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मा॒ता रु॒द्राणां॑ दुहि॒ता वसू॑नां॒ स्वसा॑दि॒त्याना॑म॒मृत॑स्य॒ नाभि॑: । प्र नु वो॑चं चिकि॒तुषे॒ जना॑य॒ मा गामना॑गा॒मदि॑तिं वधिष्ट ॥

English Transliteration

mātā rudrāṇāṁ duhitā vasūnāṁ svasādityānām amṛtasya nābhiḥ | pra nu vocaṁ cikituṣe janāya mā gām anāgām aditiṁ vadhiṣṭa ||

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Pad Path

मा॒ता । रु॒द्राणा॑म् । दु॒हि॒ता । वसू॑नाम् । स्वसा॑ । आ॒दि॒त्याना॑म् । अ॒मृत॑स्य । नाभिः॑ । प्र । नु । वो॒च॒म् । चि॒कि॒तुषे॑ । जना॑य । मा । गाम् । अना॑गाम् । अदि॑तिम् । व॒धि॒ष्ट॒ ॥ ८.१०१.१५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:101» Mantra:15 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:8» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:10» Mantra:15


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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

माता-दुहिता-स्वसा [गौ:]

Word-Meaning: - [१] यह गौ (रुद्राणां माता) = रोगों को अपने से दूर भगानेवालों का [रुत्+द्रु] निर्माण करनेवाली है । गोदुग्ध के सेवन से शरीर में रोगों का प्रवेश नहीं होता। (वसूनां दुहिता) = शरीर में निवास को उत्तम बनानेवाले सब तत्त्वों का [वसु] यह पूरण करनेवाली है । गोदुग्ध के सेवन से शरीर में सब वसुओं का प्रपूरण होकर जीवन पूर्ण-सा बन जाता है। (आदित्यानां स्वसा) = यह गौ सब अच्छाइयों का आदान करनेवालों की बहिन के समान है। गोदुग्ध का सेवन सब अच्छाइयों को प्राप्त कराता है। यह गौ तो (अमृतस्य) = अमृतत्त्व - नीरोगता के साधनभूत दुग्ध का (ताभिः) = केन्द्र है। उस दूध का यह निवास स्थान है जो हमें अमर बनाता है। [२] प्रभु कहते हैं कि मैं (चिकितुषे जनाय) = समझदार पुरुष के लिये (नु) = अब (प्रवोचम्) = यह स्पष्ट कहता हूँ कि (गां मा वधिष्ट) = उस गौ को मत मारो, जो (अनागाम्) = निष्पाप है, जिसके दुग्ध के सेवन से हमारे जीवन निष्पाप बनते हैं और (अदितिम्) = जिसके दुग्ध के सेवन से स्वास्थ्य का खण्डन नहीं होता। यह गोदुग्ध हमें शरीर में स्वस्थ बनाता है, मन में निष्पाप ।
Connotation: - भावार्थ- गौ उस दूध को हमें प्राप्त कराती है जो रोगों को दूर करता है, निवास के लिये आवश्यक तत्त्वों को उत्पन्न करता है, सब अच्छाइयों को हमारे अन्दर प्राप्त कराता है। यह गौ अनागा-अदिति' है। इसका वध न करना ही समझदारी है।
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Mother of Rudras, pranic energies, living forms and scholars of the middle order, sustainer of the Vasus, abodes of life such as earth, and scholars of the graduate order, and sister of Adityas, suns and scholars of the highest order, the centre fount of life’s nectar and knowledge: that is Aditi, mother Infinity, Nature, mother knowledge of the Veda, and the mother cow. Speak of mother Aditi to the people who are keen for enlightenment. Do not insult, do not pollute, do not injure, do not kill the innocent cow, Mother Nature and the divine knowledge of Veda.