Go To Mantra
Viewed 352 times

क्रीळ॑न्त्यस्य सू॒नृता॒ आपो॒ न प्र॒वता॑ य॒तीः । अ॒या धि॒या य उ॒च्यते॒ पति॑र्दि॒वः ॥

English Transliteration

krīḻanty asya sūnṛtā āpo na pravatā yatīḥ | ayā dhiyā ya ucyate patir divaḥ ||

Pad Path

क्रीळ॑न्ति । अ॒स्य॒ । सू॒नृताः॑ । आपः॑ । न । प्र॒ऽवता॑ । य॒तीः । अ॒या । धि॒या । यः । उ॒च्यते॑ । पतिः॑ । दि॒वः ॥ ८.१३.८

Rigveda » Mandal:8» Sukta:13» Mantra:8 | Ashtak:6» Adhyay:1» Varga:8» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:3» Mantra:8


SHIV SHANKAR SHARMA

वह सबका पति है, यह दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - हे मनुष्यों ! परमात्मा का माहात्म्य देखो। (अस्य) इस इन्द्र नामी ईश्वर के (सूनृताः) प्रिय और सत्यवचन प्रकृतियों में (क्रीडन्ति) विहार कर रहे हैं। यहाँ दृष्टान्त देते हैं−(आपः+न) जैसे जल (प्रवता) निम्नमार्ग से (यतीः) चलते हुए विहार करते हैं। हे मनुष्यों ! (यः) जो इन्द्र (अया) इस (धिया) विज्ञान वा क्रिया से (दिवः) स्वर्ग या प्रकाश का पति (उच्यते) कहाता है ॥८॥
Connotation: - ईश्वर कर्ता है और यह जगत् कार्य है। कार्यों में जो क्रिया है, वह उसी की है। अतः मनुष्य जाति से लेकर कीटपर्यन्त प्राणियों में जो वचन, जो शक्तियाँ, जो सौन्दर्य्य, इस प्रकार की जो आश्चर्यरचना है, वह ईश्वर की है। अतः वह विज्ञानपति है ॥८॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यः) जो परमात्मा (अया, धिया) इस स्तुति द्वारा (दिवः, पतिः) द्युलोक का स्वामी (उच्यते) कहा जाता है (प्रवता) निम्नमार्ग से (यतीः) जानेवाले (आपः) जलों के (न) समान (अस्य, सूनृताः) इसकी प्रियसत्य वाणियें (क्रीळन्ति) विहर रही हैं ॥८॥
Connotation: - वह पूर्ण परमात्मा, जो द्युलोकादि लोक-लोकान्तरों का स्वामी तथा रक्षक है, उसकी वेदरूप वाणियें अनायास सर्वत्र विस्तृत हो रही है। जैसे जल स्वाभाविक अनायास ही निम्न स्थानों को प्राप्त होता है, इसी प्रकार वेदरूप प्रिय सत्य वाणियें मनुष्यमात्र को प्राप्त होने से सबके अनुष्ठानयोग्य हैं ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

उत्कृष्ट बुद्धि की प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] (अस्य) = इस प्रभु की (सूनृताः) = प्रिय सत्य वाणियाँ (क्रीडन्ति) = इस प्रकार विहरण करती हैं, (न) = जैसे (प्रवता यतीः आपः) = निम्न मार्ग से गति करते हुए जल। हमें प्रभु की वेदवाणियाँ प्राप्त होती हैं, तब हम नम्र विनीत-झुके हुए [निम्न प्रवत्] बनते हैं । [२] (अया) = इस (धिया) = बुद्धि के हेतु से (यः उच्यते) = जिसकी प्रार्थना की जाती है, वह प्रभु ही (दिवः पतिः) = ज्ञान का स्वामी है। उस ज्ञान के स्वामी से ही हम उत्कृष्ट बुद्धि की प्राप्ति के लिये प्रार्थना करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु की प्रार्थना करते हैं। प्रभु हमें उत्कृष्ट बुद्धि प्राप्त कराते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

स सर्वस्य पतिरिति दर्शयति।

Word-Meaning: - हे मनुष्याः ! परमात्मनो माहात्म्यं पश्यत। अस्येश्वरस्येन्द्रनाम्नः। सूनृताः=प्रियसत्यात्मिका वाचः। प्रकृतिषु क्रीडन्ति=विहरन्ति। अत्र दृष्टान्तः−आपो न=यथा जलानि। प्रवता=निम्नमार्गेण यतीर्गच्छन्त्यः। उत्पतननिपतनेन विहरन्ति। तद्वत्। य=इन्द्रः। अया=अनया। धिया=विज्ञानेन। दिवः=प्रकाशस्य। पतिः=स्वामी। उच्यते=कथ्यते ॥८॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यः) यः परमात्मा (अया, धिया) अनया वाचा (दिवः, पतिः) दिवः स्वामी (उच्यते) कथ्यते (प्रवता) निम्नमार्गेण (यतीः) गच्छन्त्यः (आपः, न) जलानीव (अस्य, सूनृताः) अस्य प्रियसत्यवाचः (क्रीळन्ति) विहरन्ति ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The divine words of this lord, Indra, sparkle and flow like streams down the slopes, Indra who is celebrated as the lord and master of the regions of light and joy.