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ता भु॒ज्युं विभि॑र॒द्भ्यः स॑मु॒द्रात्तुग्र॑स्य सू॒नुमू॑हथू॒ रजो॑भिः। अ॒रे॒णुभि॒र्योज॑नेभिर्भु॒जन्ता॑ पत॒त्रिभि॒रर्ण॑सो॒ निरु॒पस्था॑त् ॥६॥

English Transliteration

tā bhujyuṁ vibhir adbhyaḥ samudrāt tugrasya sūnum ūhathū rajobhiḥ | areṇubhir yojanebhir bhujantā patatribhir arṇaso nir upasthāt ||

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Pad Path

ता। भु॒ज्युम्। विऽभिः॑। अ॒त्ऽभ्यः। स॒मु॒द्रात्। तुग्र॑स्य। सू॒नुम्। ऊ॒ह॒थुः॒। रजः॑ऽभिः। अ॒रे॒णुऽभिः॑। योज॑नेभिः। भु॒जन्ता॑। प॒त॒त्रिऽभिः॑। अर्ण॑सः। निः। उ॒पऽस्था॑त् ॥६॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:62» Mantra:6 | Ashtak:5» Adhyay:1» Varga:2» Mantra:1 | Mandal:6» Anuvak:6» Mantra:6


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उनसे क्या सिद्ध होता है, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे विद्वानो ! जो बिजुली और वायु (विभिः) पक्षियों के समान (अद्भ्यः) जलों वा (समुद्रात्) सागर वा अन्तरिक्ष वा (अर्णसः) जल के (उपस्थात्) समीप स्थित होनेवाले से (पतत्रिभिः) गमनशीलों के समान (अरेणुभिः) रज जिनमें नहीं उन (योजनेभिः) अनेक योजनों से युक्त (रजोभिः) ऐश्वर्यप्रद मार्गों से (तुग्रस्य) बलिष्ठ (सूनुम्) सन्तान के समान वर्त्तमान को (नि, ऊहथुः) निरन्तर पहुँचाते और (भुजन्ता) पालना करनेवाले (भुज्युम्) भागेने योग्य आनन्द की पालना करते हैं (ता) उनको तुम जानो ॥६॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जो बिजुली और वायु विमान आदि यानों को अन्तरिक्ष में पक्षियों के समान चलानेवाले वेग से पहुँचाते हैं, उनको समीपस्थ कर अभीष्ट सुखों को प्राप्त होओ ॥६॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

तुग्र का समुद्र से पार होना

Word-Meaning: - [१] (ता) = वे प्राणापान (तुग्रस्य सूनुम्) = वासनाओं का संहार करनेवाले के पुत्र, खूब ही वासनाओं का संहार करनेवाले, (भुज्युम्) = अपना पालन करनेवाले को (रजोभिः विभिः) = [ज्योतिः रज उच्यते नि० ४।१९] ज्योतिवाले इन्द्रियाश्वों के द्वारा (समुद्रात् अद्भ्यः) = [कामो हि समुद्रः] वासनाजलों से (निर् ऊहथुः) = बाहर प्राप्त कराते हैं। प्राणसाधना द्वारा इन्द्रियों के मल क्षीण होते हैं और ये इन्द्रियाँ हमें वासना समुद्र के जलों में डूबने नहीं देती। [२] (अरेणुभिः) = रेणु या धूलि से रहित, अमलिन (योजनेभिः) = शरीर-रथ में जुते हुए (पतत्रिभिः) = इन्द्रियाश्वों के द्वारा (भुजन्ता) = पालन करते हुये प्राणापान (अर्णसः उपस्थात्) = ज्ञान-जल की उपासना के द्वारा (निः) = साधक को विषय समुद्र से बाहिर करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्राणसाधना के द्वारा इन्द्रियाश्व निर्मल बनते हैं और ज्ञान की उपासना करते हुए हम विषय-वासनाओं के समुद्र से बाहिर हो जाते हैं।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्ताभ्यां किं सिध्यतीत्याह ॥

Anvay:

हे विद्वांसो ! यौ विद्युत्पवनौ विभिरिवाद्भ्यः समुद्रादर्णस उपस्थात् पतत्रिभिरिवारेणुभिर्योजनेभी रजोभिस्तुग्रस्य सूनुं निरूहथुर्भुजन्ता भुज्युं पालयतस्ता यूयं विजानीत ॥६॥

Word-Meaning: - (ता) तौ (भुज्युम्) भोक्तुं योग्यमानन्दम् (विभिः) पक्षिभिरिव (अद्भ्यः) उदकेभ्यः (समुद्रात्) सागरादन्तरिक्षाद्वा (तुग्रस्य) बलिष्ठस्य (सूनुम्) अपत्यमिव वर्त्तमानम् (ऊहथुः) प्रापयतः। अत्र पुरुषव्यत्ययः (रजोभिः) ऐश्वर्यप्रदैर्मार्गैः (अरेणुभिः) अविद्यमाना रेणवो वालुका येषु तैः (योजनेभिः) अनेकैर्योजनैर्युक्तैः (भुजन्ता) पालकौ (पतत्रिभिः) गमनशीलैः (अर्णसः) उदकस्य (निः) नितराम् (उपस्थात्) यः समीपे तिष्ठति तस्मात् ॥६॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः। हे मनुष्या ! यौ विद्युत्पवनौ विमानादीनि यानान्यन्तरिक्षे पक्षिवद्गमयितारौ वेगेन वहतस्तावुपस्थाप्याभीष्टानि सुखानि प्राप्नुवन्तु ॥६॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - I celebrate and glorify the twin Ashvins, protectors and sustainers of life, who raise by radiation usable products of nature’s energy from the waters and the seas by the regions of light, and who by forces of gravitation bring down by dustless usable paths of space energy from the depths of spatial waters.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What is accomplished by them-is told.

Anvay:

O highly learned persons ! you should know well these air and electricity-which carry the son of a mighty person like birds from the water, from the ocean or firmament near the water by the long paths of many miles which lead to prosperity (through business), which are free from sands and on which men walk with safety, and nourishing all enjoy happiness.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O men ! applying electricity and air properly, which take aircrafts very swiftly like the vehicles in the firmament- like birds, enjoy desired delight.
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. हे माणसांनो ! जे विद्युत व वायू विमान इत्यादी यानात अंतरिक्षामध्ये पक्ष्याप्रमाणे वेगाने पोहोचवितात त्यांच्याद्वारे अभीष्ट सुख प्राप्त करा. ॥ ६ ॥