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यु॒वाद॑त्तस्य धिष्ण्या यु॒वानी॑तस्य सू॒रिभि॑: । अह॑रहर्वृषण॒ मह्यं॑ शिक्षतम् ॥

English Transliteration

yuvādattasya dhiṣṇyā yuvānītasya sūribhiḥ | ahar-ahar vṛṣaṇa mahyaṁ śikṣatam ||

Pad Path

यु॒वाऽद॑त्तस्य । धि॒ष्ण्या॒ । यु॒वाऽनी॑तस्य । सू॒रिऽभिः॑ । अहः॑ऽअहः । वृ॒ष॒णा॒ । मह्य॑म् । शि॒क्ष॒त॒म् ॥ ८.२६.१२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:26» Mantra:12 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:28» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:12


SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः वही विषय आ रहा है।

Word-Meaning: - (धृष्ण्या) पूजार्ह (वृषणा) धनादिकों की वर्षा करनेवाले आप सब (सूरिभिः+युवादत्तस्य) विद्वानों को आपने जो धन दिये हैं (युवानीतस्य) और उनके लिये जो धन ले आये हैं, उस धन से (मह्यम्) मुझको भी (अहरहः) सर्वदा (शिक्षतम्) धनयुक्त कीजिये ॥१२॥
Connotation: - राज्य की ओर से जो धन विद्वद्वर्ग में वितीर्ण किये जाएँ, वे इतर जातियों में भी बाँटे जाएँ ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

युवादत्त 'धिषणा', युवानीत 'शक्ति'

Word-Meaning: - [१] हे (दिष्ण्या) = [धिषणार्हो] स्तुति के योग्य अथवा उत्तम बुद्धि को प्राप्त करानेवाले [धिषणा = बुद्धि] (वृषणा) = शक्ति का शरीर में सेचन करनेवाले प्राणापानो ! (युवादत्तस्य) = आप से दिये जानेवाले ज्ञान को तथा (युवानीतस्य) = आप से आनीत [ प्राप्त करायी जानेवाली] शक्ति को (सूरिभिः)= ज्ञानी स्तोताओं के सम्पर्क के द्वारा (अहरहः) = प्रतिदिन (मह्यम्) = मेरे लिये (शिक्षतम्) = दीजिये । [२] ज्ञानी स्तोताओं के सम्पर्क में हम भी ज्ञान की रुचिवाले बनेंगे तथा विषय वासनाओं में न फँसने के कारण शक्ति को प्राप्त करनेवाले होंगे। ज्ञानी स्तोताओं के सम्पर्क की ओर झुकाव इस प्राणापान की साधना से ही होगा। एवं यह साधना हमें ज्ञान व शक्ति को प्राप्त करानेवाली बनेगी।
Connotation: - भावार्थ- हे प्राणापानो! हम आप से दत्त ज्ञान को तथा आप से प्राप्त करायी गयी शक्ति को ज्ञानियों के सम्पर्क में रहते हुए प्राप्त करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तदनुवर्तते।

Word-Meaning: - हे धृष्ण्या=धृष्ण्यौ=धिषणार्हौ=पूजार्हौ। वृषणा=धनादीनां वर्षितारौ। अश्विनौ। सूरिभिः=सूरिभ्यः=विद्वद्भ्यः। युवादत्तस्य=युवाभ्यां दत्तम्। युवानीतस्य=युवाभ्यां नीतम्। यद्धनम्। तत्। मह्यमपि। अहरहः=प्रतिदिनम्। शिक्षतम्=दत्तम् ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O devout and benevolent harbingers of the showers of prosperity, of that which you have created and given to the nation and that what you have brought in, let me learn day by day and share through the wise and brave leaders.