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उ॒तादः प॑रु॒षे गवि॒ सूर॑श्च॒क्रं हि॑र॒ण्यय॑म्। न्यै॑रयद्र॒थीत॑मः ॥३॥

English Transliteration

utādaḥ paruṣe gavi sūraś cakraṁ hiraṇyayam | ny airayad rathītamaḥ ||

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Pad Path

उ॒त। अ॒दः। प॒रु॒षे। गवि॑। सूरः॑। च॒क्रम्। हि॒र॒ण्यय॑म्। नि। ऐ॒र॒य॒त्। र॒थिऽत॑मः ॥३॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:56» Mantra:3 | Ashtak:4» Adhyay:8» Varga:22» Mantra:3 | Mandal:6» Anuvak:5» Mantra:3


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्यों को कैसा भाषण करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! जो (रथीतमः) अतीव रथादि पदार्थों से युक्त (सूरः) वीर पुरुष (अदः) उस (हिरण्ययम्) सुवर्णादि युक्त वा तेजोमय (चक्रम्) चक्र को (नि, ऐरयत्) निरन्तर प्रेरित करे वह (उत) निश्चय से (परुषे) कठोर व्यवहार में और (गवि) वाणी में नहीं प्रवृत्त हो ॥३॥
Connotation: - जो मनुष्य कठोर भाषण को छोड़ कोमल भाषण करता है, वह सदा आनन्दी होता है ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

हिरण्यय चक्र

Word-Meaning: - [१] (उत) = और यह (रथीतमः सूरः) = प्रशस्त रथी, रथ को प्रेरित करनेवाला होता हुआ [षू प्रेरणे] (परुषे) = इस [पर्ववति भास्वति वा] पूरण करनेवाली अथवा ज्ञानदीप्तिवाली (गवि) = ज्ञान दुग्ध दात्री वेद धेनु के होने पर (अदः) = उस (हिरण्ययम्) = ज्योतिर्मय (चक्रम्) = 'इन्द्रिय, मन, बुद्धि' रूप आयुध को (न्यैरयत्) = अपने में प्रेरित करता है। [२] ज्ञान की वाणियों के द्वारा यह शरीरथ ज्योतिर्मय बनता है। इसमें 'इन्द्रियाँ, मन व बुद्धि' रूप आयुध चमकते हुए होते हैं। ऐसा होने पर ही यह व्यक्ति 'रथीतम' कहलाता है, प्रशस्त रथवाला।
Connotation: - भावार्थ - हम ज्ञान दीप्ति को प्राप्त करानेवाली इन ज्ञान वाणी रूप गौवें के ज्ञानदुग्ध से 'इन्द्रियों, मन व बुद्धि' को दीप्त कर लेते हैं। हम रथीतम होते हैं, हिरण्यय चक्र को अपने में प्रेरित करते हैं ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्यैः कीदृशं भाषणं कर्त्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

हे मनुष्या ! यो रथीतमः सूरोऽदो हिरण्ययं चक्रं न्यैरयदुत स परुषे गवि न प्रवर्त्तेत ॥३॥

Word-Meaning: - (उत) अपि (अदः) तत् (परुषे) कठोरे व्यवहारे (गवि) वाचि (सूरः) वीरः (चक्रम्) (हिरण्ययम्) सुवर्णादियुक्तं तेजोमयं वा (नि) (ऐरयत्) प्रेरयेत् (रथीतमः) अतिशयेन रथादियुक्तः। अत्र संहितायामिति दीर्घः ॥३॥
Connotation: - यो मनुष्यः कठोरभाषणं विहाय कोमलभाषणं करोति स सदाऽऽनन्दी भवति ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - And that mighty hero, solar energy in combination with electric energy, at the fastest chariot like velocity, sets in motion the golden circuit of developmental evolution in the fierce rays of the sun, in the battles of life and in the fiery communication of powerful speech.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What sort of speech should be used by men-is told.

Anvay:

O men ! let not even that hero, who is possessor of many vehicles and who drives a splendid car decked with gold ; engage in a harsh speech.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - That man who uses mild language, giving up all harsh words, enjoys bliss.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जो माणूस कठोर भाषणाचा त्याग करून कोमल वाणी बोलतो तो सदैव आनंदी असतो. ॥ ३ ॥