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तद्वार्यं॑ वृणीमहे॒ वरि॑ष्ठं गोप॒यत्य॑म् । मि॒त्रो यत्पान्ति॒ वरु॑णो॒ यद॑र्य॒मा ॥

English Transliteration

tad vāryaṁ vṛṇīmahe variṣṭhaṁ gopayatyam | mitro yat pānti varuṇo yad aryamā ||

Pad Path

तत् । वार्य॑म् । वृ॒णी॒म॒हे॒ । वरि॑ष्ठम् । गो॒प॒यत्य॑म् । मि॒त्रः । यत् । पान्ति॑ । वरु॑णः । यत् । अ॒र्य॒मा ॥ ८.२५.१३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:25» Mantra:13 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:23» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:13


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SHIV SHANKAR SHARMA

कैसा धन उपार्जनीय है, यह दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (तत्+वार्यम्+वृणीमहे) हे मित्र तथा वरुण ! हम सब उस धन की कामना करते हैं, जो (वरिष्ठम्) अतिशय श्रेष्ठ (गोपत्यम्) और सबका पालक हो और (यत्+यत्) जिस-२ धन को (मित्रः+वरुणः+अर्यमा) क्रम से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य प्रतिनिधि मित्र, वरुण, अर्यमा (पान्ति) पालते हैं ॥१३॥
Connotation: - जिससे अपना और दूसरों का उपकार और हित हो, वह धन उपार्जनीय है ॥१३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वार्य, वरिष्ठ, गोपयत्य' धन

Word-Meaning: - [१] हम (तत्) = उस (वार्यम्) = वरने के योग्य, (वरिष्ठम् उरुत्तर) = विशाल (गोपयत्यम्) = सब के रक्षक धन को (वृणीमहे) = वरते हैं। ऐसा ही धन चाहते हैं, जो सचमुच श्रेष्ठ विशाल व सर्वरक्षक हो। [२] उस धन को हम चाहते हैं (यत्) = जिसे (मित्रः) = सब के साथ स्नेह करनेवाले (वरुणः) = व निर्दोषता की भावनावाले व्यक्ति (पान्ति) = रक्षित करते हैं। उस धन को (यत्) = जिसे (अर्यमा) = काम- क्रोध-लोभ को वश में करनेवाले व्यक्ति सुरक्षित करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हमें वरणीय विशाल सर्वरक्षक धन प्राप्त हो। हम स्नेहवाले निद्वेष व काम-क्रोध आदि को वश में करनेवाले व्यक्तियों से रक्षित धन को प्राप्त करें।
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SHIV SHANKAR SHARMA

कीदृशं धनं संचेतव्यमिति दर्शयति।

Word-Meaning: - तद्धनं वयं वृणीमहे। यद् वरिष्ठम्=अतिशयेन वरम्। पुनः। गोपयत्यम्=सर्वेषां पालकम्। पुनर्यद्धनं मित्रो वरुणोऽर्य्यमा च पान्ति ॥१३•॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - We elect to choose that wealth and protection which is the best and most promotive and which Mitra, Varuna and Aryama, Brahmana, Kshatriya and Vaishya, communities of vision, judgement and determination, and positive creativity, value and secure for us.