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इ॒मं च॑ नो ग॒वेष॑णं सा॒तये॑ सीषधो ग॒णम्। आ॒रात्पू॑षन्नसि श्रु॒तः ॥५॥

English Transliteration

imaṁ ca no gaveṣaṇaṁ sātaye sīṣadho gaṇam | ārāt pūṣann asi śrutaḥ ||

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Pad Path

इ॒मम्। च॒। नः॒। गो॒ऽएष॑णम्। सा॒तये॑। सी॒स॒धः॒। ग॒णम्। आ॒रात्। पू॒ष॒न्। अ॒सि॒। श्रु॒तः ॥५॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:56» Mantra:5 | Ashtak:4» Adhyay:8» Varga:22» Mantra:5 | Mandal:6» Anuvak:5» Mantra:5


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर विद्वान् क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (पूषन्) पुष्टि करनेवाले ! जिससे आप (आरात्) समीप वा दूर से (श्रुतः) सुने हुए (असि) हो इससे (सातये) संविभाग करने के लिये (नः) हमारे (इमम्) इस (गवेषणम्) वाणी आदि पदार्थों की प्रेरणा करनेवाले को तथा (गणम्) अन्य पदार्थों के समूह को (च) भी (सीषधः) साधो ॥५॥
Connotation: - हे विद्वन् ! जिससे आप आप्त विद्वानों के गुणों से युक्त हैं, इससे हम मनुष्यों के सङ्घों को विद्वान् करो ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

गवेषण गण

Word-Meaning: - [१] हे (पूषन्) = पोषक प्रभो ! (इमं च) = और इस (नः) = हमारे (गवेषणम्) = [गवां एषयितारं ] इन्द्रियों के प्रेरक (गणम्) = प्राणसमूह [मरुत् संघ] को सातये शक्ति व ज्ञान की प्राप्ति के लिये (सीषध:) = [साधय] सिद्ध करिये। प्राणसाधना करते हुए हम सोमरक्षण के द्वारा इन्द्रियों को सशक्त व दीप्त बनायें, कर्मेन्द्रियाँ सशक्त हों और ज्ञानेन्द्रियाँ दीप्त। [२] हे पूषन् ! आप (आरात्) = दूर से दूर तथा समीप से समीप (श्रुतः) = सुने जाते हैं । 'तद्दूरे तद्वन्तिके' [दूरात् सुदूरे तदिहन्तिके च] । वे सर्वव्यापक प्रभु इस प्राणसाधना के द्वारा हमें इन्द्रियों को वश में करने की शक्ति प्राप्त करायें। ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमें उस प्राणों के गण को प्राप्त करायें जो इन्द्रियों को अन्दर प्रेरित करता है और इस प्रकार हमें शक्ति व ज्ञान को प्राप्त कराता है।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्विद्वान् किं कुर्यादित्याह ॥

Anvay:

हे पूषन् ! यतस्त्वमाराच्छ्रुतोऽसि तस्मात् सातये न इमं गवेषणं गणं च सीषधः ॥५॥

Word-Meaning: - (इमम्) (च) (नः) अस्माकम् (गवेषणम्) गवां वाचादीनामीषणं येन तम् (सातये) संविभागाय (सीषधः) साधय (गणम्) समूहम् (आरात्) समीपाद्दूराद्वा (पूषन्) पुष्टिकर्त्तः (असि) (श्रुतः) योऽश्रावि सः ॥५॥
Connotation: - हे विद्वन् ! यस्माद्भवानाप्तगुणैर्युक्तोऽस्ति तस्मादस्माकं मनुष्याणां सङ्घान् विदुषः करोतु ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - And this body of thought and speech of our socio-economic plan, pray, lead to completion and success. O lord, you are renowned far and wide as giver of success and onward progress for the achievement of wealth and honour.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should an enlightened man do—is told.

Anvay:

O nourisher ! as you are well known far and near, for proper distribution of work of division of labor, urge upon this band of men to use proper or suitable sweet and true speech.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O enlightened person! as you are "endowed with. all the virtues of an absolutely truthful reliable adept, therefore, make all our men highly learned.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे विद्वानांनो ! जसे तुम्ही विद्वानांच्या गुणांनी युक्त आहात तसे आम्हालाही विद्वान करा. ॥ ५ ॥