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अ॒यं त॑ एमि त॒न्वा॑ पु॒रस्ता॒द्विश्वे॑ दे॒वा अ॒भि मा॑ यन्ति प॒श्चात् । य॒दा मह्यं॒ दीध॑रो भा॒गमि॒न्द्रादिन्मया॑ कृणवो वी॒र्या॑णि ॥

English Transliteration

ayaṁ ta emi tanvā purastād viśve devā abhi mā yanti paścāt | yadā mahyaṁ dīdharo bhāgam indrād in mayā kṛṇavo vīryāṇi ||

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Pad Path

अ॒यम् । ते॒ । ए॒मि॒ । त॒न्वा॑ । पु॒रस्ता॑त् । विश्वे॑ । दे॒वाः । अ॒भि । मा॒ । य॒न्ति॒ । प॒श्चात् । य॒दा । मह्य॑म् । दीध॑रः । भा॒गम् । इ॒न्द्र॒ । आत् । इत् । मया॑ । कृ॒ण॒वः॒ । वी॒र्या॑णि ॥ ८.१००.१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:100» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:4» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:10» Mantra:1


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

निमित्तमात्रं भव [सव्यसाचिन्]

Word-Meaning: - [१] जीव प्रभु से प्रार्थना करता है कि (अयम्) = यह मैं (तन्वा) = इस शरीर के साथ (ते:) = सब देव (मा) = मेरे (पुरस्तात्) = आपके सामने (एमि) = उपस्थित होता हूँ। (विश्वे देवा:) = सब देव (मा) = मेरे (पश्चाद् अभियन्ति) = पीछे आते हैं, अर्थात् सब दिव्य गुण मुझे प्राप्त होते हैं। प्रभु के सामने उपस्थित होने पर सब दिव्य गुणों का हमारे में प्रवेश होता है। [२] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (यदा) = जब (मह्यम्) = मेरे लिये (भागं दीधरः) = भाग को धारण करते हैं, मुझे जब आपके भजनीय गुण प्राप्त होते हैं (आत् इत्) = तब शीघ्र ही (मया) = मेरे द्वारा आप (वीर्याणि कृणवः) = शक्तिशाली कार्यों को करते हैं। मैं आपका माध्यम बन जाता हूँ। और आपकी शक्ति से मेरे द्वारा सब कार्य होने लगते हैं। मैं आपका ही भक्त बन जाता हूँ। मेरे द्वारा आपसे किये जानेवाले सब कार्य महान् होते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु के सामने उपस्थित हों, हमें प्रभु के दिव्य गुण प्राप्त होंगे। जब प्रभु हमें भजनीय दिव्य गुणों को धारण करायेंगे, तो हमारे द्वारा महान् कार्य हो रहे होंगे।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, here I come before you in person and all noble and brilliant sages follow after me. When you secure my portion for me, then you perform noble actions also through me.