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इन्द्र॒ पिब॒ तुभ्यं॑ सु॒तो मदा॒याव॑ स्य॒ हरी॒ वि मु॑चा॒ सखा॑या। उ॒त प्र गा॑य ग॒ण आ नि॒षद्याथा॑ य॒ज्ञाय॑ गृण॒ते वयो॑ धाः ॥१॥

English Transliteration

indra piba tubhyaṁ suto madāyāva sya harī vi mucā sakhāyā | uta pra gāya gaṇa ā niṣadyāthā yajñāya gṛṇate vayo dhāḥ ||

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Pad Path

इन्द्र॑। पिब॑। तुभ्य॑म्। सु॒तः। मदा॑य। अव॑। स्य॒। हरी॒ इति॑। वि। मु॒च॒। सखा॑या। उ॒त। प्र। गा॒य॒। ग॒णे। आ। नि॒ऽसद्य। अथ॑। य॒ज्ञाय॑। गृ॒ण॒ते। वयः॑। धाः॒ ॥१॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:40» Mantra:1 | Ashtak:4» Adhyay:7» Varga:12» Mantra:1 | Mandal:6» Anuvak:3» Mantra:1


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब पाँच ऋचावाले चालीसवें सूक्त का प्रारम्भ किया जाता है, उसके प्रथम मन्त्र में राजा को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (इन्द्र) राजन् ! जो (तुभ्यम्) आपके लिये (मदाय) हर्ष के अर्थ (सुतः) उत्पन्न किया गया सोमलता का रस है उसको (पिब) पीजिये उससे (अव, स्य) विनाश को अन्त करिये अर्थात् निश्चित रहिये और (उत) भी (हरी) संयुक्त घोड़ों के सदृश वर्त्तमान राजा और प्रजाजन (वि, मुचा) जो कि दुःख का त्याग करनेवाले (सखाया) मित्र होते हुए हैं, उनकी (प्र, गाय) स्तुति करिये और (गणे) गणना करने योग्य विद्वानों के समूह में (निषद्य) स्थित होकर (अथा) इसके अनन्तर (गृणते) सत्यविद्या और धर्म की प्रशंसा करनेवाले के लिये तथा (यज्ञाय) सत्य से संयुक्त होनेवाले के लिये (वयः) कामना करने योग्य अवस्था को (आ) सब प्रकार से (धाः) धारण कीजिये ॥१॥
Connotation: - हे राजन् ! आप सोमलता आदि बड़ी ओषधियों के रस का पान कर, रोगरहित होकर, सत्य और असत्य का निर्णय कर, सब मित्रों की स्तुति करके, विद्वानों की सभा में स्थित होकर और सत्य, न्याय का प्रचार करके, दीर्घ ब्रह्मचर्य्य से विद्याग्रहण के लिये सम्पूर्ण बालिका और बालकों को प्रवृत्त कराके सम्पूर्ण प्रजाओं को अधिक अवस्थावाली करिये ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

जीव का मौलिक कर्त्तव्य -

Word-Meaning: - [१] प्रभु जीव से कहते हैं कि हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष (पिब) = तू इस सोम का पान कर। (तुभ्यम्) = तेरे लिये (सुतः) = उत्पन्न हुआ हुआ यह सोम (मदाय) = हर्ष के लिये होता है। (हरी) = तू इन्द्रियाश्वों को (अव स्य) = विषय बन्धन से छुड़ा। (सखाया) = सखिभूत इन इन्द्रियाश्वों को (वि मुचा) = विशिष्ट प्रयत्न द्वारा वासना बन्धन से मुक्त कर। [२] (उत) = और (गणे) = समूह में (आ निषद्य) = स्थित होकर (प्रगाय) = प्रभु के गुणों का गान कर। सारे परिवारवाले इकट्ठे बैठकर प्रभु का गुणगान करें (अथा) = अब (यज्ञाय) = उपासनीय (गृणते) = वेदोपदेश देनेवाले उस प्रभु के लिये (वयः धा:) = जीवन को धारण कर । अर्थात् तेरा जीवन प्रभु के लिये अर्पित हो ।
Connotation: - भावार्थ- हम सोम का रक्षण करें। इन्द्रियाश्वों को विषय बन्धन से मुक्त करें। मिलकर प्रभु का गुणगान करें। जीवन को प्रभु के लिये अर्पित करें।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ राज्ञा किं कर्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

हे इन्द्र ! यस्तुभ्यं मदाय सुतः सोमोऽस्ति तं पिब तेनाऽव स्योत हरी इव वि मुचा सखाया प्र गाय गणे निषद्याथा गृणते यज्ञाय वयश्चाऽऽधाः ॥१॥

Word-Meaning: - (इन्द्र) राजन् (पिब) (तुभ्यम्) त्वदर्थम् (सुतः) निष्पादितः (मदाय) हर्षाय (अव) (स्य) निश्चिनुहि (हरी) संयुक्तावश्वाविव राजप्रजाजनौ (वि) (मुचा) यौ दुःखं विमुञ्चतस्तौ (सखाया) सुहृदौ सन्तौ (उत) (प्र) (गाय) स्तुहि (गणे) गणनीये विद्वत्सङ्घे (आ) (निषद्य) (अथा) अत्र निपातस्य चेति दीर्घः। (यज्ञाय) यो यजति सत्येन सङ्गच्छते (गृणते) सत्यविद्याधर्मप्रशंसकाय (वयः) कमनीयमायुः (धाः) धेहि ॥१॥
Connotation: - हे राजंस्त्वं सोमादिमहौषधिरसं पीत्वाऽरोगो भूत्वा सत्याऽसत्यं निर्णीय सर्वामित्राणि स्तुत्वा विद्वत्सभायां स्थित्वा सत्यं न्यायं प्रचार्य दीर्घब्रह्मचर्येण विद्याग्रहणाय सर्वा बालिका बालकांश्च प्रवर्त्य सर्वाः प्रजा दीर्घायुषः सम्पादय ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, refulgent ruler, drink the soma of joy distilled for your pleasure and majesty, let the motive power of the dominion, the government and the people, too be free and relax since they are friends. Sit in the assembly of the dominion and sing and inspire the people to celebrate the holy occasion, and bear and bring food, good health and long age for the celebrant of the dominion to carry on the corporate business of governance and administration as a yajna for the lord.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should a king do-is told.

Anvay:

O king! drink that Soma (juice of Soma the moon creeper and other invigorating herbs) which is extracted for your joy. Put an end to your suffering thereby and decide your duty. Praise those men of the State and the subjects, who like the two joint horses remove miseries, being friends to one another. Being seated in the assembly of the enlightened persons, uphold desirable long life for the admirer of the Vidya (true knowledge) and Dharma (righteousness, duty) and the person who is ever truthful.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O king! being free from all diseases and healthy by drinking the juice of Soma and other invigorating herbs, deciding truth and untruth, admiring all friends. taking your seat in the assembly of the enlightened persons, preaching true justice, urging upon all boys and girls to acquire knowledge with the observance of Brahmacharya (abstinence) for a long period and make all your subjects, long lived.
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MATA SAVITA JOSHI

या सूक्तात इंद्र, सोम, औषधी, राजा व प्रजा यांच्या कृत्याचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची पूर्व सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे राजा ! तू सोमलता इत्यादी महा औषधींच्या रसाचे पान करून रोगरहित हो. सत्य व असत्याचा निर्णय घे. सर्व मित्रांची स्तुती कर. विद्वानांच्या सभेत स्थित हो. सत्य, न्यायाचा प्रचार करून दीर्घ ब्रह्मचर्याने विद्याग्रहण कर व संपूर्ण बालक व बालिकांना प्रवृत्त करून संपूर्ण प्रजेला दीर्घायुषी बनव. ॥ १ ॥