Go To Mantra

स त्वं नो॑ देव॒ मन॑सा॒ वायो॑ मन्दा॒नो अ॑ग्रि॒यः । कृ॒धि वाजाँ॑ अ॒पो धिय॑: ॥

English Transliteration

sa tvaṁ no deva manasā vāyo mandāno agriyaḥ | kṛdhi vājām̐ apo dhiyaḥ ||

Pad Path

सः । त्वम् । नः॒ । दे॒व॒ । मन॑सा । वायो॒ इति॑ । म॒न्दा॒नः । अ॒ग्रि॒यः । कृ॒धि । वाजा॑न् । अ॒पः । धियः॑ ॥ ८.२६.२५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:26» Mantra:25 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:30» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:25


Reads 373 times

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः उसी को दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (देव+वायो) हे दिव्यगुणसम्पन्न नायक ! जिस हेतु आप (मन्दानः) आनन्दित होकर प्रजाओं को आनन्दित कर रहे हैं (अग्रियः) सेनाओं के अग्रगामी होते हैं, इसलिये (स त्वम्) वह आप (मनसा) अपने मन से (नः) हम लोगों के (वाजान्) अन्नों को (अपः) क्षेत्र के लिये जलों को (धियः) और उत्साहों को (कृधि) बढ़ावें ॥२५॥
Connotation: - सेनानी अन्न, जल और प्रजोत्साह को भी विविध उपायों से बढ़ाया करें ॥२५॥
Reads 373 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वाजान् अपः धियः

Word-Meaning: - [१] हे (देव) = सब न्यूनताओं व रोगों को पराजित करनेवाले (वायो) = वायुदेव ! (सः त्वम्) = वह तू (नः) = हमें (मनसा) = उत्तम मन के द्वारा (मन्दानः) = आनन्दित करनेवाला हो। (अग्रियः) = तेरा ही सब देवों में प्रमुख स्थान है, तू सर्वश्रेष्ठ है । [२] तू हमारे जीवनों में (वाजान्) = शक्तियों को (कृधि) = कर । (अपः) = रेतःकण रूप जलों को तू करनेवाला हो। (धियः) = बुद्धियों का तू सम्पादन कर।
Connotation: - भावार्थ- वायु का देवों में प्रथम स्थान है, यह हमारे जीवनों में शक्ति, बुद्धि व रेतःकणों को जन्म देता है। वायु के आराधन से उत्कृष्ट मन को प्राप्त करके यह 'मनु' बनता है। प्रकाश की किरणोंवाला होता हुआ यह 'वैवस्वत' होता है। यह 'मनु वैवस्वत' ही अगले सूक्त का ऋषि है-
Reads 373 times

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तदेव दर्शयति।

Word-Meaning: - हे देव ! वायो ! मनसा=स्वकीयेन चेतसा। मन्दानः=हृष्यन्। अग्रियः=अग्रगामी। स त्वम्। नः=अस्माकम्। वाजान्=अन्नानि। अपः=जलानि। धियः=कर्माणि। कृधि=कृणु ॥२५॥
Reads 373 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Vayu, such as you are, brilliant and generous, happy and joyous at heart, always in the forefront of defence and advancement, pray develop our resources of food and water, energy, power and progress, and extend the possibilities of the reach of our science and intelligence.