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एन्दु॒मिन्द्रा॑य सिञ्चत॒ पिबा॑ति सो॒म्यं मधु॑ । प्र राध॑सा चोदयाते महित्व॒ना ॥

English Transliteration

endum indrāya siñcata pibāti somyam madhu | pra rādhasā codayāte mahitvanā ||

Pad Path

आ । इन्दु॑म् । इन्द्रा॑य । सि॒ञ्च॒त॒ । पिबा॑ति । सो॒म्यम् । मधु॑ । प्र । राध॑सा । चो॒द॒या॒ते॒ । म॒हि॒ऽत्व॒ना ॥ ८.२४.१३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:24» Mantra:13 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:17» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:13


SHIV SHANKAR SHARMA

इन्द्र को ही प्रिय वस्तु समर्पणीय है, यह दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - हे मनुष्यों ! आप सब मिलकर (इन्द्राय) इन्द्र के निकट (इन्दुम्) स्वकीय प्रियवस्तु (आ+सिञ्चत) समर्पण करें। जिससे वह इन्द्र (सोम्यम्+मधु) सोमरसयुक्त मधुर पदार्थों को (पिबाति) कृपादृष्टि से देखे और बचावे और (महित्वना) जो अपने सामर्थ्य से (राधसा) और संसाधक सम्पत्तियों से स्तुतिपाठक जनों को (चोदयाते) उन्नति की ओर ले जाता है ॥१३॥
Connotation: - वही हमको उन्नति की ओर भी ले जाता है, अतः प्रेम और श्रद्धा से वही सेव्य है ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सोमरक्षण व धन प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] हे जीवो! (इन्द्राय) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु की प्राप्ति के लिये (इन्दुम्) = सोम को (आसिञ्चत) = शरीर में ही चारों ओर सिक्त करो। वस्तुतः ये प्रभु ही (सोम्यम्) = सोम सम्बन्धी मधु-इस सारभूत जीवन को मधुर बनानेवाली वस्तु को (पिबाति) = शरीर में ही पीनेवाले व सुरक्षित करनेवाले हैं। प्रभु स्मरण से ही सोम का रक्षण होता है। [२] ये प्रभु ही (महित्वना) = अपनी महिमा से (राधसा) = कार्यसिद्धि के उद्देश्य से सब धनों को (प्रचोदयाते) = हमारे में प्रेरित करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु प्राप्ति के लिये हम सोम को शरीर में ही सुरक्षित करें। वस्तुतः प्रभु ही सोम को सुरक्षित करते हैं और हमारे लिये कार्यसाधक धनों को प्राप्त कराते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

इन्द्राय प्रियं समर्पणीयमिति दर्शयति।

Word-Meaning: - हे मनुष्याः ! यूयम्। इन्द्राय=परमेश्वराय। इन्दुम्=स्वकीयं प्रियं वस्तु। आ+सिञ्चत=समर्पयत। येन। सः। सोम्यम्। मधु। पिबाति=पिबेत्=रक्षेत्। यः। महित्वना=स्वमहिम्ना। राधसा=संसाधकेन धनेन सह। स्तुतिपाठकान्। चोदयाते=ऊर्ध्वं गमयति ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Prepare, offer and regale Indra with the nectar drink of faith and performance. He values, enjoys and promotes the honey sweets of peace, pleasure and progress and inspires the people with will and competence and ambition for progress and excellence.