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त्वम॑सि प्र॒शस्यो॑ वि॒दथे॑षु सहन्त्य । अग्ने॑ र॒थीर॑ध्व॒राणा॑म् ॥

English Transliteration

tvam asi praśasyo vidatheṣu sahantya | agne rathīr adhvarāṇām ||

Pad Path

त्वम् । अ॒सि॒ । प्र॒ऽशस्यः॑ । वि॒दथे॑षु । स॒ह॒न्त्य॒ । अग्ने॑ । र॒थीः । अ॒ध्व॒राणा॑म् ॥ ८.११.२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:11» Mantra:2 | Ashtak:5» Adhyay:8» Varga:35» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:2» Mantra:2


SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः परमात्मा की ही स्तुति कहते हैं।

Word-Meaning: - (सहन्त्य) हे सब पदार्थों के साथ समानगामी=हे सर्वग अन्तर्य्यामिन् (त्वम्) तू ही (विदथेषु) यज्ञों में (प्रशस्यः) प्रशंसनीय (असि) है, अन्य नहीं। (अग्ने) हे सर्वव्यापिन् देव ! (अध्वराणाम्) विद्वानों, सूर्य्यादिकों, यज्ञों तथा शुभकर्मप्रिय जनों का (रथीः) नेता तू ही है ॥२॥
Connotation: - हे मनुष्यों ! सर्वत्र परमात्मा ही को पूजो, क्योंकि वही सबका नेता है ॥२॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सहन्त्य) हे सहनशील (अग्ने) परमात्मन् ! (विदथेषु) सब यज्ञों में (त्वम्, प्रशस्यः, असि) आप ही स्तुतियोग्य हैं, क्योंकि (अध्वराणाम्) हिंसावर्जित कर्मों के (रथीः) नेता हैं ॥२॥
Connotation: - हे परमपिता परमात्मन् ! आप सम्पूर्ण हिंसारहित कर्मों के प्रचारक तथा नेता होने से सब यज्ञादि कर्मों में प्रथम ही स्तुति किये जाते हैं ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'युद्धों में व यज्ञों में' उपास्य प्रभु

Word-Meaning: - [१] हे (सहन्त्य) = शत्रुओं का अभिभव करनेवाले प्रभो ! (त्वम्) = आप ही (विथेषु) संग्रामों में [विदथ: battle] (प्रशस्य:) = प्रशंसा के योग्य होते हैं। आप से ही शक्ति को प्राप्त करके हम शत्रुओं का शातन [ = संहार] कर पाते हैं। [२] हे (अग्ने) = अग्रेणी प्रभो! आप ही (अध्वराणाम्) = सब हिंसारहित यज्ञात्मक कर्मों के (रथी:) = प्रणेता हैं। आप के रक्षण में ही सब यज्ञ पूर्ण हुआ करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु कृपा से ही संग्रामों में विजय प्राप्त होती है और प्रभु के रक्षण से ही सब यज्ञ पूर्ण होते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः परमात्मैव स्तूयते।

Word-Meaning: - हे सहन्त्य=सर्वैः पदार्थैः सह समानगन्तः। हन हिंसागत्योः। त्वमेव। विदथेषु=यज्ञेषु। प्रशस्योऽसि=प्रशंसनीयोऽसि नान्यः। कश्चिदित्यर्थः। हे अग्ने=परमात्मन् ! अध्वराणामध्वनो मार्गान् रान्ति=ददति=प्रदर्शयन्ति ये तेऽध्वरा विद्वांसः सूर्य्यादयश्च। यद्वा। अध्वरा हिंसारहिता यज्ञाः। यद्वा। अध्वसु शुभमार्गेषु ये रमन्ते तेऽध्वराः। तेषामध्वराणां रथीर्नेतासि ॥२॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सहन्त्य) हे सहनशील (अग्ने) परमात्मन् ! (विदथेषु) सर्वयज्ञेषु (त्वम्, प्रशस्यः, असि) त्वमेव स्तुत्योऽसि (अध्वराणाम्) यतो हिंसारहितकर्मणाम् (रथीः) नेतासि ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, you are adorable in sacred congregations, the one patient, challenging and victor power, and pioneer and leader of non-violent yajnic programmes of creation and production in humanity.