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ऋ॒तावा॑न ऋ॒तजा॑ता ऋता॒वृधो॑ घो॒रासो॑ अनृत॒द्विष॑: । तेषां॑ वः सु॒म्ने सु॑च्छ॒र्दिष्ट॑मे नर॒: स्याम॒ ये च॑ सू॒रय॑: ॥

English Transliteration

ṛtāvāna ṛtajātā ṛtāvṛdho ghorāso anṛtadviṣaḥ | teṣāṁ vaḥ sumne succhardiṣṭame naraḥ syāma ye ca sūrayaḥ ||

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Pad Path

ऋ॒तऽवा॑नः । ऋ॒तऽजा॑ताः । ऋ॒त॒ऽवृधः॑ । घो॒रासः॑ । अ॒नृ॒त॒ऽद्विषः॑ । तेषा॑म् । वः॒ । सु॒म्ने । सु॒च्छ॒र्दिःऽत॑मे । न॒रः॒ । स्याम॑ । ये । च॒ । सू॒रयः॑ ॥ ७.६६.१३

Rigveda » Mandal:7» Sukta:66» Mantra:13 | Ashtak:5» Adhyay:5» Varga:10» Mantra:3 | Mandal:7» Anuvak:4» Mantra:13


ARYAMUNI

अब उपर्युक्त विद्वानों के गुण वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (ऋतवानः) सत्यपरायण, (ऋतजाताः) सत्य की शिक्षाप्राप्ति किये हुए, (ऋतावृधः) सत्यरूप यज्ञ की वृद्धि करनेवाले (घोरासः, अनृतद्विषः) और असन्मार्ग के अत्यन्त द्वेषी विद्वानों के (सुच्छर्दिष्टमे) सुखतम (सुम्ने) मार्ग में (वः) तुम लोग चलो (च) और (तेषां) उन विद्वानों से (ये) जो अपने गुणगौरव द्वारा (सूरयः) तेजस्वी हैं (नरः) तुम लोग प्रार्थना करो कि हम भी (स्याम) उक्तगुणसम्पन्न हों ॥१३॥
Connotation: - परमात्मा उपदेश करते हैं कि हे मनुष्यों ! तुम अनृत से द्वेष करनेवाले तथा सत्य से प्यार करनेवाले सत्पुरुषों का सत्सङ्ग करो और उनसे नम्रतापूर्वक वर्तते हुए प्रार्थना करो कि हे महाराज ! हमें भी सन्मार्ग का उपदेश करो, ताकि हम भी उत्तमगुणसम्पन्न हों ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

विद्वानों की शरण में रहें

Word-Meaning: - पदार्थ - (ये च) = और जो (सूरयः) = विद्वान् लोग (ऋत-वान:) = सत्य-ज्ञान का सेवन करनेकरानेवाले (ऋतजाता:) = सत्य-ज्ञान में प्रसिद्ध (ऋत-वृधः) = सत्य वर्धक, (घोरास:) = तेजस्वी, (अनृतद्विषः) = असत्य के द्वेषी हैं, हे (नरः) = नायकवत् पुरुषो! (तेषां वः) = उन आपके (सुच्छर्दिस्तमे) = उत्तम रक्षा गृह से युक्त (सुम्ने) = सुखद शरण में सदा (स्याम) = रहें ।
Connotation: - भावार्थ - नेतृत्त्व करनेवाले पुरुषों तथा प्रशासक वर्ग को सत्य न्याय के उपदेशक सदाचारी विद्वानों की उत्तम शरण में सदैव रहना चाहिए जिससे वे लोग सत्य न्याय के मार्ग से कभी न भटकें।

ARYAMUNI

अथ प्रागुक्तविदुषां गुणा वर्ण्यन्ते।

Word-Meaning: - (ऋतावानः) सत्यव्रतरताः (ऋतजाताः) सत्यजन्मानः (ऋतावृधः) सद्यज्ञवर्द्धकाः (घोरासः) रौद्राः (अनृतद्विषः) मिथ्यामतद्वेषिणः (वः) युष्माकं मध्ये ये (सूरयः) विद्वांसः। (नरः) हे जनाः ! भवद्भिरेवंविधा प्रार्थना कार्य्या यत् वयमपि (तेषां) उक्तगुणवतां विदुषां (सुच्छर्दिष्टमे) सुखतमे (सुम्ने) पथि (स्याम) भवेम ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O brilliant scholars, rulers and all those who are redoubtable leaders, lovers and seekers of truth by knowledge and action, born in truth and extending the bounds of the values of truth in the social order, terrible in action with no tolerance for untruth and social evil, let us abide in law in your good will and in the felicity of a happy home in peace and security.