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यु॒वं व॑रो सु॒षाम्णे॑ म॒हे तने॑ नासत्या । अवो॑भिर्याथो वृषणा वृषण्वसू ॥

English Transliteration

yuvaṁ varo suṣāmṇe mahe tane nāsatyā | avobhir yātho vṛṣaṇā vṛṣaṇvasū ||

Pad Path

यु॒वम् । व॒रो॒ इति॑ । सु॒ऽसाम्णे॑ । म॒हे । तने॑ । ना॒स॒त्या॒ । अवः॑ऽभिः । या॒थः॒ । वृ॒ष॒णा॒ । वृ॒ष॒ण्व॒सू॒ इति॑ वृषण्ऽवसू ॥ ८.२६.२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:26» Mantra:2 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:26» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:2


SHIV SHANKAR SHARMA

राजा का अन्य कर्त्तव्य कहते हैं।

Word-Meaning: - (नासत्या) हे असत्यरहित (वृषणा) हे प्रजाओं में धनवर्षा करनेवाले (वृषण्वसू) हे वर्षणशीलधनयुक्त राजन् तथा मन्त्रिदल ! (युवम्) आप सब (वरो) श्रेष्ठ पुरुष (सुसाम्ने) सुन्दर गान करनेवाले (महे) महान् (तने) विद्या धनादि विस्तार करनेवाले इत्यादि, इस प्रकार के मनुष्यों के लिये (अवोभिः) पालन के साथ अर्थात् रक्षक सेनाओं के साथ (याथः) यात्रा करते हैं ॥२॥
Connotation: - राजा को उचित है कि अच्छे पुरुषों की रक्षा करे और देश में भ्रमण कर उनकी दशाओं से परिचित हो यथायोग्य प्रबन्ध करे ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वृषणा वृषण्वसू

Word-Meaning: - [१] हे (नासत्या) = असत्य से रहित अश्विनीदेवो-प्राणापानो ! (युवम्) = आप (उ) = निश्चय से (वरा) = वरने के योग्य हो। आपकी साधना ही मनुष्य का महान् कर्त्तव्य है। आप (सुषाम्णे) = उत्तम साम-शान्ति व उपासना वाले पुरुष के लिये महे तने शक्तियों के महान् विस्तार के लिये होते हो। [२] हे प्राणापानो! आप (वृषणा) = शक्तिशाली हो, (वृषण्वसू) = सुखवर्षक वसुओंवाले हो । (अवोभिः याथः) = सब रक्षणों के हेतु से आप हमें प्राप्त होते हो। शरीर में शक्ति की ऊर्ध्वगति करके 'शरीर, मन व बुद्धि' का आप ही रक्षण करते हो।
Connotation: - भावार्थ- मनुष्य को इस जीवन में प्राणसाधना का ही वरण करना चाहिये। यही उसकी शक्तियों के विस्तार को करेगी। यही उसका सर्वथा रक्षण करेगी।

SHIV SHANKAR SHARMA

राजकर्त्तव्यतान्तरमाह।

Word-Meaning: - हे नासत्या=हे असत्यरहितौ ! हे वृषणा=हे वृषणौ ! हे वृषण्वसू=हे अश्विनौ ! युवम्=युवाम्। वरो=वरवे=श्रेष्ठाय। सुसाम्ने=शोभनगानकारिणे। महे=महते। तने=तनोतीति तनः=तननाय। अवोभिः=रक्षणैः सह। याथः=गच्छथः ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O virile and generous Ashvins, harbingers of showers of wealth and enlightenment, ever true and far from untruth, you go forward with your protections and promotions for the good and exhortation of the Sama celebrants and men of great and expansive philanthropy (who work for the advancement of society).