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स दृ॒ळ्हे चि॑द॒भि तृ॑णत्ति॒ वाज॒मर्व॑ता॒ स ध॑त्ते॒ अक्षि॑ति॒ श्रव॑: । त्वे दे॑व॒त्रा सदा॑ पुरूवसो॒ विश्वा॑ वा॒मानि॑ धीमहि ॥

English Transliteration

sa dṛḻhe cid abhi tṛṇatti vājam arvatā sa dhatte akṣiti śravaḥ | tve devatrā sadā purūvaso viśvā vāmāni dhīmahi ||

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Pad Path

सः । दृ॒ळ्हे । चि॒त् । अ॒भि । तृ॒ण॒त्ति॒ । वाज॑म् । अर्व॑ता । सः । ध॒त्ते॒ । अक्षि॑ति । श्रवः॑ । त्वे इति॑ । दे॒व॒ऽत्रा । सदा॑ । पु॒रु॒व॒सो॒ इति॑ पुरुऽवसो । विश्वा॑ । वा॒मानि॑ । धी॒म॒हि॒ ॥ ८.१०३.५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:103» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:13» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:10» Mantra:5


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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वाजं - अक्षिति श्रवः

Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र के अनुसार प्रभु के प्रति अपना अर्पण करनेवाला (सः) = वह उपासक (दृढे चित्) = अतिशयेन प्रबल भी काम-क्रोध रूप शत्रुओं को (अभितृणत्ति) = हिंसित करता है। इनको हिंसित करके (सः) = वह (अर्वता) = इन्द्रियाश्वों के द्वारा (वाजम्) = शक्ति को तथा (अक्षिति श्रवः) = अक्षीण ज्ञान को (धत्ते) = धारण करता है। कर्मेन्द्रियों द्वारा शक्ति को तथा ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा ज्ञान को प्राप्त करता है । [२] हे (पुरुवसो) = पालक व पूरक धनोंवाले प्रभो ! (त्वे देवत्रा) = तुझ देव में स्थित हुए हुए हम (विश्वा वामानि) = सब वननीय, सम्भजनीय, सुन्दर वसुओं को (सदा) = सदा (धीमहि) = धारण करें।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु के प्रति अपना अर्पण करनेवाला अति प्रबल काम-क्रोध को नष्ट करता है, शक्ति व ज्ञान को प्राप्त करता है। प्रभु के आधार में सब सुन्दर वस्तुओं को धारण करें।
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The mortal you guide breaks open the strongest forts of wealth and honour with his power and force and wins immortal fame. O shelter home of the world, under your protection, dedicated to divinity, we pray, let us concentrate on and receive all good things of life.