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ब्रा॒ह्म॒णास॑: सो॒मिनो॒ वाच॑मक्रत॒ ब्रह्म॑ कृ॒ण्वन्त॑: परिवत्स॒रीण॑म् । अ॒ध्व॒र्यवो॑ घ॒र्मिण॑: सिष्विदा॒ना आ॒विर्भ॑वन्ति॒ गुह्या॒ न के चि॑त् ॥

English Transliteration

brāhmaṇāsaḥ somino vācam akrata brahma kṛṇvantaḥ parivatsarīṇam | adhvaryavo gharmiṇaḥ siṣvidānā āvir bhavanti guhyā na ke cit ||

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Pad Path

ब्रा॒ह्म॒णासः॑ । सो॒मिनः॑ । वाच॑म् । अ॒क्र॒त॒ । ब्रह्म॑ । कृ॒ण्वन्तः॑ । प॒रि॒व॒त्स॒रीण॑म् । अ॒ध्व॒र्यवः॑ । घ॒र्मिणः॑ । सि॒स्वि॒दा॒नाः । आ॒विः । भ॒व॒न्ति॒ । गुह्याः॑ । न । के । चि॒त् ॥ ७.१०३.८

Rigveda » Mandal:7» Sukta:103» Mantra:8 | Ashtak:5» Adhyay:7» Varga:4» Mantra:3 | Mandal:7» Anuvak:6» Mantra:8


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोमिनः, ब्राह्मणासः) सौम्यचित्तवाले ब्राह्मण (परिवत्सरीणम्) वर्ष के उपरान्त (ब्रह्म, कृण्वन्तः) ब्रह्म के यश को प्रकाशित करते हुए (वाचम्, अक्रत) वेदवाणी का उच्चारण करते हैं, (केचित्, गुह्याः, अध्वर्यवः) कोई एकान्त स्थल में बैठे व्रत करते हुए ब्राह्मण (घर्मिणः, सिस्विदानाः) उष्णता से सिक्त शरीर होकर भी (न, आविर्भवन्ति) बहिर्भूत नहीं होते ॥८॥
Connotation: - वेदव्रती ब्राह्मण ब्रह्म के यश को गायन करने के लिये एकान्त स्थान में बैठें और वे शीतोष्णादि द्वन्द्वों को सहते हुए तितिक्षु और तपस्वी बन कर अपने व्रत को पूर्ण करें ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वर्षभर वेदोपदेश

Word-Meaning: - पदार्थ- (सोमिनः ब्राह्मणासः) = सोमयाग करनेवाले, वा ब्रह्मचारियों को शिक्षा देनेवाले विद्वान् लोग (परि वत्सरीणम्) = वर्ष भर (ब्रह्म कृण्वन्तः) = वेदोपदेश करते हुए (वाचम् अक्रत) = प्रवचन करें। (अध्वर्यवः) = यज्ञकर्त्ता (घर्मिणः) = सूर्यवत् तेजस्वी, (सिष्विदाना:) = स्वेदयुक्त होकर भी (केचित्) = कुछ विद्वान् लोग (गुह्याः न) = गुहा में बैठे तपस्वियों के तुल्य (गुह्या:) = बुद्धि, ज्ञान या हृदय- गुहा में रमण करते हुए (आविर्भवन्ति) = प्रकट होते हैं।
Connotation: - भावार्थ- विद्वान् लोग अपने ब्रह्मचारी शिष्यों को वर्षभर वेदोपदेश करते रहें। यज्ञ कराते रहें तथा गुफाओं में बैठकर तपस्या करते हुए ब्रह्म को भी जानें।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोमिनः, ब्राह्मणासः) सौम्यचित्ता ब्राह्मणाः (परिवत्सरीणम्) संवत्सरान्ते (ब्रह्म, कृण्वन्तः) ब्रह्मयशः प्रकाशयन्तः (वाचम्, अक्रत) वेदमुच्चारयेयुः (केचित्, गुह्या, अध्वर्यवः) केचिदेकाकिनो व्रतं धारयन्तः (घर्मिणः, सिस्विदानाः) घर्मेण स्विन्नशरीरा अपि (न, आविर्भवन्ति)  बहिर्भूताः पराङ्मुखा न भवन्ति ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Brahmanas engaged in the yearly soma yajna for peace and harmony conduct the yajna in honour of the Supreme Brahman and chant the Vedic mantras at the end of the first year. The priests facing the fire and soaked in sweat emerge as if from seclusion in the cave.