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ता मे॒ अश्व्या॑नां॒ हरी॑णां नि॒तोश॑ना । उ॒तो नु कृत्व्या॑नां नृ॒वाह॑सा ॥

English Transliteration

tā me aśvyānāṁ harīṇāṁ nitośanā | uto nu kṛtvyānāṁ nṛvāhasā ||

Pad Path

ता । मे॒ । अश्व्या॑नाम् । हरी॑णाम् । नि॒ऽतोश॑ना । उ॒तो इति॑ । नु । कृत्व्या॑नाम् । नृ॒ऽवाह॑सा ॥ ८.२५.२३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:25» Mantra:23 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:25» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:23


SHIV SHANKAR SHARMA

इन्द्रिय कैसे हों, यह दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (मे) मेरे (हरीणाम्) हरणशील (अश्व्यानाम्) अश्वसमूहों के मध्य (नितोशना) शत्रुविनाशक ज्ञानेन्द्रिय और कर्मेन्द्रिय होवें (उतो+नु) और भी (कृत्व्यानाम्) कर्म करने में कुशलों के मध्य (नृवाहसा) मनुष्यों के सुख पहुँचानेवाले हों ॥२३॥
Connotation: - हमारे इन्द्रियगण उसकी कृपा से विषयविमुख हों और सदा मनुष्यों में सुखवाहक हों ॥२३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

इन्द्रियाश्व कैसे ?

Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र में उत्तम शरीररथ का वर्णन किया था। प्रस्तुत मन्त्र में उत्तम इन्द्रियाश्वों का उल्लेख करते हैं, (मे) = मेरे (ता) = वे ज्ञानेन्द्रिय व कर्मेन्द्रिय रूप (अश्व हरीणाम्) = हरित वर्ण दीप्त [हरि= A ray = of light] (अश्व्यानाम्) = अश्व संघों के बीच में (नितोशना) = शत्रुओं का बाधन करनेवाले हैं। ये मेरे इन्द्रियाश्व काम रूप शत्रु से आक्रान्त नहीं होते। [२] (उत) = और (उ) = निश्चय से (नु) = अब ये (अश्व कृत्व्यानाम्) = कर्त्तव्य कर्मों के करने में कुशल अश्वों में कुशल होते हुए शत्रुओं के बाधक होते हैं। ये (नृवाहसा) = उन्नतिपथ पर चलनेवाले लोगों को लक्ष्य - स्थान पर ले जानेवाले हैं।
Connotation: - भावार्थ- हमारे इन्द्रियाश्व काम आदि शत्रुओं के बाधक, कर्त्तव्य कर्मों को करने में कुशल व नरों को लक्ष्य स्थान पर ले जानेवाले हों।

SHIV SHANKAR SHARMA

इन्द्रियाणि कीदृशानि भवेयुरिति दर्शयति।

Word-Meaning: - हरीणाम्=हर्तॄणाम्। अश्व्यानाम्=अश्वसमूहानां मध्ये। नितोशना=नितोशनौ=शत्रुविनाशकौ। ता=तौ। मम ज्ञानकर्मेन्द्रियाश्वौ। भवेताम्। उतो+नु=उतापि च। कृत्व्यानाम्=कर्मणि कुशलानाम्। मध्ये। नृवाहसा=नृवाहसौ=मनुष्याणां वोढारौ। भवेताम् ॥२३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Among the gifts of dynamic achievables, let the mind, senses and knowledge be destroyers of darkness and suffering, and among the organs of will and action, let the human body be the chariot of passage to salvation across the world.