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इन्द्रं॒ नरो॑ ने॒मधि॑ता हवन्ते॒ यत्पार्या॑ यु॒नज॑ते॒ धिय॒स्ताः। शूरो॒ नृषा॑ता॒ शव॑सश्चका॒न आ गोम॑ति व्र॒जे भ॑जा॒ त्वं नः॑ ॥१॥

English Transliteration

indraṁ naro nemadhitā havante yat pāryā yunajate dhiyas tāḥ | śūro nṛṣātā śavasaś cakāna ā gomati vraje bhajā tvaṁ naḥ ||

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Pad Path

इन्द्र॑म्। नरः॑। ने॒मऽधि॑ता। ह॒व॒न्ते॒। यत्। पार्याः॑। यु॒नज॑ते। धियः॑। ताः। शूरः॑। नृऽसा॑ता। शव॑सः। च॒का॒नः। आ। गोम॑ति। व्र॒जे। भ॒ज॒। त्वम्। नः॒ ॥१॥

Rigveda » Mandal:7» Sukta:27» Mantra:1 | Ashtak:5» Adhyay:3» Varga:11» Mantra:1 | Mandal:7» Anuvak:2» Mantra:1


SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब पाँच ऋचावाले सत्ताईसवें सूक्त का प्रारम्भ है, इसके प्रथम मन्त्र में सबको कैसा विद्वान् राजा इच्छा करने योग्य है, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे राजन् ! जो (शूरः) शत्रुओं की हिंसा करनेवाले (शवसः) बल से (चकानः) कामना करते हुए (त्वम्) आप (नृषाता) मनुष्य जिसमें बैठते वा (गोमति) गौयें जिसमें विद्यमान ऐसे (व्रजे) जाने के स्थान में (नः) हम लोगों को (आ, भज) अच्छे प्रकार सेविये, हे राजन् ! जिन (इन्द्रम्) परमैश्वर्य देनेवाले आप को (यत्) जो (पार्याः) पालना करने योग्य (धियः) उत्तम बुद्धि (युनजते) युक्त होती हैं (ताः) उनको आप अच्छे प्रकार सेवो। जो (नरः) विद्याओं में उत्तम नीति देनेवाले (नेमधिता) संग्राम में आप को (हवन्ते) बुलाते हैं, उनको आप अच्छे प्रकार सेवो ॥१॥
Connotation: - जो निश्चय से इस संसार में प्रशंसित बुद्धिवाला, सर्वदा बल वृद्धि की इच्छा करता हुआ, शिष्ट जनों की सम्मति वर्तनेवाला, विद्वान्, उद्योगी, धार्मिक और प्रजा पालन में तत्पर जन हो, उसी की सब कामना करो ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

परमात्मा का स्मरण करें

Word-Meaning: - पदार्थ - यत् = जो इन्द्रं- ऐश्वर्यवान् को नेमधिता संग्राम में नरः = मनुष्य इवन्ते पुकारते हैं, यत् = जो पार्या: = पालन-योग्य धियः- और धारण- योग्य प्रजाएं ऐश्वर्यवान् राजा का युनजते-सहयोग करती हैं, हे राजन् ! तू वह शूरः = वीर नृ-साता= मनुष्यों को विभक्त करनेवाला, शवस: चकान:-बल की इच्छा करता हुआ ता:- उन प्रजाओं को और नः = हमें भी गोमति व्रजे-उत्तम वाणियों से प्राप्तव्य ज्ञानमार्ग वा ब्रह्मपद से युक्त उत्तम राज्य में आ भज-रख ।
Connotation: - भावार्थ- मनुष्य को योग्य है कि सर्वव्यापक परमेश्वर का हर समय स्मरण करते हुए उसकी सर्वशक्तिमत्ता को अनुभव करे, तथा कुमार्गों से सदा बचकर सुपथ पर चलता रहे।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ सर्वैः कीदृशो विद्वान् राजा कमनीयोऽस्तीत्याह ॥

Anvay:

हे राजन् ! यः शूरो शवसश्चकानस्त्वं नृषाता गोमति व्रजे न आ भज [हे राजन् ! ] यमिन्द्रं त्वा यद्या पार्या धियो युनजते तास्त्वमाभज ये नरो नेमधिता त्वां हवन्ते ताँस्त्वमा भज ॥१॥

Word-Meaning: - (इन्द्रम्) परमैश्वर्यप्रदं राजानम् (नरः) विद्यासु नेतारः (नेमधिता) नेमधितौ सङ्ग्रामे (हवन्ते) आह्वयन्ति (यत्) या (पार्याः) पालनीयाः (युनजते) युञ्जते। अत्र बहुलं छन्दसीत्यलोपो न। (धियः) प्रज्ञाः (ताः) (शूरः) शत्रूणां हिंसकः (नृषाता) नरः सीदन्ति यस्मिंस्तस्मिन् नृसातौ (शवसः) बलात् (चकानः) कामयमानः (आ) (गोमति) गावो विद्यन्ते यस्मिँस्तस्मिन् (व्रजे) व्रजन्ति यं तस्मिन् (भजा)। सेवस्व अत्र द्व्यचोऽतस्तिङ इति दीर्घः। (त्वम्) (नः) ॥१॥
Connotation: - यो ह्यत्र प्रशस्तप्रज्ञा सर्वदा बलवृद्धिमिच्छञ्छिष्टसम्मतो विद्वानुद्योगी धार्मिकः प्रजापालनतत्परो नरः स्यात्तमेव सर्वे कामयन्ताम् ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Leading people call upon Indra, lord ruler of the world, in their serious struggles of life and pray for those concentrative faculties of mind and intelligence by which they can join the divine presence and win their goal. The lord is the brave, generous and fearless leader of humanity in their corporate life, lover of strength and inspirer of heroic souls. O lord, give us the grace of your divine presence and lead us in our development of lands and cows and in our plans of education, enlightenment and our vision of the divine Word.

MATA SAVITA JOSHI

या सूक्तात इंद्र, सेनापती, राजा, दाता, रक्षक व प्रवृत्त करणाऱ्यांच्या गुणांचे व कर्माचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची पूर्व सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या जगात जो निश्चयपूर्वक प्रशंसित बुद्धिमान, सदैव बलाची इच्छा करणारा, सभ्य लोकांची संमती घेणारा, विद्वान, उद्योगी, धार्मिक व प्रजेचे पालन करण्यात तत्पर पुरुष असेल त्याचीच कामना करा. ॥ १ ॥