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ती॒व्रान्घोषा॑न्कृण्वते॒ वृष॑पाण॒योऽश्वा॒ रथे॑भिः स॒ह वा॒जय॑न्तः। अ॒व॒क्राम॑न्तः॒ प्रप॑दैर॒मित्रा॑न् क्षि॒णन्ति॒ शत्रूँ॒रन॑पव्ययन्तः ॥७॥

English Transliteration

tīvrān ghoṣān kṛṇvate vṛṣapāṇayo śvā rathebhiḥ saha vājayantaḥ | avakrāmantaḥ prapadair amitrān kṣiṇanti śatrūm̐r anapavyayantaḥ ||

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Pad Path

ती॒व्रान्। घोषा॑न्। कृ॒ण्व॒ते॒। वृष॑ऽपाण॒यः। अश्वाः॑। रथे॑भिः। स॒ह। वा॒जय॑न्तः। अ॒व॒ऽक्राम॑न्तः। प्रऽप॑दैः। अ॒मित्रा॑न्। क्षि॒णन्ति॑। शत्रू॑न्। अन॑पऽव्ययन्तः ॥७॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:75» Mantra:7 | Ashtak:5» Adhyay:1» Varga:20» Mantra:2 | Mandal:6» Anuvak:6» Mantra:7


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्य किन से किन्हें जीतें, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! (प्रपदैः) अति उत्तम गमनों से (अवक्रामन्तः) इधर-उधर जाते और (अनपव्ययन्तः) व्यर्थ खर्च को न प्राप्त होते हुए तथा (रथेभिः) रमणीय यानों के (सह) साथ (वाजयन्तः) आप जाते वा दूसरों को ले जाते हुए (वृषपाणयः) वृष के समान व्यवहार जिनका वे (अश्वाः) घोड़े वा अग्नि आदि पदार्थ (तीव्रान्) तीक्ष्ण (घोषान्) शब्दों को (कृण्वते) करते हैं और (अमित्रान्) वैर करते हुए (शत्रून्) शत्रुजनों को (क्षिणन्ति) क्षीण करते हैं, उनको तुम क्षीण करो ॥७॥
Connotation: - हे राजपुरुषो ! तुम घोड़ों को अच्छे प्रकार शिक्षा देकर तथा अग्नि आदि का संप्रयोग और शत्रुओं को आक्रमण कर जीतो ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अश्वाः

Word-Meaning: - [१] (वृषपाणयः) = [पां सूनां वर्षकखुराः] धूलियों को बरसानेवाले खुरोंवाले (अश्वाः) = घोड़े (रथेभिः सह) = रथों के साथ (वाजयन्तः) = वेग को करते हुए, वेग से आगे बढ़ते हुए, (तीव्रान् पोषान्) = तीव्र शब्दों को कृण्वते करते हैं । [२] ये घोड़े (अनपव्ययन्तः) = रणांगण से न भागते हुए (प्रपदैः) = पाद के अग्र भागों से (अमित्रान्) = अमित्रों को (अवक्रामन्तः) = आक्रान्त करते हुए (शत्रून्) = शत्रुओं को (क्षिणन्ति) = हिंसित करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- उत्तम घोड़े युद्ध में आगे और आगे बढ़ते हैं। तीव्र घोषों को करते हुए ये पादाग्रों से शत्रुओं को आक्रान्त करते हैं ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्याः कैः कान् विजयेरन्नित्याह ॥

Anvay:

हे मनुष्याः ! प्रपदैरवक्रामन्तोऽनपव्ययन्तो रथेभिः सह वाजयन्तो वृषपाणयोऽश्वास्तीव्रान् घोषान् कृण्वतेऽमित्राञ्छत्रून् क्षिणन्ति तान् यूयं क्षिणध्वम् ॥७॥

Word-Meaning: - (तीव्रान्) तीक्ष्णान् (घोषान्) शब्दान् (कृण्वते) कुर्वन्ति (वृषपाणयः) वृषस्येव पाणिर्व्यवहारो येषान्ते (अश्वाः) तुरङ्गा वह्न्यादयो वा (रथेभिः, सह) रमणीयैर्यानैस्सह (वाजयन्तः) गच्छन्तो वा (अवक्रामन्तः) इतस्ततो गच्छन्तः (प्रपदैः) प्रकृष्टैः पदैर्गमनैः (अमित्रान्) वैरं कुर्वतः (क्षिणन्ति) हिंसन्ति (शत्रून्) (अनपव्ययन्तः) अपव्ययमप्राप्नुवन्तः ॥७॥
Connotation: - हे राजपुरुषा ! यूयमश्वान् सुशिक्ष्याग्न्यादीन् सम्प्रयुज्य शत्रूनाक्रम्य विजयध्वम् ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Rushing on with the chariots, the warriors of mighty arm and war horses roar with awful war cries and, crushing the unfriendly forces with their advances without ever retreating, they eliminate the enemies.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Whom should man conquer with what-is further told.

Anvay:

Strong horses yoked to the chariots and showing forth their vigor, rain dust with their hoofs and are neighing loudly. With their forefeet descending on the enemies, they never flinching, trample and destroy them. Fire, electricity etc. should be used properly.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O kings and officers of the State! you should train your horses well, apply fire, electricity etc. properly and methodically and having attacked your enemies, conquer them.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे राजपुरुषांनो ! तुम्ही घोड्यांना चांगले प्रशिक्षण देऊन अग्नी इत्यादीचा संप्रयोग करून शत्रूंवर आक्रमण करून त्यांना जिंका. ॥ ७ ॥