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मो ते रि॑ष॒न्ये अच्छो॑क्तिभिर्व॒सोऽग्ने॒ केभि॑श्चि॒देवै॑: । की॒रिश्चि॒द्धि त्वामीट्टे॑ दू॒त्या॑य रा॒तह॑व्यः स्वध्व॒रः ॥

English Transliteration

mo te riṣan ye acchoktibhir vaso gne kebhiś cid evaiḥ | kīriś cid dhi tvām īṭṭe dūtyāya rātahavyaḥ svadhvaraḥ ||

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Pad Path

मो इति॑ । ते । रि॒ष॒न् । ये । अच्छो॑क्तिऽभिः । व॒सो॒ इति॑ । अग्ने॑ । केभिः॑ । चि॒त् । एवैः॑ । की॒रिः । चि॒त् । हि । त्वाम् । ईट्टे॑ । दू॒त्या॑य । रा॒तऽह॑व्यः । सु॒ऽअ॒ध्व॒रः ॥ ८.१०३.१३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:103» Mantra:13 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:15» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:10» Mantra:13


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

निर्मल स्तुतिवचन व सुख वृद्धिवाले कर्म

Word-Meaning: - [१] हे (वसो) = हमारे निवास को उत्तम बनानेवाले (अग्ने) = अग्रेणी प्रभो! (ते) = वे (उ) = निश्चय से (मा रिषन्) = मत हिंसित हों, (ये) = जो (अच्छोक्तिभिः) = निर्मल स्तुतिवचनों से तथा (केभिः चित् एवै:) = [ क सुख] निश्चय से सुख के वृद्धिकर कर्मों से आपके स्तुति करनेवाले होते हैं। [२] (कीरिः) = स्तोता (चित्) = निश्चय से (त्वाम्) = आपको (ईट्टे) = स्तुत करता है। यह (दूत्याय) = ज्ञानसन्देश के वहन रूप कर्म को करनेवाला होता है। इस कर्म के लिये ही अपने जीवन को अर्पित करता है। (रातहव्यः) = हव्यों को देनेवाला, अर्थात् अग्निहोत्र करनेवाला होता है। (स्वध्वर:) = उत्तम हिंसारहित कर्मों में प्रवृत्त होता है।
Connotation: - भावार्थ-हम निर्मल स्तुतिवचनों से तथा सुखवृद्धि के कारणभूत कर्मों से प्रभु का उपासन करें। ज्ञान-सन्देश को सर्वत्र प्राप्त करायें, यज्ञशील हों, उत्तम हिंसारहित कर्मों में प्रवृत्त हों।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, shelter home of the world, may they never come to harm who any way by any actions offer honour and worship to you in holy words. The celebrant, bearing havi to perform the holy yajna in service to you, prays to you to bring him knowledge, honour and prosperity in life.