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वायो॑ या॒हि शि॒वा दि॒वो वह॑स्वा॒ सु स्वश्व्य॑म् । वह॑स्व म॒हः पृ॑थु॒पक्ष॑सा॒ रथे॑ ॥

English Transliteration

vāyo yāhi śivā divo vahasvā su svaśvyam | vahasva mahaḥ pṛthupakṣasā rathe ||

Pad Path

वायो॒ इति॑ । या॒हि । शि॒व॒ । आ । दि॒वः । वह॑स्व । सु । सु॒ऽअश्व्य॑म् । वह॑स्व । म॒हः । पृ॒थु॒ऽपक्ष॑सा । रथे॑ ॥ ८.२६.२३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:26» Mantra:23 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:30» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:23


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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः वही विषय आ रहा है।

Word-Meaning: - (शिव+वायो) हे कल्याणकारी सेनानायक (दिवः+याहि) क्रीड़ास्थान को त्याग करके भी प्रजा की ओर पहुँचें, (स्वश्व्यम्+सुवहस्व) रथ में सुन्दर-२ घोड़े लगाकर प्रजा की सम्पत्ति की वृद्धि के लिये देश में भ्रमण करें। (पृथुपक्षसा) स्थूल पदार्थवाले घोड़ों को (महः+रथे) महान् रथ में (वहस्व) लगावें ॥२३॥
Connotation: - सेनापति स्थायी सुदृढ़ रथों पर आरूढ़ होकर कल्याणार्थ देश में भ्रमण करें ॥२३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ज्ञान- उत्तम इन्द्रियाश्व- तेजस्विता

Word-Meaning: - [१] (वायो) = हे वायुदेव ! (दिवः) = द्युलोक के, मस्तिष्करूप द्युलोक के (शिवा) = कल्याणकर ज्ञानों को (याहि) = प्राप्त करा। तू (स्वश्व्यम्) = उत्तम इन्द्रियाश्व समूह को (सुवहस्व) = सम्यक् प्राप्त करानेवाला हो। [२] (रक्षे) = इस शरीर रथ में (महः) = तेजस्विता को (वहस्व) = प्राप्त करा । तथा (पृथुपक्षसा) = विशाल ज्ञान व शक्ति के परिग्रहोंवाले [ पक्ष परिग्रहे ] इन्द्रियाश्वों को संयुक्त कर ।
Connotation: - भावार्थ- शुद्ध वायु का सम्पर्क मस्तिष्क को दीप्त करके ज्ञान - वृद्धि का कारण बनता है, इन्द्रियाश्वों को उत्तम बनाता है, तथा तेजस्विता को प्राप्त कराता है।
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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तदनुवर्तते।

Word-Meaning: - हे शिव+वायो=कल्याणकारिन् ! त्वम्। दिवः=क्रीडास्थानादपि। आयाहि। स्वश्व्यम्=शोभनाश्वयुक्तं रथम्। सुवहस्व। पृथुपक्षसा=स्थूलपक्षौ। अश्वौ। महः=महति। रथे। वहस्व=योजय ॥२३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Vayu, blissful power of defence, security and refinement, come from the regions of light, yoke the great transportive forces to your chariot and bring us the best things we ought to obtain.