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रद॑त्प॒थो वरु॑ण॒: सूर्या॑य॒ प्रार्णां॑सि समु॒द्रिया॑ न॒दीना॑म् । सर्गो॒ न सृ॒ष्टो अर्व॑तीॠता॒यञ्च॒कार॑ म॒हीर॒वनी॒रह॑भ्यः ॥

English Transliteration

radat patho varuṇaḥ sūryāya prārṇāṁsi samudriyā nadīnām | sargo na sṛṣṭo arvatīr ṛtāyañ cakāra mahīr avanīr ahabhyaḥ ||

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Pad Path

रद॑त् । प॒थः । वरु॑णः । सूर्या॑य । प्र । अर्णां॑सि । स॒मु॒द्रिया॑ । न॒दीना॑म् । सर्गः॑ । न । सृ॒ष्टः । अर्व॑तीः । ऋ॒त॒ऽयन् । च॒कार॑ । म॒हीः । अ॒वनीः॑ । अह॑ऽभ्यः ॥ ७.८७.१

Rigveda » Mandal:7» Sukta:87» Mantra:1 | Ashtak:5» Adhyay:6» Varga:9» Mantra:1 | Mandal:7» Anuvak:5» Mantra:1


ARYAMUNI

अब परमात्मा से सूर्य्य-चन्द्रादि सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों की उत्पत्ति कथन करते हैं।

Word-Meaning: - (वरुणः) सबका अधिष्ठान परमात्मा (सूर्याय) सूर्य्य के लिए (पथः) मार्ग (रदत्) देता और (प्र) भले प्रकार (समुद्रिया, अर्णांसि) अन्तरिक्षस्थ जल तथा (नदीनां) नदियों को (सर्गः, न) घोड़े के समान (अवतीः) वेगवाली (ऋतायन्) शीघ्र गमन की इच्छा से (सृष्टः) रचता और उसी ने (अहभ्यः) दिन से (महीः) महान् (अवनीः) चन्द्रमा को (चकार) उत्पन्न किया ॥१॥
Connotation: - सब संसार को वशीभूत रखनेवाले परमात्मा ने चन्द्रमा, अन्तरिक्षस्थ जल और शीघ्रगामिनी नदियों को रचा और उसी ने तेजोपुञ्ज सूर्य्य को रचकर उसमें गति प्रदान की, जिससे सम्पूर्ण भूमण्डल में गति उत्पन्न हो जाती है। इसी अभिप्राय से अन्यत्र भी वर्णन किया है कि– सूर्य्याचन्द्रमसौ धाता यथापूर्वमकल्पयत्। दिवञ्च पृथिवीञ्चान्तरिक्षमथो स्वः ॥ ऋग्० १०।१९१।३॥ अर्थ–धाता=सबको धारण-पोषण करनेवाले परमात्मा ने सूर्य्य चन्द्रमा, पृथिवी, आकाश और सम्पूर्ण लोक-लोकान्तरों को पहले की न्याईं बनाया ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वरुण के कार्य

Word-Meaning: - पदार्थ- (वरुणः) = व्यापक परमेश्वर( सूर्याय) = सूर्य के (पथः) = मार्गों को (रदत्) = बनाता है। वही (समुद्रिया) = समुद्र की ओर जानेवाली (नदीनां अर्णासि) = नदियों के जलों को बहाता है। (सर्गः न सृष्ट: अर्वतीः ऋतायन्) = जैसे बरसा हुआ जल नीची, बहती नदियों की ओर जाता है वैसे (सर्गः) = जगत् का बनानेवाला (सृष्टः) = जगत् का स्वामी (अर्वतीः) = अधीन महती शक्तियों और प्रकृति की विकृतियों को (ऋतायन्) = ज्ञानपूर्वक सञ्चालित करता हुआ (अहभ्यः महीः अवनी: चकार) = दिनों से रात्रियों को पृथक् करता है।
Connotation: - भावार्थ - जब व्यक्ति सूर्य के उदय से अस्ताचल की ओर जाना, नदियों का समुद्र की ओर बहना, दिन का प्रकाशित और रात्रि का अन्धकारमय होना देखता है तो प्रश्न होता है कि यह सब कौन कर रहा है? उत्तर में केवल वरुण परमेश्वर ही आता है।

ARYAMUNI

अथ परमात्मसकाशात् सकलब्रह्माण्डोत्पत्तिः कथ्यते।

Word-Meaning: - (वरुणः) सर्वेषामधिष्ठाता परमात्मा (सूर्याय) सूर्याय गन्तुं (पथः) मार्गं (रदत्) ददाति, तथा च (प्र) सम्यक् (समुद्रिया, अर्णांसि) अन्तरिक्षस्थं जलम्, तथा (नदीनाम्) नदीः (सर्गः, नः) अश्वमिव गच्छन्तीः (अवतीः) वेगवतीः (ऋतायन्) सत्वरं गमयिष्यन् (सृष्टः) सृजति, तथा (अहभ्यः) दिनेभ्यः (महीः) महान्तं (अवनीः) चन्द्रं चोत्पादयामास ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The universe is a mighty explosion of thought, energy and matter let free like a cosmic horse on course: Varuna, lord of supreme power, intelligence and imagination, carving out orbits for the self-refulgent stars, setting cosmic oceans into floods of rivers heading for the sea, structuring mighty moving galaxies and great planets and satellites from the stars, all moving in observance of the cosmic law.