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यो वां॑ य॒ज्ञेभि॒रावृ॒तोऽधि॑वस्त्रा व॒धूरि॑व । स॒प॒र्यन्ता॑ शु॒भे च॑क्राते अ॒श्विना॑ ॥

English Transliteration

yo vāṁ yajñebhir āvṛto dhivastrā vadhūr iva | saparyantā śubhe cakrāte aśvinā ||

Pad Path

यः । वा॒म् । य॒ज्ञेभिः॑ । आऽवृ॑तः । अधि॑ऽवस्त्रा । व॒धूःऽइ॑व । स॒प॒र्यन्ता॑ । शु॒भे । च॒क्रा॒ते॒ इति॑ । अ॒श्विना॑ ॥ ८.२६.१३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:26» Mantra:13 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:28» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:13


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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः उसी अर्थ को कहते हैं।

Word-Meaning: - (अधिवस्त्रा) ऊपर से नीचे तक वस्त्र धारण करनेवाली (वधूः+इव) कुलवधू के समान (यः+वाम्+यज्ञेभिः+आवृतः) जो जन अपने शुभकर्मरूप वस्त्रों से अपने को ढकते हैं, उनकी कामनाओं को (सपर्यन्ता) पूर्ण करते हुए आप सब उनको (शुभे) शुभकर्म के ऊपर या मङ्गल के ऊपर (चक्रात) स्थापित करते हैं (अश्विना) हे मन्त्रिदलसहित राजन् ! आप सदा प्रजाओं का कल्याण कीजिये ॥१३॥
Connotation: - राजसभा से प्रचालित नियमों को सब मानें और जो कोई उनके प्रचार में साहाय्य दान करें, वे परितोषणीय हैं ॥१३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्राणसाधना से आवृत जीवन

Word-Meaning: - [१] (यः) = जो भी व्यक्ति हे प्राणापानो ! (वाम्) = आपके (यज्ञेभिः) = यज्ञों से, पूजनों से (आवृतः) = समन्तात् इस प्रकार आवृत होता है, (इव) = जैसे (अधिवस्त्रा वधूः) = उत्कृष्ट वस्त्रों को धारण किये हुए वधू । हे (अश्विना) = प्राणापानो! आप उसे (सपर्यन्ता) = अभीष्ट ज्ञान व शक्ति के दान से पूजित करते हुए (शुभे चक्राते) = सदा मंगल कार्यों में व्यापृत करते हो। [२] मनुष्य प्राण-साधना से अपने जीवन को इस प्रकार आवृत कर ले, जैसे एक वधू वस्त्रों से अपने शरीर को आवृत करती है। वधू की शोभा अपने अंगों को वस्त्रों से आवृत किये हुए होने में ही है। इसी प्रकार मनुष्य की शोभा इसी में है कि वह अपने प्रत्येक दिन को प्राणसाधना से आवृत कर ले, प्रात: भी प्राणसाधना, सायं भी प्राणसाधना । ये प्राणापान ज्ञान व शक्ति आदि इष्ट पदार्थों को प्राप्त करायेंगे और हमें सदा शुभ वृत्तिवाला बनायेंगे।
Connotation: - भावार्थ- प्राणसाधना हमारे जीवन की रक्षिका बन जाये। यह हमें ज्ञान व शक्ति आदि अभीष्ट वस्तुओं को प्राप्त कराती हुई सदा शुभ कार्यों में प्रवृत्त रखेगी।
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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तमर्थमाह।

Word-Meaning: - अधिवस्त्रा=अधिकवस्त्रा=उपरिनिहितवासाः। वधूरिव। यो जनः। वां=युवयोः। यज्ञेभिः=कर्मभिर्व्रतैश्च आवृतो भवति। सपर्यन्ता=अभीष्टप्रदानेन तं परिचरन्तौ। युवाम्। तं मनुष्यम्। शुभे=शुभकर्मणि। चक्राते=कुरुतः ॥१३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, like a bride covered in sacramental robes, one who is robed in the fragrance of yajna performed in your honour, him you requite with fulfilment and establish him in the good life.