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तमिद्धने॑षु हि॒तेष्व॑धिवा॒काय॑ हवन्ते । येषा॒मिन्द्र॒स्ते ज॑यन्ति ॥

English Transliteration

tam id dhaneṣu hiteṣv adhivākāya havante | yeṣām indras te jayanti ||

Pad Path

तम् । इत् । धने॑षु । हि॒तेषु॑ । अ॒धि॒ऽवा॒काय॑ । ह॒व॒न्ते॒ । येषा॑म् । इन्द्रः॑ । ते॒ । ज॒य॒न्ति॒ ॥ ८.१६.५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:16» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:1» Varga:20» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:3» Mantra:5


SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः इन्द्र की स्तुति कहते हैं।

Word-Meaning: - हे मनुष्यों ! (हितेषु+धनेषु) कल्याणकारी धनों की प्राप्ति होने पर विद्वान् जन (अधिवाकाय) अधिक स्तुति करने के लिये (तम्+इत्) उसी इन्द्र की (हवन्ते) विद्वान् जन स्तुति करते हैं तथा हे मनुष्यों ! (येषाम्) जिनके पक्ष में (इन्द्रः) इन्द्र रहता है (ते) वे ही (जयन्ति) विजयी होते हैं ॥५॥
Connotation: - हे मनुष्यों ! धन के निमित्त वही स्तुत्य है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि जिसके पक्ष में ईश्वर होता है, वह अवश्य विजयी होता है, क्योंकि वह सत्य के लिये ही युद्ध करता है ॥५॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - योद्धा लोग (हितेषु, धनेषु) शत्रुओं के संनिहित होने पर (तम्, इत्) उसी परमात्मा को (हवन्ते) आह्वान करते हैं (येषाम्) जिनके पक्ष में (इन्द्रः) वह परमात्मा होता है, (ते, जयन्ति) वे ही जीतते हैं ॥५॥
Connotation: - शत्रु के संनिहित=प्राप्त होने पर अर्थात् युद्धसमय में जो योद्धा लोग परमात्मा से विजय की प्रार्थना करते हैं और जिसके पक्ष में परमात्मा होते हैं, निस्सन्देह उसी की विजय होती है, परपक्ष की नहीं ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभु मित्रता में विजय

Word-Meaning: - [१] (तं इत्) = उस प्रभु को ही (हितेषु धनेषु) = हितकर धनों के निमित्त (अधिवाकाय) = अधिक्येन उपदेश देने के लिये (हवन्ते) = पुकारते हैं। प्रभु ही तो हमें हितकर धनों की प्राप्ति के निमित्त उत्तम ज्ञानोपदेश करते हैं। [२] इस जीवन-संग्राम में (येषां इन्द्रः) = जिनके वे प्रभु हैं (ते जयन्ति) = वे विजयी होते हैं। प्रभु की मित्रता में ही विजय है। प्रकृति की ओर जाना, प्रकृति में फँस जाना ही पराजय का कारण बनता है।
Connotation: - भावार्थ- हृदयस्थ प्रभु से प्रेरणा को प्राप्त करके ही हम सुपथ से हितकर धनों का अर्जन करनेवाले बनेंगे। जो प्रभु के बनते हैं, वे सदा विजयी होते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनरपि इन्द्रः स्तूयते।

Word-Meaning: - हे मनुष्याः ! हितेषु=कल्याणकरेषु। धनेषु प्राप्तेषु। विद्वांसो जनाः। अधिवाकाय=अधिवचनाय, अधिकं स्तोतुं तमित्तमेवेन्द्रं हवन्ते=आह्वयन्ति। एवञ्च हे मनुष्याः ! येषां पक्षे। इन्द्रो भवति। त एव। जयन्ति=तेषामेव विजयो भवति ॥५॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - आह्वातारः (हितेषु, धनेषु) संनिहितेषु शत्रुषु (अधिवाकाय) अधिकजयाय (तमित्) तमेव (हवन्ते) आह्वयन्ति तत्र (येषाम्, इन्द्रः) येषां पक्षे इन्द्रः (ते, जयन्ति) त एव जयन्ति ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When the call is given and the battle rages, people invoke him for defence, and they win who enjoy the favour and protection of Indra.