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उ॒क्थं च॒न श॒स्यमा॑न॒मगो॑र॒रिरा चि॑केत । न गा॑य॒त्रं गी॒यमा॑नम् ॥

English Transliteration

ukthaṁ cana śasyamānam agor arir ā ciketa | na gāyatraṁ gīyamānam ||

Pad Path

उ॒क्थम् । च॒न । श॒स्यमा॑नम् । अगोः॑ । अ॒रिः । आ । चि॒के॒त॒ । न । गा॒य॒त्रम् । गी॒यमा॑नम् ॥ ८.२.१४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:2» Mantra:14 | Ashtak:5» Adhyay:7» Varga:19» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:1» Mantra:14


SHIV SHANKAR SHARMA

वह आस्तिक और नास्तिक दोनों का भाषण सुनता है।

Word-Meaning: - जब (अरिः) सर्वव्यापक वह इन्द्र (अगोः) नास्तिक आदिकों का (चन) भी (शस्यमानम्) उच्चार्य्यमाण (उक्थम्) भाषण (आ+चिकेत) अच्छे प्रकार जानता है तब (गीयमानम्) भक्तजनों के द्वारा मन से गीयमान (गायत्रम्) परमपवित्र सामगान को (न) वह न जानता हो, यह कैसे हो सकता है अथवा (अगोः) स्तुतिरहित नास्तिक जन का (अरिः) शत्रु इन्द्र (शस्यमानम्) इत्यादि पूर्ववत् ॥१४॥
Connotation: - वह इन्द्र सबको जानता है, अतः छल कपट त्याग और उसमें विश्वास जमा श्रद्धा भक्ति से उसकी स्तुति प्रार्थना करो ॥१४॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अगोः, अरिः) प्रशस्त वाणीरहित असत्यवादी का शत्रु कर्मयोगी (शस्यमानं, उक्थं, चन) स्तुत्यर्ह शस्त्र को भी (आचिकेत) जानता है (न) सम्प्रति किये हुए (गीयमानं) कहे हुए (गायत्रं) स्तोत्र को भी जानता है, अतः कृतज्ञ होने से स्तोतव्य है ॥१४॥
Connotation: - इस मन्त्र का भाव यह है कि जिस पुरुष की वाणी प्रशस्त नहीं अर्थात् जो अनृतवादी और अकर्मण्य है, वह कर्मयोगी के सन्मुख नहीं ठहर सकता, क्योंकि कर्मयोगी स्तुत्यर्ह स्तोत्रों का ज्ञाता होने से परमात्मा की आज्ञा का पूर्णतया पालन करनेवाला होता है ॥१४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'मूक स्तवन के भी श्रोता' प्रभु

Word-Meaning: - [१] (अरिः) = [ऋ गतौ] सर्वत्र प्राप्त वे प्रभु (अगो:) = [गौ-वाणी] वाक्शक्ति रहित मूक पुरुष के (चन) = भी (शस्यमानम्) = हृदय में शंसन किये जाते हुए (उक्थम्) = स्तोत्र को (आचिकेत) = सम्यक् जानते हैं। मूक पुरुष से किये जाते हुए मूक स्तवन को भी वे समझते हैं। [२] इसी प्रकार (न गीयमानम्) = स्वरपूर्वक न गाये जाते हुए (गायत्रम्) = गायत्र स्तोभ को भी वे जानते ही हैं। अर्थात् यदि एक स्तोता गायन न कर सका, तो उसका स्तोत्र न सुना जायेगा ऐसी बात नहीं है।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु मूक स्तवन को भी सुनते ही हैं। 'बिना गायन के उच्चरित स्तोत्रों को प्रभु न सुनेंगे' यह बात नहीं है।

SHIV SHANKAR SHARMA

स आस्तिकनास्तिकयोर्द्वयोरपि भाषणं शृणोति।

Word-Meaning: - यदा। अरिः=इन्द्रः। इयर्त्ति=सर्वत्र गच्छति व्याप्नोतीत्यरिः सर्वव्यापकः। यद्वा। अरिः=शत्रुः। ऋ सृ गतौ। अगोः=नास्तिकादेः। गायतीति गौः=स्तोता, न गौः, अगौः अस्तोता तस्य अगोः। चन=अप्यर्थः। अस्तोतुरपि नास्तिकादेः। शस्यमानम्=उच्चार्य्यमाणम्। उक्थम्=वक्तव्यं वचनम्। आचिकेत=आजानाति। कित ज्ञाने, छान्दसो लिट्। यद्वा। अगोः=स्तुतिरहितस्य नास्तिकस्य। अरिः=शत्रुरिन्द्रः। उक्थं चिकेतेत्यन्वयः। तदा। गीयमानम्=भक्तजनैः मनसा पठ्यमानम्। गायत्रम्=परमपवित्रं छन्दोबद्धं गायत्रं साम न जानातीति कथं सम्पद्येत ॥१४॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अगोः, अरिः) वाणीरहितस्यासत्यवादिनः (अरिः) शत्रुरिन्द्रः (शस्यमानं, उक्थं, चन) स्तूयमानं शस्त्रमपि (आचिकेत) जानाति (न) सम्प्रति (गीयमानं) उच्यमानं (गायत्रं) स्तोत्रं जानाति अतः कृतज्ञत्वात्स्तोतव्यः ॥१४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord of power and piety, the man attached to divinity in faith and opposed to doubt and disloyalty knows the words of praise spoken by a man of doubtful faith as much as he knows the songs of adoration sung by a man of faith (and makes a distinction between the two).