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प॒र्जन्या॑य॒ प्र गा॑यत दि॒वस्पु॒त्राय॑ मी॒ळ्हुषे॑ । स नो॒ यव॑समिच्छतु ॥

English Transliteration

parjanyāya pra gāyata divas putrāya mīḻhuṣe | sa no yavasam icchatu ||

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Pad Path

प॒र्जन्या॑य । प्र । गा॒य॒त॒ । दि॒वः । पु॒त्राय॑ । मी॒ळ्हुषे॑ । सः । नः॒ । यव॑सम् । इ॒च्छ॒तु॒ ॥ ७.१०२.१

Rigveda » Mandal:7» Sukta:102» Mantra:1 | Ashtak:5» Adhyay:7» Varga:2» Mantra:1 | Mandal:7» Anuvak:6» Mantra:1


ARYAMUNI

अब श्लेषालङ्कार से परमात्मा और मेघ का वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - हे ऋत्विग् लोगो ! तुम (पर्जन्याय) तृप्तिजनक जो परमात्मा है, उसका (प्र, गायत) गायन करो, (सः, नः, यवसम्, इच्छतु) वः हमारे लिये ऐश्वर्य देवे, जो (दिवः, पुत्राय) द्युलोकस्थ जनों को नरक से बचाता और (मीळ्हुषे) आनन्द को वर्षाता है ॥१॥
Connotation: - परमात्मा उपदेश करते हैं कि हे पुरुषो ! तुम तृप्तिजनक वस्तुओं का वर्णन करो, जिससे तुममें ऐश्वर्यप्राप्ति के लिये उद्योग उत्पन्न हो ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सर्वोत्पादक परमेश्वर १

Word-Meaning: - पदार्थ- हे विद्वान् लोगो! (दिवः पुत्राय) = सूर्य से उत्पन्न, सूर्य के पुत्र व (मीढुषे) = सेचन करने में समर्थ, (पर्जन्याय) = जल दाता मेघ सदृश ज्ञान-प्रकाश से बहुतों के रक्षक और हृदय में आनन्द के सेचक, (पर्जन्याय) = सब रसों के दाता, सबके उत्पादक, परमेश्वर के लिये (प्र गायत) = अच्छी प्रकार स्तुति करो। (सः) = वह (न:) = हमें (यवसम्) = अन्नादि देना (इच्छतु) = चाहे।
Connotation: - भावार्थ- ज्ञान के प्रकाश से हृदय को आनन्द देनेवाले, बादलों से जल बरसाकर प्रसन्नता देनेवाले तथा समस्त रसों व अन्नादि को बनाकर जीवन देनेवाले सर्वोत्पादक परमेश्वर की स्तुति करने की विधि विद्वान् लोग सब मनुष्यों को बताया करें।

ARYAMUNI

अथ श्लेषेण परमात्मा मेघश्च वर्ण्यते।

Word-Meaning: - भो ऋत्विजः ! यूयं (पर्जन्याय) तृप्तिजनकं परमात्मानं स्तोतुं (प्र, गायत) ब्रह्म गायत (सः, नः, यवसम्, इच्छतु) स हीश्वरोऽस्मभ्यमैश्वर्यं ददातु यः (दिवः, पुत्राय) द्युलोकस्थजनान् नरकादुद्धरति तथा (मीळ्हुषे) तेषामानन्दाय भवति ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Sing in praise of the mighty generous and virile Parjanya, the cloud that gives us showers of life and joy. It is the child of light and saviour of the brilliant. May the cloud, that bearer and harbinger of life and joy, give us lovely food for body, mind and soul.