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क्व१॒॑त्या व॒ल्गू पु॑रुहू॒ताद्य दू॒तो न स्तोमो॑ऽविद॒न्नम॑स्वान्। आ यो अ॒र्वाङ्नास॑त्या व॒वर्त॒ प्रेष्ठा॒ ह्यस॑थो अस्य॒ मन्म॑न् ॥१॥

English Transliteration

kva tyā valgū puruhūtādya dūto na stomo vidan namasvān | ā yo arvāṅ nāsatyā vavarta preṣṭhā hy asatho asya manman ||

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Pad Path

क्व॑। त्या। व॒ल्गू इति॑। पु॒रु॒ऽहू॒ता। अ॒द्य। दू॒तः। न। स्तोमः॑। अ॒वि॒द॒त्। नम॑स्वान्। आ। यः। अ॒र्वाक्। नास॑त्या। व॒वर्त॑। प्रेष्ठा॑। हि। अस॑थः। अ॒स्य॒। मन्म॑न् ॥१॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:63» Mantra:1 | Ashtak:5» Adhyay:1» Varga:3» Mantra:1 | Mandal:6» Anuvak:6» Mantra:1


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब एकादश ऋचावाले तिरसठवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में सभासेनापति किसको प्राप्त होते हैं, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (वल्गू) शोभन वाणीवाले (पुरुहूता) बहुतों से प्रशंसा को प्राप्त (प्रेष्ठा) अतीव प्रिय (नासत्या) सत्यस्वभावयुक्त सभासेनाधीशो ! (यः) जो (अर्वाक्) नीचे जानेवाला (अद्य) आज (नमस्वान्) बहुत अन्नयुक्त वा सत्कृत (स्तोमः) स्तुति करने योग्य (दूतः) समाचार पहुँचानेवाले के (न) समान जन (अविदत्) प्राप्त होता वा (क्व) कहाँ (अस्य) इसके (मन्मन्) विज्ञान में जो (आ, ववर्त्त) अच्छे प्रकार वर्त्तमान है (त्या, हि) वे ही तुम दोनों (असथः) होते हो ॥१॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो इस जगत् के विज्ञान के निमित्त प्रयत्न करते हैं, वे कहीं भी दुःखित नहीं होते हैं ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

नमस्वान् स्तोम

Word-Meaning: - [१] (त्या) = वे (वल्गू) = अत्यन्त सुन्दर गतिवाले पुरुहूता बहुतों से पुकारे जानेवाले ये प्राणापान (क्व) = कहाँ हैं ? (अद्य) = आज यह (नमस्वान्) = नमस् [नम्रता] वाला (स्तोमः) = स्तोत्र (दूतः न अविदत्) = ज्ञान सन्देशवाहक के रूप में प्राप्त होता है। हम नम्रतापूर्वक इन प्राणों का स्तवन करते हैं। साधित प्राण बुद्धि की तीव्रता के द्वारा हमारे ज्ञान को बढ़ानेवाले होते हैं । [२] हम उस स्तोम को करते हैं, (यः) = जो (नासत्या) = प्राणापानों को (अर्वाङ् आववर्त) = हमारे अभिमुख प्राप्त कराता है। हे प्राणापानो! आप (अस्य) = इस स्तोता के (मन्मन्) = ज्ञानपूर्वक उच्चरित स्तोत्र के होने पर (हि) = निश्चय से (प्रेष्ठा) = इसके प्रियतम (असथ:) = होते हो। प्राणों का स्तवन यही है कि हम प्राणसाधना के लाभों को समझते हुए प्राणसाधना में प्रवृत्त हों।
Connotation: - भावार्थ- हम नम्रता से युक्त होकर प्राणापान का स्तवन करें। यह स्तवन हमें प्राणसाधना करेगा और हम प्राणों के प्रियतम होंगे। प्राणापान हमारे जीवन में सब सुन्दरताओं को प्रवृत्त में जन्म देंगे।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ सभासेनेशौ किं प्राप्नुत इत्याह ॥

Anvay:

हे वल्गू पुरुहूता प्रेष्ठा नासत्या ! योऽर्वागद्य नमस्वान् स्तोमो दूतो नाविदत् क्वास्य मन्मन्ना ववर्त्त त्या हि युवामसथः ॥१॥

Word-Meaning: - (क्व) (त्या) तौ (वल्गू) शोभनवाचौ। वल्गु इति वाङ्नाम। (निघं०१.११) (पुरुहूता) बहुभिः प्रशंसितौ (अद्य) इदानीम् (दूतः) समाचारप्रापकः (न) इव (स्तोमः) श्लाघनीयः (अविदत्) प्राप्नोति (नमस्वान्) बह्वन्नयुक्तः सत्कृतो वा (आ) (यः) (अर्वाक्) योऽधोञ्चति (नासत्या) सत्यस्वभावौ (ववर्त) वर्त्तते (प्रेष्ठा) अतिशयेन प्रियौ (हि) (असथः) भवथः (अस्य) (मन्मन्) मन्मनि विज्ञाने ॥१॥
Connotation: - अत्रोपमालङ्कारः। येऽस्य जगतो विज्ञाने प्रयतन्ते ते क्वापि दुःखिता न भवन्ति ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Where are the handsome twin divines, universally adored, today? Let the song of adoration reach them like an humble messenger so that the divines ever true come here and abide as the dearest divinities celebrated in song.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What do the President of the Council of Ministers and the Commander- in-Chief of the army achieve-is told.

Anvay:

O President of the Council of Ministers and Commander-in-Chief of the army, you who are endowed with noble speech, admired by many, very dear and of absolutely truthful disposition, the admirable man possessing much food or honored by others, who comes hither like a good messenger, who acts according to his knowledge, you are among them.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Those who try to acquire the true knowledge of this world do not suffer any where.
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MATA SAVITA JOSHI

या सूक्तात अश्वीच्या गुणाचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची पूर्व सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात उपमालंकार आहे. जे या जगातील विज्ञानाबाबत प्रयत्न करतात ते कधी दुःखी होत नाहीत. ॥ १ ॥