR SHARMA

प्रत्येक विद्वान् आदरणीय है, इससे यह दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - हे विद्वानो ! (देव्या) शुद्ध, पवित्र और देव समान (धिया) मन, क्रिया और स्तुति से युक्त हो (गृणन्तः) स्तुति करते हुए हम (वः) आप लोगों में से प्रत्येक (देवं देवम्) विद्वान् को (अवसे) साहाय्य के लिये (हुवेम) निमन्त्रित करते हैं, (अभिष्टये) निज-२ अभिलषित वस्तुओं की प्राप्ति के लिये (देवं देवम्) प्रत्येक विद्वान् का सत्कार करते हैं (सातये) एवं अन्यान्य विविध लाभों के लिये (देवं देवम्) प्रत्येक विद्वान् को पूजते हैं, अतः आप हमारे ऊपर कृपा करें ॥१३॥
Connotation: - विद्वानों का सत्कार करके उत्तमोत्तम शिक्षा गृहस्थ ग्रहण करें ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अवसे अभिष्टये वाजसातये

Word-Meaning: - [१] हम (अवसे) = रक्षण के लिये (वः देवं देवम्) = तुम सब के प्रकाशित करनेवाले उस देव को (हुवेम) = पुकारते हैं। उस (देवं देवम्) = देवों के भी देव महादेव प्रभु को (अभिष्टये) = काम आदि वासनाओं पर आक्रमण के लिये पुकारते हैं। कामदेव पर महादेव ही तो आक्रमण करेंगे। [२] हम (वाजसातये) = शक्ति की प्राप्ति के लिये (देव्या धिया) = प्रकाशमयी बुद्धि से (गृणन्तः) = स्तवन करते हुए, स्तुति-वाणियों का उच्चारण करते हुए (देवं देवम्) = उस देवाधिदेव को पुकारते हैं।
Connotation: - भावार्थ-उस देवाधिदेव प्रभु का आराधन रक्षण के लिये होता है, हमारी वासनाओं पर यह आक्रमण का-सा बनता है और शक्ति लाभ के लिये होता है।

SHIV SHANKAR SHARMA

प्रत्येकं विद्वान् सभाजनीय इत्यनया दर्शयति।

Word-Meaning: - देव्या=शुद्धया=पवित्रया। धिया=स्तुत्या मनसा च। युक्ता वयम्। गृणन्तः=स्तुतिं कुर्वाणाः सन्तः। अवसे=रक्षणाय। वः=युष्माकं मध्ये प्रत्येकम्। देवं देवम्। हुवेम=आह्वयामः। अभिष्टये=अभिलषितवस्तुप्राप्तये। देवं देवं हुवेम। सातये=लाभाय च। देवं देवं हुवेम ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Every one of you, divines, for the sake of protection, every one of you, holy ones, for our cherished aims and objects of well being, every one of you, divinities, for advancement and victory in life, we invoke and adore, singing and praising with holy thoughts, words and actions.