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अच्छा॑ च त्वै॒ना नम॑सा॒ वदा॑मसि॒ किं मुहु॑श्चि॒द्वि दी॑धयः । सन्ति॒ कामा॑सो हरिवो द॒दिष्ट्वं स्मो व॒यं सन्ति॑ नो॒ धिय॑: ॥

English Transliteration

acchā ca tvainā namasā vadāmasi kim muhuś cid vi dīdhayaḥ | santi kāmāso harivo dadiṣ ṭvaṁ smo vayaṁ santi no dhiyaḥ ||

Pad Path

अच्छ॑ । च॒ । त्वा॒ । ए॒ना । नम॑सा । वदा॑मसि । किम् । मुहुः॑ । चि॒त् । वि । दी॒ध॒यः॒ । सन्ति॑ । कामा॑सः । ह॒रि॒ऽवः॒ । द॒दिः । त्वम् । स्मः । व॒यम् । सन्ति॑ । नः॒ । धियः॑ ॥ ८.२१.६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:21» Mantra:6 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:2» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:6


SHIV SHANKAR SHARMA

फिर प्रार्थना का विषय कहते हैं।

Word-Meaning: - (अच्छ+च) और भी (एना+नमसा) इस नमस्कार द्वारा (त्वा+वदामसि) तेरी वारम्बार प्रार्थना करते हैं, (किम्) किस कारण तू (मुहुः+चित्) भूयो भूयः (विदीधयः) चिन्ता कर रहा है। (हरिवः) हे संसारिन् ! (कामासः+सन्ति) हम लोगों की अनेक कामनाएँ है, (त्वम्+ददिः) तू दाता है (वयम्+स्मः) हम तेरे हैं (नः+धियः) हम लोगों की क्रिया और ज्ञान (सन्ति) विद्यमान हैं, अतः तुझसे प्रार्थना करते हैं ॥६॥
Connotation: - मनुष्य के हृदय में अनेक कामनाएँ हैं, हितकारी और शुभ कामनाओं को ईश्वर पूर्ण करता है ॥६॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे रक्षक सेनापते ! (एना, नमसा) इस स्तुति शब्द से (त्वा, अच्छ, च) आपके सन्मुख जाकर (वदामसि) हम प्रार्थना करते हैं आप (मुहुश्चित्) बार बार (किम्, विदीधयः) क्या स्मरण करते हैं (हरिवः) हे प्रशस्त अश्वोंवाले अथवा हरणशील शक्तियोंवाले (सन्ति, कामासः) आपके प्रजाजन हम लोगों के जो मनोरथ हैं (त्वम्, ददिः) आप ही उनके साधक हैं, (वयम्) हम सब (स्मः) आप ही के हैं और (नः, धियः) हमारे कर्म भी (सन्ति) आपके ही आज्ञानुसारी हैं ॥६॥
Connotation: - सेनापति को उचित है कि जो प्रजाओं के कार्य्य अपने अधीन हैं, उनको विचारपूर्वक शीघ्र ही करना चाहिये और प्रजाओं को भी उचित है कि उसकी अनुमति से ही सब कर्म करें, विरुद्ध नहीं ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

स्तवन द्वारा दीप्ति की प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] हे प्रभो ! (त्वा) = आपके (अच्छ) = प्रति (एना नमसा) = इस नमन के द्वारा (वदामसि) = स्तुति-वचनों का उच्चारण करते हैं (च) = और (मुहुः चित्) = फिर भी आप (किं विदीधयः) = कुछ अद्भुत ही प्रकार से हमारे जीवनों में दीप्त करते हो। हम आपका स्तवन करते हैं, आप हमें दीप्त जीवनवाला बनाते हो। [२] हे (हरिवः) = प्रशस्त इन्द्रियाश्वों को प्राप्त करानेवाले प्रभो ! (कामासः सन्ति) = हमारी नाना प्रकार की कामनायें हैं और (त्वं ददिः) = आप सदा देनेवाले हैं, देना आपका स्वभाव ही है। इसलिए (वयं स्मः) = हम आपके सान्निध्य में हैं और (नः धियः सन्ति) = हमारी बुद्धियाँ हैं। आपकी समीपता से दूर होने पर ही बुद्धि का भ्रंश हुआ करता है। आपके समीप रहते हुए हम प्रशस्त बुद्धिवाले ही बने रहें ।
Connotation: - भावार्थ- हम नम्रता से प्रभु का स्तवन करते हैं, प्रभु हमारे जीवनों को दीप्त बनाते हैं। प्रभु ही हमारी सब कामनाओं को पूर्ण करते हैं। हम प्रभु के समीप रहते हैं, प्रभु हमें बुद्धि प्राप्त कराते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः प्रार्थनाविधानम्।

Word-Meaning: - अच्छ च=अपि च। एना=अनेन। नमसा=नमस्कारेण। त्वा+वदामसि=त्वां स्तुमः। त्वम्। किम्=कस्मात् कारणात्। मुहुश्चित्=मुहुर्मुहुः। विदीधयः=विचिन्तयसि। विपूर्वो दीधितिश्चिन्तने। दीधीङ् दीप्तिदेवनयोः। अस्माकम्। कामासः=भूयांसः कामाः सन्ति। हे हरिवः=हे संसारिन् ! त्वम्। ददिः=दाता। वयं तव स्मः। नोऽस्माकम्। धियः=कर्माणि च त्वदर्थानि सन्ति ॥६॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे सेनापते ! (एना, नमसा) अनेन स्तोत्रेण सह (त्वा, अच्छ, च) तवाभिमुखं गत्वा (वदामसि) प्रार्थयामहे (मुहुश्चित्) पुनः पुनः (किम्) कुतः (विदीधयः) विचिन्तयसि (हरिवः) हे प्रशस्ताश्व ! (सन्ति, कामासः) मम मनोरथाः सन्ति (त्वम्, ददिः) त्वं च प्रदाताऽस्ति (वयम्, स्मः) वयं च तव स्मः किं च (नः, धियः) अस्माकं कर्माण्यपि (सन्ति) त्वयि एव वर्त्तन्ते ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Profusely with this salutation and homage, we honour and praise you and pray to you again and again. Why do you hesitate, in thought? O lord of the moving world, we have our desires and ambitions. You are the giver of fulfilment. We are here, our prayers are here, and we are yours. We have our thoughts and intelligence too, hence we pray: Grant our prayers without delay.