प्राणापान ने मेरी प्रार्थना को कब सुना ?
Word-Meaning: - [१] प्राणसाधना से शरीर में शक्ति का रक्षण होता है। यह सुरक्षित सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनता है। इसी बात को इस प्रकार कहते हैं कि हे प्राणापानो! (यद्) = जब आप (अदः) = उस (दिवः) = ज्ञान के (क्रर्णवे) = समुद्र में (मदथः) = आनन्द का अनुभव करते हो। तब ही यह कहा जा सकता है कि आपने (मे) = मेरी प्रार्थना को (इत्) = निश्चय से (श्रुतम्) = सुना । [२] ये प्राणापान चित्तवृत्ति के निरोध के द्वारा हृदय को बड़ा पवित्र बनाते हैं। उस पवित्र हृदय में प्रभु प्रेरणा सुनाई पड़ती है । मन्त्र में कहते हैं कि (यद) = जब (इषः) = प्रेरणा के गृहे गृहभूत हृदय में आप वा निश्चय से (मदथः) = आनन्दित होते हो तो हे अमर्त्या हमें न मरने देनेवाले व विषय-वासनाओं का शिकार न होने देनेवाले प्राणापानो! आप मेरी प्रार्थना को सुनते हो ।
Connotation: - भावार्थ- प्राणसाधना का यही फल है कि ज्ञानाग्नि दीप्त होती है और साधक ज्ञानार्णव में तैरता हुआ आनन्द का अनुभव करता है। इसी प्रकार पवित्र हृदय में प्रभु प्रेरणा को सुनता हुआ यह साधक वासनाओं का शिकार नहीं हो जाता।