Go To Mantra
Viewed 450 times

ज्म॒या अत्र॒ वस॑वो रन्त दे॒वा उ॒राव॒न्तरि॑क्षे मर्जयन्त शु॒भ्राः। अ॒र्वाक्प॒थ उ॑रुज्रयः कृणुध्वं॒ श्रोता॑ दू॒तस्य॑ ज॒ग्मुषो॑ नो अ॒स्य ॥३॥

English Transliteration

jmayā atra vasavo ranta devā urāv antarikṣe marjayanta śubhrāḥ | arvāk patha urujrayaḥ kṛṇudhvaṁ śrotā dūtasya jagmuṣo no asya ||

Mantra Audio
Pad Path

ज्म॒याः। अत्र॑। वस॑वः। र॒न्त॒। दे॒वाः। उ॒रौ। अ॒न्तरि॑क्षे। म॒र्ज॒य॒न्त॒। शु॒भ्राः। अ॒र्वाक्। प॒थः। उ॒रु॒ऽज्र॒यः॒। कृ॒णु॒ध्व॒म्। श्रोता॑। दू॒तस्य॑। ज॒ग्मुषः॑। नः॒। अ॒स्य ॥३॥

Rigveda » Mandal:7» Sukta:39» Mantra:3 | Ashtak:5» Adhyay:4» Varga:6» Mantra:3 | Mandal:7» Anuvak:3» Mantra:3


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर विद्वान् जन क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (उरुज्रयः) बहुत जाने और (शुभ्राः) शुद्ध आचरण करनेवाले (वसवः) विद्या में वास किये हुए (देवाः) विद्वान् जनो ! तुम (उरौ) बहुव्यापक (अन्तरिक्षे) आकाश में (अत्र) इस संसार में (ज्मयाः) भूमि के बीच (रन्त) रमें (अर्वाक्) पीछे (पथः) मार्गों को (मर्जयन्त) शुद्ध करो (अस्य) इस (दूतस्य) दूत को (नः) हम लोगों को (जग्मुषः) जाने, प्राप्त होने वा जाननेवाले (कृणुध्वम्) करो और हमारी विद्याओं को (श्रोता) सुनो ॥३॥
Connotation: - हे विद्वानो ! तुम धर्ममार्गों को शुद्ध प्रकाशित कर दूत के समान सब जगह घूम, धर्म का विस्तार कर सब मनुष्यों को विद्या सुखयुक्त करो ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वायु तथा सड़क मार्गों की व्यवस्था

Word-Meaning: - पदार्थ- हे (वसवः) = राष्ट्रवासी जनो! (अत्र) = इस राष्ट्र में आप लोग (ज्मयाः) = भूमि के मध्य (रमन्त) = प्रसन्न रहो। हे (शुभ्राः) = सुशोभित (देवाः) = स्त्री-पुरुषो! आप (उरौ) = विशाल (अन्तरिक्षे) = अन्तरिक्ष में वायु-तुल्य (मर्जयन्त) = व्यवहारों को शुद्ध करो। हे (उरु-ज्रयः) = बड़े-बड़े मार्गों पर चलनेहारे ! आप (अर्वाक्) = हमारी ओर (पथः) = गन्तव्य (मार्ग कृणुध्वं) = मार्ग बनावें । (जग्मुषः) = जानेवाले आप लोगों के प्रति (नः) = हमारे (अस्य दूतस्य) = इस दूत के वचनों को (श्रोत) = सुनो।
Connotation: - भावार्थ- राजा को चाहिए कि वह राष्ट्र की प्रजा के लिए आकाश मार्ग वायुयान आदि से आने-जाने की व्यवस्था करे। बड़े-बड़े भूमि पर चलने हेतु राजमार्गों की भी व्यवस्था करे। अर्थात् बनावे परिवहन व्यवस्था सुचारु ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्विद्वांसः किं कुर्युरित्याह ॥

Anvay:

हे उरुज्रयः शुभ्रा वसवो देवा ! यूयमुरावन्तरिक्षेऽत्र ज्मया रन्तार्वाक् पथो मर्जयन्तास्य दूतस्य नो जग्मुषः कृणुध्वमस्माकं विद्याः श्रोता ॥३॥

Word-Meaning: - (ज्मयाः) भूमेर्मध्ये (अत्र) अस्मिन् संसारे (वसवः) विद्यायां कृतवासाः (रन्त) रमन्ताम् (देवाः) विद्वांसः (उरौ) बहुव्यापके (अन्तरिक्षे) आकाशे (मर्जयन्त) शोधयन्तु (शुभ्राः) शुद्धाचाराः (अर्वाक्) (पथः) मार्गान् (उरुज्रयः) बहुगन्तारः (कृणुध्वम्) (श्रोता) शृणुत। अत्र द्व्यचोऽतस्तिङ इति दीर्घः। (दूतस्य) (जग्मुषः) गन्तॄन् प्राप्तान् वेदितॄन् (नः) अस्माकं अस्मान् वा (अस्य) ॥३॥
Connotation: - हे विद्वांसो ! यूयं धर्ममार्गान् शुद्धान् प्रचार्य्य दूतवत् सर्वत्र भ्रमणं कृत्वा धर्मं विस्तार्य सर्वान् मनुष्यान् प्राप्तविद्यासुखान् कुरुत ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let the Vasus, life giving energies of nature, and enlightened people settled at peace in learning, abound and rejoice here on earth. Let radiant purities of divine refulgence from yajna rise to the vast sky and purify the atmosphere. Let divine energies of vast extension receive and respond to this yajnic code of our participation in nature’s dynamics and converge on this way to our earth.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे विद्वानांनो ! तुम्ही शुद्ध धर्ममार्गाने सर्वत्र दूताप्रमाणे फिरून धर्माचा विस्तार करा व सर्व माणसांना विद्या व सुखाने युक्त करा. ॥ ३ ॥