Go To Mantra
Viewed 382 times

प्रति॑ त्वा॒द्य सु॒मन॑सो बुधन्ता॒स्माका॑सो म॒घवा॑नो व॒यं च॑ । ति॒ल्वि॒ला॒यध्व॑मुषसो विभा॒तीर्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभि॒: सदा॑ नः ॥

English Transliteration

prati tvādya sumanaso budhantāsmākāso maghavāno vayaṁ ca | tilvilāyadhvam uṣaso vibhātīr yūyam pāta svastibhiḥ sadā naḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

प्रति॑ । त्वा॒ । अ॒द्य । सु॒ऽमन॑सः । बु॒ध॒न्त॒ । अ॒स्माका॑सः । म॒घऽवा॑नः । व॒यम् । च॒ । ति॒ल्वि॒ला॒यध्व॑म् । उ॒ष॒सः॒ । वि॒ऽभा॒तीः । यू॒यम् । पा॒त॒ । स्व॒स्तिऽभिः॑ । सदा॑ । नः॒ ॥ ७.७८.५

Rigveda » Mandal:7» Sukta:78» Mantra:5 | Ashtak:5» Adhyay:5» Varga:25» Mantra:5 | Mandal:7» Anuvak:5» Mantra:5


ARYAMUNI

अब ऐश्वर्य्यसम्पन्न परमात्मा की स्तुति कथन करते हुए प्रार्थना करते हैं।

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (त्वा प्रति) आपके प्रति (अद्य) आज (सुमनसः) सुन्दर मनवाले विज्ञानी और (अस्माकासः) हमारे ऋत्विगादि (मघवानः) ऐश्वर्य्यसम्पन्न आपको (बुधन्त) बोधन करते (च) और (वयम्) हमलोग आपके महत्त्व को समझते हैं। हे परमात्मन् ! आप (तिल्विलायध्वं) हममें परस्पर प्रेमभाव उत्पन्न करें, क्योंकि आप (उषसः) प्रकाशरूप ज्ञान से (विभातीः) सदा प्रकाशमान हैं। (यूयं) आप (स्वस्तिभिः) स्वस्तिवाचनरूप वेदवाणियों से (नः) हमको (सदा) सदा (पात) पवित्र करें ॥५॥
Connotation: - हे भगवन् ! आपको शान्त मनवाले योगीजन बोधन करते तथा बड़े-बड़े ऐश्वर्य्यसम्पन्न आपके यश को वर्णन करते हैं और आपकी प्रेममय रज्जू से बन्धे हुए भक्तजन आपका सदैव कीर्तन करते हैं, कृपा करके हमको कल्याणरूप वाणियों से सदा के लिए पवित्र करें ॥५॥ यह ७८वाँ सूक्त और २५वाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शुद्ध चित्त का आचरण

Word-Meaning: - पदार्थ- हे विदुषि! (सु-मनसः) = उत्तम चित्तवाले (अस्माकास:) = हमारे सम्बन्धी जन और (मघ-वानः) = उत्तम ज्ञानैश्वर्यवान् और (वयं च) = हम लोग सभी (अद्य) = आज के दिन (त्वा प्रति बुधन्त) = तेरे साथ उत्तम परिचय प्राप्त करें। हे (विभाती: उषसः) = चमकनेवाली प्रभात-वेलाओं के समान कुलवधुओ! आप लोग (तिल्विलायध्वम्) = तिलों से सुशोभित भूमि के समान स्नेहोत्पादक भूमि के समान होवो। (यूयं नः सदा स्वस्तिभिः पात) = हमारी सदा उत्तम साधनों से पालन करो।
Connotation: - भावार्थ-विदुषी कुल वधू अपने निर्मल चित्त तथा उत्तम ज्ञान के द्वारा मधुर व प्रिय व्यवहार से पति के परिवार को अपनी ओर आकर्षित करे।

ARYAMUNI

अथैश्वर्यसम्पन्नः परमात्मा प्रार्थ्यते।

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (त्वा प्रति) भवन्तं प्रति (अद्य) अस्मिन्वर्त्तमाने दिने (सुमनसः) सुचेतसो विज्ञानिनः (अस्माकासः) अस्मदीया ऋत्विगादयश्च (मघवानः) ऐश्वर्यसम्पन्नं भवन्तं (बुधन्त) बोधयन्ति (च) च पुनः (वयम्) वयं भवन्महत्त्वं बुध्यामहे, (यूयम्) हे परमात्मन् ! त्वम् (तिल्विलायध्वम्) अस्मासु मिथः प्रेमोत्पादको भव, यतो भवान् (उषसः) प्रकाशस्वरूपज्ञानेन (विभातीः) शश्वत्प्रकाशते (यूयम्) भवन्तः (स्वस्तिभिः) स्वस्तिमयीभिर्वेदवाग्भिः (नः) अस्मान् (सदा) शश्वत् (पात) पुनन्तु ॥५॥ इत्यष्टासप्ततितमं सूक्तं पञ्चविंशो वर्गश्च समाप्तः ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - You, O Dawn today, people of noble mind, our own, wealthy, honourable and excellent, and we all, invoke, admire and adore. O resplendent and magnificent lights of dawn, inspire us with love and refinement. O lights of divinity, saints and sages, protect and promote us with all peace, prosperity and happiness all ways, all time.