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अस्ति॒ हि व॑: सजा॒त्यं॑ रिशादसो॒ देवा॑सो॒ अस्त्याप्य॑म् । प्र ण॒: पूर्व॑स्मै सुवि॒ताय॑ वोचत म॒क्षू सु॒म्नाय॒ नव्य॑से ॥

English Transliteration

asti hi vaḥ sajātyaṁ riśādaso devāso asty āpyam | pra ṇaḥ pūrvasmai suvitāya vocata makṣū sumnāya navyase ||

Pad Path

अस्ति॑ । हि । वः॒ । स॒जा॒त्य॑म् । रि॒शा॒द॒सः॒ । देवा॑सः । अस्ति॑ । आप्य॑म् । प्र । नः॒ । पूर्व॑स्मै । सु॒वि॒ताय॑ । वो॒च॒त॒ । म॒क्षु । सु॒म्नाय॑ । नव्य॑से ॥ ८.२७.१०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:27» Mantra:10 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:32» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:10


SHIV SHANKAR SHARMA

प्राचीन और नवीन दोनों का ग्रहण करे, यह उपदेश इसमें देते हैं।

Word-Meaning: - (रिशादसः) हे हमारे निखिल विघ्नविनाशक (देवासः) विद्वानो ! हमारे साथ (वः) आप लोगों का (सजात्यम्+अस्ति+हि) समानजातित्व अवश्य है और (आप्यम्+अस्ति) बन्धुत्व भी है। हे विद्वानो ! इस हेतु (नः) हम लोगों को (पूर्वस्मै) प्राचीन (सुविताय) परमैश्वर्य्य की ओर आप (प्र+वोचत) ले चलें और (नव्यसे) अतिनवीन (सुम्नाय) अभ्युदय की ओर भी (मक्षु) शीघ्र ले चलें ॥१०॥
Connotation: - जो वस्तु प्राचीनकाल की अच्छी और लाभकारी हों, उनकी रक्षा करना और जो नूतन-२ विषय प्रचलित हों, उनको ग्रहण करना मनुष्यधर्म है ॥१०॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सुविताय-सुम्नाय

Word-Meaning: - [१] हे (देवासः) = देवो ! (हि) = निश्चय से (वः) = आपका (सजात्यम्) = समान जातित्व (अस्ति) = है। हे (रिशादस:) = हिंसक 'काम-क्रोध-लोभ' आदि भावों के विनाशक देवो! आपका (आप्यम्) = बन्धुत्व (अस्ति) = है। दिव्य गुण सब एक जाति के हैं और एक दूसरे के साथ सम्बद्ध हैं। एक दिव्य गुण के अपनाने पर दूसरे दिव्य गुण स्वतः उसके साथ खिचे चले आते हैं। [२] हे देवो ! दिव्य वृत्तिवाले पुरुषो! (नः) = हमारे लिये (पूर्वस्मै) = सर्वोत्कृष्ट (सुविताय) = सुवित के लिये [सुष्टु ईयते] अभ्युदय के लिये (प्रवोचत) = मार्ग का उपदेश करो (मक्षू) = शीघ्र (नव्यसे) = नवतर, अतिशयेन स्तुत्य (सुम्नाय) = यज्ञ के लिये उपदेश करो।
Connotation: - भावार्थ- दिव्यगुणों का परस्पर समान जातित्व व बन्धुत्व है। इन दिव्य गुणों से सम्पन्न पुरुष हमारे लिये अभ्युदय व स्तुत्य यज्ञों का उपदेश करें। इस सुवित व सुम्न के प्राप्त करके हम भी देव बनें।

SHIV SHANKAR SHARMA

प्राचीननवीनोभयग्रहणायोपदिशति।

Word-Meaning: - हे रिशादसः=अस्माकं रिशतां हिंसतां विघ्नानामसितारः प्रक्षेप्तारः। देवासः=देवा विद्वांसः। वः=युष्माकम्। अस्माभिः सह। सजात्यम्=समानजातित्वम्। अस्ति+हि=विद्यत एव। आप्यम्=बन्धुत्वमप्यस्ति। आपिर्बन्धुस्तस्य भाव आप्यम्। हे देवास्तस्माद्धेतोर्यूयम्। पूर्वस्मै=पुराणाय। सुविताय= परमैश्वर्य्याय। नः=अस्मान्। प्रवोचत=प्रकर्षेण नयत। अपि च। नव्यसे=नवीयसे=नवतराय। सुम्नाय=सुखाय च। मक्षु=शीघ्रम्। प्रवोचत ॥१०॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O divinities of nature and humanity, destroyers of negativities and enmities, there is a kinship among yourselves and between you and ourselves. There is a natural affinity too among yourselves and between you and ourselves, a friendship and alliance. Pray enlighten us about our ancient welfare and prosperity and lead us as ever to a new phase of prosperity and well being, the latest way.