Go To Mantra
Viewed 415 times

तानीदहा॑नि बहु॒लान्या॑स॒न्या प्रा॒चीन॒मुदि॑ता॒ सूर्य॑स्य । यत॒: परि॑ जा॒र इ॑वा॒चर॒न्त्युषो॑ ददृ॒क्षे न पुन॑र्य॒तीव॑ ॥

English Transliteration

tānīd ahāni bahulāny āsan yā prācīnam uditā sūryasya | yataḥ pari jāra ivācaranty uṣo dadṛkṣe na punar yatīva ||

Mantra Audio
Pad Path

तानि॑ । इत् । अहा॑नि । ब॒हु॒लानि॑ । आ॒स॒न् । या । प्रा॒चीन॑म् । उत्ऽइ॑ता॒ । सूर्य॑स्य । यतः॑ । परि॑ । जा॒रःऽइ॑व । आ॒ऽचर॒न्ती । उषः॑ । द॒दृ॒क्षे । न । पुनः॑ । य॒तीऽइ॑व ॥ ७.७६.३

Rigveda » Mandal:7» Sukta:76» Mantra:3 | Ashtak:5» Adhyay:5» Varga:23» Mantra:3 | Mandal:7» Anuvak:5» Mantra:3


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (तानि इत् अहानि) वह दिन के समान प्रकाशरूप (बहुलानि) अनेक प्रकार के तेज (आसन्) दृष्टिगत होते हैं, (या) जो (सूर्यस्य) स्वतःप्रकाश परमात्मा के (प्राचीनं) प्राचीन स्वरूप को (उदिता) प्राप्त है, (यतः) जिससे (परिजार इव) अग्नि के समान (उषः) तेज (आचरन्ती) निकलते हुए (ददृक्षे) देखे जाते हैं, (यतीव) व्यभिचारी पदार्थों के समान (पुनः न) फिर नहीं ॥३॥
Connotation: - जिस प्रकार अग्नि से सहस्रों प्रकार की ज्वालायें उत्पन्न होती रहती हैं, इसी प्रकार स्वतःप्रकाश परमात्मा के स्वरूप से तेज की रश्मियें सदैव देदीप्यमान होती रहती हैं, या यों कहो कि स्वतः-प्रकाश परमात्मा की ज्योति सदैव प्रकाशित होती रहती है। जैसे पदार्थों के अनित्य गुण उन पदार्थों से पृथक् हो जाते वा नाश को प्राप्त हो जाते हैं, इस प्रकार परमात्मा के प्रकाशरूप गुण का उससे कदापि वियोग नहीं होता अर्थात् परमात्मा के गुण विकारी नहीं, यह इस मन्त्र का भाव है ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

नव वधु का कर्त्तव्य

Word-Meaning: - पदार्थ- (सूर्यस्य या प्राचीनम् उदिता) = जैसे सूर्य के पूर्व में उदय होने पर जो प्रकट होते हैं (तानि इत् अहानि) = वे दिन कहाते हैं। (उषा जारः इव परि आचरन्ती) = उषा भी रात्रि को जारण करनेवाले सूर्य के समान ही आचरण करती हुई (न पुनः यती इव ददृक्षे) = फिर नहीं लौटती-सी दीखती है, वैसे हे (उषः) = पति की कामनावाली वधू! (या) = जो तू (सूर्यस्य प्राचीनम् इत्) = सूर्य-समान तेजस्वी पुरुष के पूर्व भाग में आकर आगे आती है (तानि इत् बहुलानि अहानि) = वे ही बहुत दिन उत्तम हैं। (यतः) = क्योंकि उन दिनों में तू (जारः इव) = तेरी आयु को अपने साथ पूर्णरूपेण व्यतीत करनेवाले सूर्यवत् तेजस्वी पति के समान ही तू भी (आचरन्ती) = धर्माचरण करती हुई (न पुनः यती इव) = उसे भविष्य में कभी न त्यागती-सी (परि ददृशे) = सदा संग दिखाई दे।
Connotation: - भावार्थ- नव वधू को योग्य है कि वह पति के प्रत्येक कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग करे। पति का कभी तिरस्कार न करे तथा गृहस्थ धर्म का आचरण करती हुई सदैव पति के अनुकूल व्यवहार करे।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (तानि इत् अहानि) तानि दिनानीव प्रकाशमयानि (बहुलानि) नैकधा तेजांसि (आसन्) दृष्टिपथे प्रादुर्भवन्ति (या) यानि (सूर्यस्य) स्वतःप्रकाशस्य परमात्मनः (प्राचीनम्) प्राचीनस्वरूपं (उदिता) प्राप्तानि (यतः) यस्मात् (परि जार इव) अग्निसदृशानि (उषः) तेजांसि (आचरन्ती) निर्गच्छन्ति (ददृक्षे) दृश्यन्ते (यतीव) व्यभिचारपदार्था इव (पुनर्न) न सन्ति पुनः ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Many and intense are those resplendent lights of the divine sun arisen long before antiquity from where the dawns are seen rising like fire but never seen returning, deserted or deserting or forsaken.