Go To Mantra

तत्सूर्यं॒ रोद॑सी उ॒भे दो॒षा वस्तो॒रुप॑ ब्रुवे । भो॒जेष्व॒स्माँ अ॒भ्युच्च॑रा॒ सदा॑ ॥

English Transliteration

tat sūryaṁ rodasī ubhe doṣā vastor upa bruve | bhojeṣv asmām̐ abhy uc carā sadā ||

Pad Path

तत् । सूर्य॑म् । रोद॑सी॒ इति॑ । उ॒भे इति॑ । दो॒षा । वस्तोः॑ । उप॑ । ब्रु॒वे॒ । भो॒जेषु॑ । अ॒स्मान् । अ॒भि । उत् । च॒र॒ । सदा॑ ॥ ८.२५.२१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:25» Mantra:21 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:25» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:21


Reads 393 times

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः उसी अर्थ को कहते हैं।

Word-Meaning: - (सूर्य्यम्) सूर्य्य के समान (तत्) मित्र और वरुण का वह-२ नियम और उपाय (उभे+रोदसी) दोनों लोकों में प्रचलित है, उसको मैं (दोषा) रात्रि में (वस्तोः) दिन में (उपब्रुवे) उसकी स्तुति करता हूँ अर्थात् सर्वदा उसका प्रचार करता हूँ। हे भगवन् ! (अस्मान्) वैसे हम लोगों को (सदा) सर्वदा (भोजेषु) विविध अभ्युदयों के ऊपर (अभ्युच्चर) स्थापित कर ॥२१॥
Connotation: - हम लोग तब ही धनों के अधिकारी हो सकते हैं, जब राज्यप्रचालित और ईश्वरीय नियमों को अच्छे प्रकार मानें ॥२१॥
Reads 393 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभु-स्तवन व दानशीलता

Word-Meaning: - [१] मैं (दोषावस्तोः) = दिन-रात (उभे रोदसी:) = इन दोनों द्यावापृथिवी के (तत्) = उस (सूर्यम्) = प्रकाशक प्रभु को (उपब्रेव) = उपासना में स्थित होकर स्तुत करता हूँ। प्रभु ही तो इन द्युलोक व पृथिवीलोक के अन्तों को अपनी रश्मियों से अवभासित कर रहे हैं। [२] हे प्रभो! आप (सदा) = हमेशा (अस्मान्) = हमें (भोजेषु) = पालन करनेवाले पुरुषों में (अभि उत चर) = उत्कृष्ट गतिवाला करिये, उन्नत करिये। हम भोजों में उत्कृष्ट भोज बनें, खूब दानशील हों।
Connotation: - भावार्थ- हम द्यावापृथिवी में सर्वत्र प्रभु के प्रकाश को देखते हुए प्रभु का गुणगान करें। प्रभु हमें उत्कृष्ट दानशील बनायें।
Reads 393 times

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तमेवार्थमाह।

Word-Meaning: - सूर्य्यमिव। तद्वारुणं मैत्रञ्च तेजः। उभे+रोदसी=उभौ लोकौ व्याप्तम्। दोषा=रात्रौ। वस्तोः=दिने च। उपब्रुवे=तत्स्तौमि। हे मित्र ! भोजेषु=भोग्यपदार्थेषु। अस्मान्। सदा। अभ्युच्चर=उद्गमय=स्थापय ॥२१॥
Reads 393 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - That sun of light and knowledge and both heaven and earth, I adore day and night and pray that the lord may establish us in a prosperous state of food and enjoyment.