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अधा॒ न्व॑स्य सं॒दृशं॑ जग॒न्वान॒ग्नेरनी॑कं॒ वरु॑णस्य मंसि । स्व१॒॑र्यदश्म॑न्नधि॒पा उ॒ अन्धो॒ऽभि मा॒ वपु॑र्दृ॒शये॑ निनीयात् ॥

English Transliteration

adhā nv asya saṁdṛśaṁ jaganvān agner anīkaṁ varuṇasya maṁsi | svar yad aśmann adhipā u andho bhi mā vapur dṛśaye ninīyāt ||

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Pad Path

अध॑ । नु । अ॒स्य॒ । स॒म्ऽदृश॑म् । ज॒ग॒न्वान् । अ॒ग्नेः । अनी॑कम् । वरु॑णस्य । मं॒सि॒ । स्वः॑ । यत् । अश्म॑न् । अ॒धि॒ऽपाः । ऊँ॒ इति॑ । अन्धः॑ । अ॒भि । मा॒ । वपुः॑ । दृ॒शये॑ । नि॒नी॒या॒त् ॥ ७.८८.२

Rigveda » Mandal:7» Sukta:88» Mantra:2 | Ashtak:5» Adhyay:6» Varga:10» Mantra:2 | Mandal:7» Anuvak:5» Mantra:2


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अध) अब (नु) शीघ्र (अस्य) उक्त परमात्मा के (संदृशम्) साक्षात्कार को (जगन्वान्) अनुभव करता हुआ (वरुणस्य, अग्नेः) ज्ञानस्वरूप परमात्मा के (अनीकम्) स्वरूप को (मंसि) प्राप्त करता हूँ, (अश्मन्) अश्नुते व्याप्नोति सर्वमिति अश्मा परमात्मा, जो व्यापक परमात्मा है, उसका नाम यहाँ अश्मा है, हे परमात्मन् ! (अधिपाः) सबके स्वामिन् ! (अन्धः) सर्वाधिष्ठान (ऊम्) और (यत्, स्वः) जो आपका आनन्दस्वरूप है, वह (मा) मुझको (अभि) भलीभाँति (वपुः) उस स्वरूप की (दृशये) प्राप्ति के (निनीयात्) योग्य बनायें ॥२॥
Connotation: - हे ज्ञानस्वरूप परमात्मन् ! आप मेरी चितवृत्ति को निर्मल करके अपने स्वरूपप्राप्ति के योग्य बनायें ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ईश-तेज का मनन

Word-Meaning: - पदार्थ- (अध नु) = और मैं (अस्य) = इस (अग्ने:) = तेजोमय (वरुणस्य) = परमेश्वर के विषय में (जगन्वान्) = ज्ञान प्राप्त कर और उसकी शरण जाकर उसके (सं-दृशम्) = सम्यक्-दर्शन-योग्य (अनीकं) = तेज का (मंसि) = मनन करता हूँ। (यद्) = जैसे (अश्मन् अन्धः वपुः दृशये निनीयात्) = चक्की आदि में पीसा अन्न या कुटी ओषधि, या (अश्मन् अन्ध:) = मेघ के आधार पर उत्पन्न अन्न शरीर को उत्तम, दर्शन योग्य बनाता है वैसे ही (यत्) = जो (अधिपाः) = सर्वोपरिपालक (स्वः) = सुखकारी है वह (अन्धः) = अन्नवत् प्राणों का धारक होकर (दृशये) = साक्षात् करने के लिये (मा) = मुझे (वपुः) = रूप, शरीर आदि (निनीयात् प्राप्त) = कराता है।
Connotation: - भावार्थ- उपासक जन ईश्वर के प्रति समर्पण करके सदैव उसके तेजोमय स्वरूप का दिग्दर्शन करें और उसी का मनन किया करें क्योंकि यह अन्नमय शरीर परमेश्वर ने इसी निमित्त दिया है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अध) अधुना (नु) सत्वरं (अस्य) पूर्वोक्तपरमात्मनः (संदृशम्) साक्षात्कारं (जगन्वान्) अनुभवन् (वरुणस्य,अग्नेः) ज्ञानस्वरूपपरमात्मनः (अनीकम्) स्वरूपं (मंसि) लभे (अश्मन्) हे सर्वग परमात्मन् ! (अधिपाः) सर्वस्येश्वर ! (अन्धः) अखिलजगदधिष्ठान ! (ऊम्) तथा (यत्, स्वः) यद्भवत आनन्दस्वरूपं तत् (मा) मम (अभि) सम्यक् (वपुः) स्वरूपं (दृशये) प्रत्यक्षं (निनीयात्) कारय ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Meditating on the blissful presence of Varuna, lord of light and wisdom, when I feel the flames of fire and divine exhilaration, then, I pray, the lord of bliss and sovereign of the world may reveal to me his divine presence as it is so that I may experience it in the inner being and live the ecstasy of life divine.