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य ऋ॒ते चि॒द्गास्प॒देभ्यो॒ दात्सखा॒ नृभ्य॒: शची॑वान् । ये अ॑स्मि॒न्काम॒मश्रि॑यन् ॥

English Transliteration

ya ṛte cid gās padebhyo dāt sakhā nṛbhyaḥ śacīvān | ye asmin kāmam aśriyan ||

Pad Path

यः । ऋ॒ते । चि॒त् । गाः । प॒देभ्यः॑ । दात् । सखा॑ । नृऽभ्यः॑ । शची॑ऽवान् । ये । अ॒स्मि॒न् । काम॑म् । अश्रि॑यन् ॥ ८.२.३९

Rigveda » Mandal:8» Sukta:2» Mantra:39 | Ashtak:5» Adhyay:7» Varga:24» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:1» Mantra:39


SHIV SHANKAR SHARMA

विश्वासी को ईश्वर सब कुछ देता है, यह शिक्षा इससे देते हैं।

Word-Meaning: - (यः) जो परमात्मा (सखा) सबका परममित्र और (शचीवान्) सर्वशक्तिमान् है (अस्मिन्) उस इस इन्द्र में (ये) जो धर्मपरायण जन (कामम्) निज-२ इच्छा, विश्वास, प्रीति और आशा (अश्रियन्) रखते हैं (पदेभ्यः) उन ज्ञानी तत्त्वविद् (नृभ्यः) भक्तजनों को वह इन्द्र (ऋते+चित्) प्रत्युपकार की कामना के विना ही (गाः) गौ आदि पशु और हिरण्य आदि नाना पदार्थ (दात्) देता है ॥३९॥
Connotation: - हे मेधाविजनो ! तुम ईश्वर में श्रद्धा, विश्वास, प्रीति और आशा स्थापित करो। वह सबका सखा सर्वप्रद और सर्वशक्तिमान् है, वह सर्वयोग्य वस्तु तुमको देगा ॥३९॥

ARYAMUNI

अब कर्मयोगी को शक्तिसम्पन्न तथा शक्तियों का प्रदाता कथन करते हैं।

Word-Meaning: - (ये) जो पुरुष (अस्मिन्) इस कर्मयोगी में (कामं) कामनाओं को (अश्रियन्) रखते हैं, वह (नृभ्यः) उन मनुष्यों के लिये (शचीवान्) प्रशस्तक्रियावान् (सखा) हितकारक (यः) जो कर्मयोगी (पदेभ्यः, ऋते, चित्) पदवियों के विना ही (गाः) शक्तियों को (दात्) देता है ॥३९॥
Connotation: - प्रशस्तक्रियावान् कर्मयोगी, जो सबका हितकारक, विद्यादि शुभ गुणों का प्रचारक और जिसमें सब प्रकार की शक्तियें विद्यमान हैं, वह अशक्त को भी शक्तिसम्पन्न करता और कामना करनेवाले विद्वानों के लिये पूर्णकाम होता है, जिससे वह अपने मनोरथ को सुखपूर्वक सफल कर सकते हैं ॥३९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सखा शचीवान्

Word-Meaning: - [१] (यः) = जो प्रभु (ऋते चित्) = सत्य ज्ञान की प्राप्ति कराने के निमित्त ही (पदेभ्यः) = [पद् गतौ] गतिशील (नृभ्यः) = मनुष्यों के लिये (गाः) = ज्ञान की वाणियों को (दात्) = देते हैं। वे प्रभु ही हमारे (सखा) = सच्चे मित्र हैं। (शचीवान्) = वे प्रभु ही सब कर्मों व प्रज्ञानोंवाले हैं। [२] ये प्रभु उन मनुष्यों के लिये इन ज्ञान की वाणियों को प्राप्त कराते हैं (ये) = जो (अस्मिन्) = इस प्रभु में (कामं अश्रियन्) = अपनी सब इच्छाओं को आश्रित करते हैं । अर्थात् प्रभु के प्रति जो आत्मार्पण करनेवाले होते हैं, उनके लिये प्रभु इन ज्ञानों को अवश्य प्राप्त कराते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमारे सच्चे सखा हैं, वे शक्ति व प्रज्ञान के भण्डार हैं। ये अपने प्रति आत्मार्पण करनेवाले गतिशील पुरुषों के लिये ज्ञान की वाणियों को प्राप्त कराते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

विश्वासिने परमात्मा सर्वं ददतीति शिक्षते।

Word-Meaning: - य इन्द्रः। ऋते चित्=प्रत्युपकारकामनां विनैव। पदेभ्यः=पद्यन्ते गच्छन्ति ईश्वरीयतत्त्वं प्राप्नुवन्ति जानन्ति ये ते पदास्तत्त्वविदस्तेभ्यः। नृभ्यः=मनुष्येभ्यः। गाः=वाणीः पश्वादिविविधपदार्थांश्च। दात्=ददाति। ये धार्मिकाः। अस्मिन् इन्द्रे। कामम्=स्व-स्वमभिलाषम्। अश्रियन्= श्रयन्ति स्थापयन्ति। कीदृश इन्द्रः। सखा=सर्वेषां परममित्रम्। पुनः। शचीवान्=शक्तिमान् ॥३९॥

ARYAMUNI

अथ कर्मयोगिनः शक्तिमत्त्वं परशक्त्युत्पादकत्वञ्च वर्ण्यते।

Word-Meaning: - (ये) ये जनाः (अस्मिन्) अस्मिन् कर्मयोगिनि (कामं) अभिलाषं (अश्रियन्) निदधते (नृभ्यः) तेभ्यो नरेभ्यः (शचीवान्) क्रियावान् (सखा) हितः (यः) यः कर्मयोगी (ऋते, चित्, पदेभ्यः) विनैव पदवीः (गाः) शक्तीः (दात्) ददाति ॥३९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra is a friend and mighty commander of forces and, without visible motion or lure of office, gives the gift of speech and powers of perception and intelligence to people who surrender their desires and ambitions to him and act selflessly, depending on him for success.