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परि॑ तृन्धि पणी॒नामार॑या॒ हृद॑या कवे। अथे॑म॒स्मभ्यं॑ रन्धय ॥५॥

English Transliteration

pari tṛndhi paṇīnām ārayā hṛdayā kave | athem asmabhyaṁ randhaya ||

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Pad Path

परि॑। तृ॒न्धि॒। प॒णी॒नाम्। आर॑या। हृद॑या। क॒वे॒। अथ॑। ई॒म्। अ॒स्मभ्य॑म्। र॒न्ध॒य॒ ॥५॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:53» Mantra:5 | Ashtak:4» Adhyay:8» Varga:17» Mantra:5 | Mandal:6» Anuvak:5» Mantra:5


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर राजा से कौन पीड़ा देने योग्य हैं, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (कवे) विद्वन् राजन् ! आप (आरया) उत्तम कोड़ा से (पणीनाम्) द्यूत आदि व्यवहार करनेवाले पुरुषों के (हृदया) हृदयों को (परि, तृन्धि) सब ओर से मारो (अथ) इसके अनन्तर (अस्मभ्यम्) हमारे लिये (ईम्) सब ओर से दुष्टों को (रन्धय) पीड़ित करो और हमारे लिये सुख देओ ॥५॥
Connotation: - हे राजन् ! आप जो अपवित्र शिक्षा देनेवाले और छली पुरुष अपने राज्य में हों, उनको अच्छे प्रकार दण्डो, जिससे न्यायमार्ग के बीच हम लोग सुखी हों ॥५॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ज्ञानवाणीरूप आरा से कठोर मन को चोट पहुँचाना

Word-Meaning: - [१] हे (कवे) = क्रान्तप्रज्ञ विद्वन्! (पणीनाम्) = धनलुब्ध वणिजों के (हृदया) = हृदयों को (आरया परितृन्धि) = [ आरा प्रतोदः] आरे से चीर-सा डाल। इन्हें इस प्रकार ज्ञानोपदेश कर कि इन्हें हृदयों में वह ज्ञान की वाणी चुभ-सी जाये। उससे इनके हृदय इस प्रकार जागरित से हो उठें जैसे कि अंकुश से हाथी चेतन हो उठता है। [२] (अथ) = अब (ईम्) = निश्चय से इन्हें (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (रन्धय) = वशीभूत करिये, ये अपने मनों को कठोर कर ही न पायें और दें ही ।
Connotation: - भावार्थ- ज्ञानी पुरुष ज्ञान की वाणीरूप आरा से पणियों के हृदय को इस प्रकार हिंसित करें कि वह भी दान की ओर झुक ही जायें।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्नृपेण के पीडनीया इत्याह ॥

Anvay:

हे कवे ! त्वमारया पणीनां हृदया परि तृन्धि। अथाऽस्मभ्यमीं दुष्टान् रन्धयाऽस्मभ्यं सुखं देहि ॥५॥

Word-Meaning: - (परि) सर्वतः (तृन्धि) हिन्धि (पणीनाम्) द्यूतादिव्यवहारकर्त्तॄणां (आरया) प्रतोदेन (हृदया) हृदयानि (कवे) विद्वन् राजन् (अथ) (ईम्) सर्वतः (अस्मभ्यम्) (रन्धय) ॥५॥
Connotation: - हे राजन् ! त्वं येऽपूतशासनकर्त्तारः कितवाश्च स्वराज्ये स्युस्तान् सम्यग्दण्डय सतो न्यायमार्गे वर्त्तमाना वयं सुखिनः स्याम ॥५॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O lord of vision and creativity, smite the hearts of the callous niggards with a goad, and subdue them to correction and maturity for the sake of us all.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Whom should be a king punish-is told.

Anvay:

O highly learned king! punish the gamblers with whips for the happiness of good persons. Slay the wicked and make us all delighted.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O king! punish the wicked administrators and gamblers in your state, so that, we, who are treading upon the path of justice, may enjoy happiness.
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - ज्यांच्या अंगी अपवित्रता व कपट असेल असे पुरुष आपल्या राज्यात असतील तर त्यांना चांगल्या प्रकारे दंड द्या. ज्यामुळे न्यायमार्गात राहून आम्ही सुखी व्हावे. ॥ ५ ॥