Go To Mantra
Viewed 365 times

स आ नो॒ योनिं॑ सदतु॒ प्रेष्ठो॒ बृह॒स्पति॑र्वि॒श्ववा॑रो॒ यो अस्ति॑ । कामो॑ रा॒यः सु॒वीर्य॑स्य॒ तं दा॒त्पर्ष॑न्नो॒ अति॑ स॒श्चतो॒ अरि॑ष्टान् ॥

English Transliteration

sa ā no yoniṁ sadatu preṣṭho bṛhaspatir viśvavāro yo asti | kāmo rāyaḥ suvīryasya taṁ dāt parṣan no ati saścato ariṣṭān ||

Mantra Audio
Pad Path

सः । आ । नः॒ । योनि॑म् । स॒द॒तु॒ । प्रेष्ठः॑ । बृह॒स्पतिः॑ । वि॒श्वऽवा॑रः । यः । अस्ति॑ । कामः॑ । रा॒यः । सु॒ऽवीर्य॑स्य । तम् । दा॒त् । पर्ष॑त् । नः॒ । अति॑ । स॒श्चतः॑ । अरि॑ष्टान् ॥ ७.९७.४

Rigveda » Mandal:7» Sukta:97» Mantra:4 | Ashtak:5» Adhyay:6» Varga:21» Mantra:4 | Mandal:7» Anuvak:6» Mantra:4


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सः) वह परमात्मा (नः) हमारे (योनिम्) हृदय में (आ, सदतु) निवास करे, (यः) जो परमात्मा (प्रेष्ठः) सबका प्रियतम (बृहस्पतिः) निखिल ब्रह्माण्डों का पति (विश्ववारः) सबका उपास्यदेव (अस्ति) है, (सुवीर्यस्य) हमको जो ब्रह्मचर्यरूपी बल (रायः) और ऐश्वर्य की (कामः) इच्छा है, (तम्) उसको (दात्) दे और (सश्चतः) उपद्रवों में फँसे हुए (नः) हमको (अरिष्टान्) सुरक्षित करके (अति, पर्षत्) शत्रुओं से बचावे ॥४॥
Connotation: - परमात्मा उपदेश करते हैं कि हे पुरुषो ! तुम उस परमदेव को अपने   हृदयमन्दिर में स्थान दो, जो सबका एकमात्र उपास्यदेव है और इस निखिल ब्रहमाण्ड की उत्पत्ति, स्थिति, प्रलय करता है ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ईशमिलन हृदय- देश में

Word-Meaning: - पदार्थ - (यः) = जो (विश्व-वार:) = सबसे वरणीय है और जो सब संकटों की दूर करता है (सः) = वह (प्रेष्ठः) = प्रियतम, (बृहस्पतिः) = ब्रह्माण्ड का स्वामी है, वह (नः) = हमारे (योनिं) = एकत्र मिलने के स्थान हृदय- देश में (आ सदतु) = अनुग्रह कर प्राप्त हो । वही परमेश्वर हमारी जो (सुवीर्यस्य राय: कामः) = उत्तम बलयुक्त ऐश्वर्य की अभिलाषा है (तं) = उसको (दात्) = पूर्ण करता और (सश्चतः) = प्राप्तहोनेवाले (अरिष्टान्) = मृत्यु - लक्षणों से भी (अतिपर्षत्) = पार करता है।
Connotation: - भावार्थ- उपासक जन उस वरणीय प्रभु से अपने हृदय- देश में मिलते हैं। उसके अनुग्रह को प्राप्त कर संकटों से छूटते हैं तथा ऐश्वर्य को पाते हैं।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सः) ईश्वरः (नः) अस्माकं (योनिम्) हृदये (आसदतु) निवसतु (यः) यो हि (प्रेष्ठः) सर्वहितः (बृहस्पतिः) विश्वस्य पतिः (विश्ववारः) विश्वोपास्यः (अस्ति) विद्यते (सुवीर्यस्य) शोभनबलस्य (रायः) स्वैश्वर्यस्य च (कामः) ममाभिलाषो यः (तम्) तमिष्टं (दात्) दद्यात् तथा च (सश्चतः) उपद्रुतान् (नः) अस्मान् (अरिष्टान्) सुरक्षान्विधाय (अति पर्षत्) रक्षतु सर्वतः ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May that dearest lord of supreme love, creator and ruler of the mighty universe and giver of eternal knowledge of the Veda, who is the universal choice and sole object of adoration and prayer for the world, bless our house of yajna and manifest in our heart, give us fulfilment of our heart’s desire for wealth, virility and noble progeny, and wash off our sins and ailments which pollute us, and thus may the lord cleanse us of our existential dirt.