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ता मा॒ता वि॒श्ववे॑दसासु॒र्या॑य॒ प्रम॑हसा । म॒ही ज॑जा॒नादि॑तिॠ॒ताव॑री ॥

English Transliteration

tā mātā viśvavedasāsuryāya pramahasā | mahī jajānāditir ṛtāvarī ||

Pad Path

ता । मा॒ता । वि॒श्वऽवे॑दसा । अ॒सु॒र्या॑य । प्रऽम॑हसा । म॒ही । ज॒जा॒न॒ । अदि॑तिः । ऋ॒तऽव॑री ॥ ८.२५.३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:25» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:21» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:3


SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः उन दोनों का ही वर्णन है।

Word-Meaning: - (ता) वैसे पुत्रों को (मही) महती (ऋतावरी) सत्यवती (अदितिः) माता (जजान) उत्पन्न करती है, जो पुत्र (विश्ववेदसा) सर्व प्रकार ज्ञानसम्पन्न होते (प्र+महसा) बड़े तेजस्वी और (असुर्य्याय) बल दिखलाने के लिये सर्वदा उद्यत रहते हैं ॥३॥
Connotation: - जो संसार में विख्यात और विद्वान् हों, वैसे कोटियों में दो चार होते हैं। किन्तु प्रारम्भ से यदि बालक-बालिका सुशिक्षित हों, तो वे वैसे हो सकते हैं ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अक्षिति माता से मित्रावरुणौ का जन्म

Word-Meaning: - [१] (ता) = उन मित्र और वरुण को (ऋतावरी) = ऋत का रक्षण करनेवाली (मही) = महनीय (अदितिः माता) = अदीना देवमाता, स्वास्थ्य की देवता [ अ+दिति = अखण्डन, स्वास्थ्य का न टूटना] (जजान) = उत्पन्न करती है। स्वस्थ मनुष्य ही स्नेह व निर्देषता के भावों का धारण करनेवाला होता है । अस्वास्थ्य मनुष्य को चिड़चिड़ा बना देता है। [२] ये मित्र और वरुण (विश्ववेदसा) = सम्पूर्ण आन्तर धनों को प्राप्त करानेवाले हैं और (प्रमहसा) = प्रकृष्ट तेजवाले हैं। स्नेह व निर्देषता के होने पर सब दिव्यगुण, सारी दैवी सम्पत्ति प्राप्त होती है और हम तेजस्विता का अपने में रक्षण करनेवाले होते हैं। अदिति माता इसलिए मित्रावरुणौ को जन्म देती है कि (असुर्याय) = आसुर भावों का विनाशक बल हमें प्राप्त हो।
Connotation: - भावार्थ- स्वास्थ्य हमारे जीवनों में स्नेह व निर्देषता के भावों को जन्म देता है। इन स्नेह व निर्देषता के भावों से सम्पूर्ण दैवी सम्पत्ति प्राप्त होती है और प्रकृष्ट तेज प्राप्त होता है। ये मित्रावरुण सब आसुर भावों के विनाशक बल को प्राप्त कराते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तौ वर्ण्येते।

Word-Meaning: - ता=तादृशौ पुत्रौ। मही=महती। ऋतावरी=सत्यवती। अदितिः=अखण्डनीया माता। जजान=जनयति। पुनः कीदृशौ। विश्ववेदसा=सर्वज्ञानौ। प्रमहसा=प्रकृष्टतेजस्कौ। कस्मै प्रयोजनाय। असुर्य्याय=बलाय=शक्तिप्रदर्शनाय ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Great mother Aditi, inviolable Nature, concrete embodiment of infinite divinity and divine law operative in existence, brought forth these two mighty refulgent pioneers of life, knowing and commanding the world for the realisation of their innate vision and power.